Volkswagen का बड़ा फैसला: 4 प्लांट होंगे बंद, 1 लाख कर्मचारियों की छंटनी से मचा हड़कंप

 नई दिल्‍ली

ऑडी और पोर्श जैसी लग्‍जरी कार बनाने वाली यूरोप की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी अब ग्‍लोबल स्‍तर पर लोगों को नौकरी से निकालने की तैयारी कर रही है. फॉक्सवैगन एजी को लग्‍जरी और स्‍पोर्ट्स कार बनाने के बारे में जाना जाता है. लैम्बोर्गिनी (Lamborghini), स्कोडा (Skoda) और डुकाटी (Ducati) को भी इसी कंपनी ने बनाया है। 

यह कंपनी करीब 1 लाख लोगों को नौकरी से निकालने पर विचार कर रही है और कई कारखानों को भी बंद किया जा सकता है. मैनेजर मैगजिन की रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी ज्‍यादा कम्‍प्‍टेटिव बनाने के लिए एक्‍स्‍ट्रा जॉब्‍स में कटौती की योजना बना रही है. छंटनी का ये प्‍लान कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ओलिवर ब्लूम के प्रयासों का हिस्‍सा है। 

एक लाख की जाएगी नौकरी
ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट कहा गया है कि इस सप्ताह की शुरुआत में मैनेजिंग बोर्ड की बैठक के दौरान CEO ने एक प्रस्‍ताव पेश किया था, जिसके तहत कर्मचारियों की संख्या में दोगुनी कटौती करके 100,000 तक की छंटनी शामिल है. पोर्श और ऑडी की मालिक कंपनी फॉक्सवैगन ग्रुप में मौजूदा समय में लगभग 657,000 लोग काम करते हैं. सीईओ के इस नए प्रस्ताव को अगले महीने बोर्ड के सामने रखा जाएगा. ऐसे में फैसला अब सिर्फ बोर्ड के ऊपर है कि वह कितने लोगों की छंटनी पर मोहर लगाता है या फिर कोई अन्‍य रास्‍ता तलाश लेता है। 

4 प्‍लांट बंद करेगी कंपनी 
रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी रणनीति में इस दशक के अंत तक सामान्य खर्चों में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) की कटौती करना है, जिस कारण इतने बड़े स्‍तर पर छंटनी की तैयारी चल रही है. वहीं मिड टर्म में जर्मनी में चार कारखाने बंद करना भी शामिल है. इनमें नेकरसुलम में ऑडी का एक कारखाना और हनोवर, ज़्विकाऊ और एम्डेन में वीडब्ल्यू के प्‍लांट शामिल हैं। 

क्‍यों कंपनी पर आया संकट
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फॉक्‍सवैगन समूह को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए कंपोनेंट प्‍लांटों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से वीडब्ल्यू ब्रांड को अलग करने पर भी विचार कर रहे हैं. यह ब्रांड लंबे समय से कम मुनाफे से जूझ रहा है. कंपनी पर यह संकट तक आया है जब कंपनी अमेरिकी टैरिफ, चीन में लगातार कमजोर सेल और यूरोप में BYD और स्टेलेंटिस एनवी समेत कई कम्‍प्‍टेटिव प्‍लेयर आ गए हैं. जिस कारण कंपनी फाइनेंशियल दिक्‍कतों से जूझ रही है। 

कंपनी ने अभी तक ये कदम उठाए हैं 
अपने फाइनेंशियल कंडीशन को सुधारने के लिए ग्रुप ने कुछ खास कदम उठाए हैं. ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि कैश जुटाने के लिए कंपनी ने अपनी एवरलेंस समुद्री इंजन इकाई में 51% हिस्सेदारी बेचा है. करीब 28,000 कर्मचारियों ने वीडब्ल्यू छोड़ने पर सहमति जताई है, जो 2030 तक पूरे समूह में 50,000 कर्मचारियों की छंटनी करने के पहले ही हुआ है. कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता को भी हर साल 12 मिलियन वाहनों से घटाकर 9 मिलियन कर दिया है। 

आसान नहीं होगी छंटनी की राह
श्रमिक नेताओं ने नई योजनाओं का तुरंत विरोध किया है. कंपनी की श्रमिक परिषद और आईजी मेटाल यूनियन के संयुक्त बयान के अनुसार, ये योजनाएं कर्मचारियों और उन क्षेत्रों में अशांति पैदा करती हैं जहां हम काम करते हैं. अगर ऐसी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाता है, तो हम उनका पूरी ताकत से विरोध करेंगे। 

खैर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फॉक्सवैगन में छंटनी करना मुश्किल है. कार निर्माता कंपनी के बोर्ड में आधी सीटें श्रमिक प्रतिनिधियों के पास हैं और जर्मनी के लोअर सैक्सोनी राज्य (जो आमतौर पर श्रमिक संघों का पक्ष लेता है ) के पास दो और सीटें हैं। 

Gold-Silver Price Crash: जून में ₹17,000 टूटा सोना, ₹51,000 लुढ़की चांदी; जानें गिरावट की बड़ी वजह

इंदौर 

जिन लोगों ने जून से पहले सोना-चांदी खरीदा था, उनके लिए जून का महीना अच्‍छा नहीं रहा है, क्‍योंकि इस महीने के दौरान सोने और चांदी के भाव में भारी गिरावट देखने को मिली है. हालांकि, बहुत से निवेशक अब सोने-चांदी पर खरीदारी को लेकर दांव लगा रहे हैं। 

जून में सोने-चांदी के दाम में भारी गिरावट तब आई है, जब ईरान-अमेरिका जंग खत्‍म हो चुका है और शांति वार्ता शुरू हो चुकी है. ऐसे में सोने-चांदी के दाम में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, लेकिन फिर भी ये कीमती धातुएं तेजी से नीचे आई हैं. आइए समझते हैं कि इतनी भारी गिरावट क्‍यों आई है…

जून में सोने-चांदी के दाम में भारी गिरावट
मल्‍टी कमोडिटी एक्‍सचेंज (MCX) पर सोने की कीमत में हर 10 ग्राम पर 17,000 रुपये की गिरावट आई है. यह 29 मई से अब तक 10.36 फीसदी की गिरावट है. इसी तरह चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है. जून महीने के दौरान चांदी 51,000 रुपये कम हो गई है यानी इसमें 18.56 फीसदी की गिरावट आई है. इतनी बड़ी गिरावट के बाद निवेशक सोने-चांदी में दांव लगाने पर विचार कर रहे हैं। 

सोने-चांदी के दाम में क्‍यों आई इतनी बड़ी गिरावट? 
ईरान और अमेरिका के बीच जंग रुकने के बाद सोने और चांदी के भाव में तेजी की उम्‍मीद की जा रही थी, लेकिन फिर अमेकिरकी फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से एक बयान के बाद इसके दाम में भारी गिरावट आई. फेडरल रिजर्व के चेरमैन केविन वॉर्श ने संकेत दिया कि इस साल ब्याज दरों में में बढ़ोतरी हो सकती है. इस संकेत के बाद सोने और चांदी के भाव में बड़ी गिरावट देखने को मिली. वहीं कई एक्‍स्‍पर्ट्स भी फेडरलब रिजर्व की अगली मीटिंग में रेट में बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं, जिस कारण सोने-चांदी में लगातार गिरावट देखी जा रही है। 

इसके अलावा, निवेशकों ने ऊपरी स्‍तरों से सोने और चांदी में बिकवाली की है और सेफ असेट के बजाय शेयर बाजार में निवेश बढ़ाया है, जिस कारण सोने की गिरावट और भी बड़ी हो चुकी है।  

अभी तक कितना गिरा सोना और चांदी? 
जनवरी 2026 में अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर से सोना करीब 29% गिर चुका है. यह टूटकर 4,000 डॉलर के स्तर से नीचे आ चुका है. वहीं, चांदी में 50% से अधिक की गिरावट आई है. यह 57 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी हुई है। 

 

Honda की पहली Electric SUV जल्द होगी भारत में लॉन्च, 400KM की रेंज और दमदार फीचर्स से होगी लैस

नई दिल्ली
 जापानी कार निर्माता कंपनी Honda अपनी नई 0 Alpha इलेक्ट्रिक SUV के साथ भारत के इलेक्ट्रिक कार मार्केट में कदम रखने के लिए तैयार है। Honda 0 Alpha EV को सबसे पहले 2015 टोक्यो के जापान मोबिलिटी में दिखाया गया था। हाल ही में इस कार के प्रोटोटाइप को मनाली में टेस्टिंग के दौरान देखा गया है। इसके साल 2027 में लॉन्च होने की उम्मीद है।

कैसा हो सकता है डिजाइन?
साइज के मामले में यह SUV Honda Elevate जैसी ही होने की उम्मीद है। इसका व्हीलबेस बड़ा होगा और फर्श बिल्कुल फ्लैट जिससे अंदर ज्याजा जगह मिल सके। वहीं, इसकी छत ऊंची है और इस इलेक्ट्रिक SUV का आकार बॉक्सी है। इसका अगला हिस्सा सीधा और ऊंचा होगा जिसमें चौकोर LED हेडलाइट्स मिल सकती हैं। इसमें क्लोज्ड ग्रिल होगी और एक काली पट्टी (Black Applique) दोनों हेडलाइटस को जोड़ेगी।

कार के पीछे वर्टिकल टेललाइट्स और साफ-सुथरे डिजाइन वाला टेलगेट होने की उम्मीद है।
कैसा है इंटीरियर?

मनाली में सामने आई तस्वीरों में दिखा कि इसके केबिन में एक बड़ी स्क्रीन लगी है। यह टचस्क्रीन Honda के किसी भी मॉडल में मिलने वाली अब तक की सबसे बड़ी स्क्रीन हो सकती है। तस्वीरो में नीचे से फ्लैट-बॉटम स्टीयरिंग व्हील दिख रहा है जिस पर कंट्रोल बटन दिए गए हैं। ड्राइवर के लिए एक बड़ी और पूरी तरह डिजिटल डिस्प्ले भी दिखाई दे रही है।

कार के AC पैनल पर इल्यूमिनेटेड कंट्रोल बटन हैं और यह एक टच पैनल जैसा लगता है। तस्वीरों में दिखी इन चीजों से संकेत मिलता है कि इस कार का केबिन तकनीक के मामले में काफी आधुनिक होने वाला है।

बैटरी और रेंज
Honda 0 Alpha भारत में होंडा की पहली इलेक्ट्रिक कार होगी। इस कार में एक खास EV प्लैटफॉर्म होगा और इसका आगे के पहियों को पावर देने के लिए एक सिंगल मोटर भी लगी होगी। हालांकि, कंपनी की तरफ से इसके पावरट्रेन को लेकर कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन उम्मीद है कि इस SUV में 60kWh या 70kWh का बैटरी पैक मिल सकता है।

इसके रेंज की बात करें तो यह Alpha 0 Electric SUV एक बार चार्ज होने पर लगभग 400 किमी तक या उससे ज्यादा की रेंज दे सकती है।

Maruti Cars Price Hike: बदल गईं मारुति की कई कारों की कीमतें, जानें अब कितनी चुकानी होगी रकम

 नई दिल्ली

मारुति सुजुकी ने अपनी कारों की कीमतों में इजाफे का ऐलान पिछले महीने किया था. जून 2026 से कारों की कीमतें बढ़ गई हैं, लेकिन अब धीरे-धीरे मारुति की कारों की बढ़ी हुई कीमतें सामने आ रही हैं. ब्रांड ने गाड़ियों की कीमतों को 30 हजार रुपये तक बढ़ाने का ऐलान किया है. कई कारों की नई कीमतें सामने आ गई थी और कुछ की अब आ रही हैं। 

ब्रांड ने वैगनआर से लेकर जिम्नी तक सभी मॉडल्स की कीमतों में इजाफा किया है. वैगनआर की कीमत कंपनी ने 5 हजार रुपये बढ़ाई है. अब ये कार 4.99 लाख रुपये से 7.24 लाख रुपये की एक्स शोरूम कीमत पर आती है. इसके अलावा कंपनी ने पॉपुलर ऑफ-रोडर जिम्नी (Jimny) की कीमतों को बढ़ा दिया है। 

इस कार की कीमत भी 7500 रुपये बढ़ी है. बढ़ोतरी के बाद इसकी कीमत 12.39 लाख रुपये से शुरू होकर 14.36 लाख रुपये तक जाती है. ये ब्रांड की 5-डोर फोर वील ड्राइव एसयूवी है. कीमतों के इजाफे का असर जीटा और अल्फा, मैन्युअल और ऑटोमेटिक के साथ डुअल टोन और मोनोटोन सभी वेरिएंट्स पर पड़ा है। 

कई कारों की कीमतें बढ़ी हैं
मारुति ने जिम्नी के अलावा दूसरी कारों की कीमतों में भी इजाफा किया है. स्विफ्ट की कीमत 7500 रुपये बढ़ी है. इसकी कीमत 5.79 लाख रुपये से 8.69 लाख रुपये तक है. वहीं बलेनो की कीमत में 7500 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद कार की कीमतें 5.99 लाख रुपये से शुरू होती है और 9.17 लाख रुपये तक जाती है। 

वहीं डिजायर की कीमत भी 7500 रुपये बढ़ी है. ये कार अब 6.25 लाख रुपये से 9.36 लाख रुपये तक की कीमत पर आती है. फ्रॉन्क्स के दाम में भी 7500 रुपये का इजाफा हुआ है. मारुति सुजुकी अर्टिगा के लिए अब 10 हजार रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे. ये कार 8.85 लाख रुपये से शुरू होकर 12.99 लाख रुपये तक की एक्स शोरूम कीमत पर आती है. एक्सएल 6 भी 10 हजार रुपये महंगी हुई है। 

वहीं इनविक्टो का प्राइस 25 हजार रुपये बढ़ा है. ये कार अब 24.97 लाख रुपये से शुरू होती है और 28.60 लाख तक जाती है. ई-विटारा की कीमतों में 30 हजार रुपये और मारुति ईको वैन की कीमत में 5 हजार रुपये का इजाफा हुआ है. वैसे इन सभी गाड़ियों की कीमतें जून में ही बढ़ा दी गई हैं। 

Silver Price Crash: चांदी के दाम में 4% से ज्यादा की बड़ी गिरावट, जानिए चीन कनेक्शन और वजह

नई दिल्ली

भारत के बाजार जहां मुहर्रम की वजह से बंद हैं वहीं, इंटरनेशनल मार्केट में चांदी के भाव में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। आज यानी शुक्रवार (26 जून) को कॉमेक्स पर सोने और चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कॉमेक्स सिल्वर में और भी तेज बिकवाली देखी गई और यह 4.44 प्रतिशत गिरकर 55.77 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि इसका पिछला बंद भाव 58.025 डॉलर प्रति औंस था।

वहीं, कॉमेक्स गोल्ड 44.80 डॉलर यानी 1.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,002.80 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र के दौरान इसने 4,001.20 डॉलर प्रति औंस का निचला स्तर भी छुआ।

यह गिरावट सोने के लिए लगातार चौथे साप्ताहिक नुकसान की ओर इशारा करती है। हाल के अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कीमतों में दबाव अभी भी बना हुआ है, जिससे निवेशकों का ध्यान फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा पर केंद्रित हो गया है।

क्यों गिर रहे सोने-चांदी के दाम
चीन से आई सुस्त मांग की खबर:
रॉयटर्स की खबर के मुताबिक चीन के हांगकांग के माध्यम से सोने के शुद्ध आयात में मई के दौरान लगभग 38 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक से भौतिक मांग के कमजोर पड़ने का संकेत है। चीन से कम मांग की खबर ने भी वैश्विक सोने के बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।

महंगाई ने बढ़ाई फेड की चिंता: गुरुवार (25 जून) को जारी आंकड़ों से पता चला कि अमेरिका में मई के दौरान महंगाई तीन वर्षों में पहली बार 4 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई। इसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में तनाव के चलते बढ़ती ऊर्जा कीमतें रहीं। मुद्रास्फीति में यह तेज वृद्धि उन उम्मीदों को मजबूत करती है कि फेडरल रिजर्व अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त करना जारी रख सकता है।

फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: फेड अधिकारियों ने भी सतर्क रुख अपनाया है। शिकागो फेड प्रेसिडेंट ऑस्टेन गूल्सबी ने कहा कि सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति में कुछ सुधार के बावजूद, मुद्रास्फीति का दबाव अभी भी ऊंचा बना हुआ है। वहीं, न्यूयॉर्क फेड प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स ने स्पष्ट किया कि मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी ऊपर है।

CME FedWatch के आंकड़ों के अनुसार, ट्रेडर्स अब इस वर्ष तीन ब्याज दर वृद्धि की संभावना जता रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में सितंबर में दर वृद्धि की उम्मीदें तेजी से बढ़ी हैं। ब्याज दरों में वृद्धि का सीधा असर सोने-चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर पड़ता है, क्योंकि निवेशक उनकी बजाय ब्याज देने वाली संपत्तियों की ओर रुख करते हैं।

मजबूत डॉलर ने बढ़ाई कीमतों पर मुश्किल: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त की ओर बढ़ रहा है, जो सोने-चांदी के लिए एक और नकारात्मक संकेत है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना-चांदी महंगा हो जाता है, जिससे मांग पर दबाव पड़ता है और कीमतों में गिरावट आती है। इसके अलावा, डॉलर की मजबूती वैश्विक बाजारों में निवेशकों के जोखिम उठाने के रुख को भी प्रभावित करती है।

जियो-पॉलिटिकल टेंशन का बाजार पर असर: जियो-पॉलिटिकल टेंशन भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने एक जहाज पर हमले की रिपोर्ट के बाद होर्मुज के माध्यम से जहाजों के संरक्षण अभियानों को रोक दिया है। इस घटना ने अमेरिका-ईरान के नाजुक शांति समझौते को लेकर नई अनिश्चितताएं पैदा कर दी हैं। इस तरह की घटनाओं से ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा बना रहता है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।

अमेरिकी PCE डेटा पर टिकी निगाहें: बाजार सहभागी अब आगामी अमेरिकी PCE (व्यक्तिगत उपभोग व्यय) मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। यह डेटा ब्याज दरों की उम्मीदों और कीमती धातुओं की दिशा के लिए अतिरिक्त संकेत प्रदान कर सकता है। PCE, फेडरल रिजर्व का पसंदीदा मुद्रास्फीति मापक माना जाता है, इसलिए इसके आंकड़ों का बाजार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

 

LPG Rule Change: कच्चा तेल सस्ता होते ही बड़ा फैसला, आज से हटीं ये पाबंदियां, उपभोक्ताओं को राहत

 नई दिल्‍ली

एलपीजी को लेकर सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. अभी तक जो भी नियम कायदे और पाबंदियां लागू थीं, उसे अब खत्‍म कर दिया गया है. लेकिन यह सिर्फ इंडस्ट्रियल और कमर्शियल LPG ग्राहकों के लिए ही है. सरकार ने नॉन-डोमेस्टिक पैक्ड LPG की सप्लाई पर लगी सभी सेक्टर-वाइज पाबंदियां हटा दी हैं और सप्लाई को वेस्ट एशिया संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया है। 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि संकट की शुरुआत में रोकी गई बल्क LPG की सप्लाई में भी ढील दी गई है. इसे संकट से पहले की खपत के स्तर का 50% कर दिया गया है, जिससे कमर्शियल और इंडस्ट्रियल कस्‍टमर्स को काफी राहत मिली है. यह बहाली LPG सप्लाई की स्थिति में हाल ही में हुए सुधार के बाद की गई है.  सरल शब्‍दों में कहें तो 50 फीसदी एलपीजी की सप्‍लाई अब कमर्शियल और इंडस्‍ट्री कस्‍टमर्स को की जाएंगी। 

वेस्ट एशिया संकट के दौरान, घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ के तहत आदेश जारी किए थे. इन आदेशों के तहत C3-C4 स्ट्रीम्स का इस्तेमाल सिर्फ़ LPG उत्पादन के लिए करना जरूरी कर दिया गया था और उन्हें पेट्रोकेमिकल व अन्य डाउनस्ट्रीम इस्तेमाल से हटाकर LPG उत्पादन में लगाया गया था। 

C3-C4 स्ट्रीम्स को लेकर बदलाव
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि घरेलू LPG उत्पादन में सुधार और इम्पोर्टेड LPG कार्गो की अनुमानित उपलब्धता को देखते हुए, सरकार ने LPG पूल में C3/C4 स्ट्रीम्स के डायवर्जन को कम करने का भी फैसला किया है. नॉन-LPG इस्तेमाल के लिए C3-C4 स्ट्रीम्स का बढ़ा हुआ आवंटन लागू किया जाएगा, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि घरेलू LPG की उपलब्धता पर कोई असर न पड़े। 

घरेलू एलपीजी पर कोई असर नहीं
सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोकेमिकल सेक्टर के लिए C3-C4 गैसों का आवंटन बढ़ाने के बावजूद आम जनता के लिए घरेलू एलपीजी की उपलब्‍धता को कम नहीं किया जाएगा. सरकार यह तय करेगी कि घरेलू एलपीजी का उत्‍पादन कम से कम 40 टीएमटी हर दिन बना रहे. इसका मतलब है कि रसोई एलपीजी गैस की सप्‍लाई बनी रहेगी।

कच्‍चे तेल के दाम में बड़ी गिरावट 
जंग शुरू होने से पहले कच्‍चा तेल जिस लेवल पर पहुंचा था, अब उससे भी नीचे आ चुका है. ब्रेंट क्रूड की कीमत अब 72 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है. तेल की कीमतों में यह गिरावट तब आई है, जब होर्मुज को फिर से खोल दिया गया है और जहाज तेजी से होर्मुज पार कर रहे हैं। 

CRED के पास करोड़ों यूजर्स का डेटा, क्या मार्क जुकरबर्ग को मिलेगा एक्सेस? उठे बड़े सवाल

 नई दिल्ली

अगर आप पुराने फेसबुक यूजर हैं तो आपको ये बात पता होगी. फेसबुक के लॉगइन पेज पर एक टैगलाइन लिखी होती थी. ‘फेसबुक फ्री है और हमेशा फ्री रहेगा’. लेकिन ऐसा नहीं है फेसबुक अब दर्जनों पेड सर्विस चलाता है और डेटा बेचता है। 

दिलचस्प ये है कि कई साल पहले ही वो टैगलाइन भी कंपनी ने लॉगइन पेज से हटा ली. एक वादा टूटा. फिर जब वॉट्सऐप को जकरबर्ग ने खरीदा तो एक और वादा किया गया. वादा ये था कि वॉट्सऐप को अलग रखा जाएगा और इसका डेटा नहीं बेचा जाएगा ना वॉट्सऐप से कमाई की जाएगी. ये वादा भी काफी पहले टूट चूका। 

हर बार जकरबर्ग ने तोड़ा है वादा, क्या कुणाल शाह भी ऐसा करेंगे?

अब एक और वादा देखने को मिला है. भारतीय ऐप क्रेड के फाउंडर कुणाल शाह वॉट्सऐप के ग्लोबल सीईओ बन गए हैं और क्रेड में मेटा ने 900 मिलियन डॉलर्स निवेश कर दिया है. लोगों को तुरंत लगा कि अब क्रेड का डेटा भी फेसबुक का हो जाएगा, लेकिन जैसे फेसबुक और वॉट्सऐप के शुरुआती समय में वादा किया गया था, यहां भी एक वादा दिखा। 

कंपनी का स्टैंड है कि वो क्रेड का डेटा नहीं देगी. लेकिन क्या आप इस बात को मानेंगे कि मेटा, मार्क जकरबर्ग और क्रेड के कुणाल शाह अपने इस वादे पर कायम रहेंगे? कब तक? 

वॉट्सऐप दो लोगों ने मिलकर बनाया था. ब्रायन ऐक्टन और जेन कूम. दोनों ही प्राइवेसी के बड़े एडवोकेट थे और डेटा नहीं बेचना चाहते थे. उन्होंने तय किया था कि वो कुछ भी हो जाए, लेकिन यूजर डेटा नहीं बेचेंगे। 

ऐप ने खूब तरक्की की और बाद में फेसबुक ने वॉट्सऐप को खरीद लिया. मार्क जकरबर्ग का वादा था कि वो वॉट्सऐप से कभी पैसे नहीं कमाएंगे और ना ही वॉट्सऐप का यूजर डेटा बेचेंगे। 

कुछ साल सबकुछ ठीक चला, लेकिन मार्क जकरबर्ग अपनी आदत के मुताबिक पूराना वादा भूल गए और वॉट्सऐप का यूजर डेटा पेरेंट कंपनी यानी फेसबुक सर्विसेज के साथ शेयर होने लगा. आलम ये है कि अब वॉट्सऐप पर ऐड्स आ रहे हैं और पेड प्लान लॉन्च हो गए हैं। 

वॉट्सऐप के फाउंडर का मैने इंटरव्यू किया तो उन्होंने बाताया था कि वॉट्सऐप की असली ताकत काफी पहले खत्म हो चुकी है. शुरुआत में वॉट्सऐप के दोनों फाउंडर्स ऐप बिकने के बाद भी कंपनी में काम करते रहे, लेकिन धीरे धीरे डेटा शेयरिंग को लेकर मार्क जकरबर्ग से उनकी तकरार बढ़ी और दोनों ने ही वॉट्सऐप को छोड़ दिया। 

क्रेड और कुणाल शाह के पास भारतीय यूजर्स का संवेदनशील डेटा
असल में क्रेड एक डेटा प्लेटफॉर्म है, जो भारत के सबसे प्रीमियम यूजर्स का बेहद गहरा और संवेदनशील डेटा अपने पास रखता है. यह डेटा सिर्फ नाम और नंबर तक सीमित नहीं है. इसमें यूजर का खर्च करने का तरीका, उसकी फाइनेंशियल आदतें, उसकी क्रेडिट हिस्ट्री, यहां तक कि उसकी लाइफस्टाइल तक शामिल है। 

अगर कोई यूजर अपने ईमेल को क्रेड से लिंक करता है, तो ऐप को उसके क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट, बिल, इंश्योरेंस, निवेश और लोन से जुड़ी जानकारी तक पहुंच मिल जाती है. यानी यूजर की पूरी फाइनेंशियल प्रोफाइल एक ही जगह तैयार हो जाती है। 

यही वजह है कि भले ही क्रेड सालों से घाटे में चल रही कंपनी रही हो, लेकिन उसकी वैल्यू कम नहीं हुई. क्योंकि टेक दुनिया में आज सबसे कीमती चीज प्रॉफिट नहीं, डेटा है. और वो भी ऐसा डेटा जो क्लीन हो, भरोसेमंद हो और हाई-वैल्यू यूजर्स का हो। 

अब इसे वॉट्सऐप के साथ जोड़कर देखिए. भारत में वॉट्सऐप के 50 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं. यह दुनिया का सबसे बड़ा वॉट्सऐप बाजार है. लेकिन इतने बड़े यूजर बेस के बावजूद वॉट्सऐप की सबसे बड़ी समस्या रही है… कमाई। 

मेटा पिछले कई सालों से वॉट्सऐप को मोनेटाइज करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे वैसी सफलता नहीं मिली जैसी गूगल पे, फोन पे या पेटीएम को मिली. यहीं पर CRED और कुनाल शाह का रोल अहम हो जाता है। 

मेटा के लिए क्यों जरूरी हैं कुणाल शाह?
कुणाल शाह ने FreeCharge से लेकर CRED तक एक चीज बार-बार साबित की है, वह टेक्नोलॉजी से ज्यादा लोगों के बिहेवियर को समझते हैं. वह जानते हैं कि यूजर कब खर्च करता है, क्यों करता है और उसे किस तरह के ऑफर से रोका या बढ़ाया जा सकता है. सबसे बड़ी बात कुणाल शाह के ऐप के पास भारतीय यूजर्स के सेंसिटिव डेटा का भरमार है. ऐसा डेटा जो मेटा भारत में अब तक हासिल नहीं कर पाया है। 

मेटा को अब ऐसे ही लीडर की जरूरत है. क्योंकि वॉट्सऐप का अगला फेज सिर्फ मैसेजिंग का नहीं, बल्कि पेमेंट, लोन, इंश्योरेंस और शॉपिंग का होने वाला है. लेकिन इस पूरी कहानी का एक दूसरा और ज्यादा गंभीर पहलू भी है। 

जब फेसबुक ने वॉट्सऐप को खरीदा था, तब यह कहा गया था कि वॉट्सऐप यूजर डेटा को फेसबुक के साथ शेयर नहीं करेगा. लेकिन समय के साथ यह वादा कमजोर होता गया. आज वॉट्सऐप और मेटा के बीच डेटा शेयरिंग को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। 

अब मेटा ने क्रेड में करीब 900 मिलियन डॉलर का निवेश किया है. साथ ही क्रेड के फाउंडर को वॉट्सऐप की कमान सौंपी जा रही है. मेटा यह जरूर कहता है कि उसे क्रेड यूजर डेटा तक सीधी पहुंच नहीं मिलेगी. लेकिन टेक इंडस्ट्री के पैटर्न को देखें तो यह भरोसा पूरी तरह से सहज नहीं लगता। 

इतिहास यही बताता है कि जब निवेश, लीडरशिप और प्लेटफॉर्म एक ही दिशा में जुड़ते हैं, तो डेटा का फ्लो भी धीरे-धीरे उसी डायरेक्शन में बढ़ता है. अगर फ्यूचर में क्रेड और वॉट्सऐप के बीच किसी भी तरह का डेटा इंटीग्रेशन होता है, तो इसके नतीजे बहुत बड़े हो सकते हैं. क्योंकि क्रेड के पास भारत के सबसे प्रीमियम और फाइनेंशियली एक्टिव यूजर्स का डेटा है, जबकि वॉट्सऐप के पास सबसे बड़ा यूजर बेस। 

क्रेडिट कार्ड और तमाम फिनांशियल डिटेल्स
इन दोनों के मेल से एक ऐसा सिस्टम बन सकता है जो यूजर के बिहेवियर को समझकर उसे टारगेटेड ऑफर दे, लोन दे, खरीदारी कराए और पूरी डिजिटल लाइफ को कंट्रोल करे. यह सुविधा के नाम पर एक सुपर ऐप होगा, लेकिन इसके पीछे डेटा सेंट्रलाइज्ड भी होगा। 

भारत के लिए यह स्थिति और सेंसिटिव है. भारत पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल मार्केट बन चुका है. यहां के यूजर्स की संख्या भी सबसे ज्यादा है और डेटा भी. ऐसे में अगर इस डेटा का इस्तेमाल सिर्फ कंपनियों के फायदे के लिए होता है, तो यह चिंता का विषय है। 

कुणाल शाह की कहानी जरूर एक नजीर है. उन्होंने 2010 में फ्रीचार्ज नाम का ऐप शुरू किया, जिसे 2015 में स्नैपडील को लगभग 449 मिलियन डॉलर में बेच दिया। 

दिलचस्प बात यह है कि स्नैपडील ने कुछ ही सालों बाद फ्रीचार्ज ऐप को भारी नुकसान में बेच दिया. इसके बाद 2018 में उन्होंने क्रेड शुरू किया, जो आज भी कई सालों से घाटे में होने के बावजूद एक हाई-वैल्यू कंपनी बनी हुई है। 

हाल ही में ये भी देखने को मिल रहा है कि कैसे भारत को ग्लोबल AI कंपनियां डेटा कलेक्शन के लिए यूज कर रही हैं. चूंकि भारत में सबसे ज्यादा यूजर्स हैं, इसलिए फ्री सर्विसेज दे कर यहां के यूजर्स के डेटा पर एआई को ट्रेन किया जा रहा है. अगर इतना डेटा कंपनी खरीदे तो अरबों डॉलर्स देने होते, लेकिन भारतीय यूजर्स फ्री में ग्लोबल एआई मॉडल्स को ट्रेन कर रहे हैं. इतना ही नहीं, अमेरिकी कंपनियां अपने एडवांस्ड एआई मॉडल भारत में लॉन्च भी नहीं कर रही हैं। 

ये तमाम चीजें इस बात की तरफ इशारा करती हैं कि क्या भारत फिर से सिर्फ एक डेटा सोर्स बनकर रह जाएगा? क्या भारतीय यूजर्स की फाइनेंशियल और पर्सनल जानकारी धीरे-धीरे ग्लोबल टेक कंपनियों के कंट्रोल में चली जाएगी? और क्या हम सुविधा के बदले अपनी डिजिटल पहचान और प्राइवेसी खो देंगे?

PM मोदी से मिले Amazon CEO, भारत में ₹1220000000000 लाख करोड़ निवेश का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली
अमेजन ने भारत में एक और बड़े निवेश का एलान किया है। Amazon के CEO एंडी जेसी भारत दौरे पर हैं, और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) से मुलाकात की। इस दौरान एंडी जेसी ने घोषणा की है कि कंपनी 2030 तक AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए देश में अतिरिक्त $13 बिलियन (1.22 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। यह अतिरिक्त निवेश Amazon द्वारा भारत में $35 बिलियन के नए निवेश की घोषणा के छह महीने के भीतर किया गया है।

कंपनी के अनुसार, दिसंबर 2025 में घोषित $35 बिलियन और 25 जून को घोषित $13 बिलियन के निवेश को मिलाकर, 2010-2030 के बीच भारत में Amazon का कुल निवेश $88 बिलियन से ज़्यादा हो गया है।

AI में भारी निवेश
इस नए निवेश के साथ, Amazon भारत में AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाली सबसे बड़ी ग्लोबल कंपनियों में से एक बन गई है। इसके अलावा, Amazon भारत में सबसे बड़ी विदेशी निवेशक, ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने वाली सबसे बड़ी कंपनी और देश में सबसे ज़्यादा नौकरियां देने वाली कंपनियों में से एक है।

अमेज़न के CEO एंडी जेसी ने कहा: “हम एक दशक से भी पहले भारत आए थे और तब से अपने अलग-अलग बिज़नेस के ज़रिए ग्राहकों, सेलर्स, डेवलपर्स, स्टार्ट-अप्स और कंपनियों को सेवा दे रहे हैं। हमें बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है, खासकर हमारे ई-कॉमर्स, AI और क्लाउड बिज़नेस में ज़बरदस्त ग्रोथ हुई है।”

20 साल में 88 अरब डॉलर का निवेश
अमेजन ने भले ही 6 महीने के भीतर 48 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान कर डाला है, लेकिन साल 2010 से 2030 तक के कुल निवेश को देखा जाए तो अमेजन ने भारत में करीब 88 अरब डॉलर का निवेश कर दिया है. हालिया निवेश घोषणा के बाद अमेजन भारत में ग्‍लोबल एआई और क्‍लाउड इन्‍फ्रा पैसे लगाने वाली सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है. साथ ही यह सबसे बड़ी विदेशी निवेशक भी बन चुकी है. अमेजन भारत में सबसे बड़ी विदेशी निर्यात करने वाली ई-कॉमर्स कंपनी के साथ ही जॉब पैदा करने वाली विदेशी कंपनी भी है। 

कई साल से भारत में दे रहे सेवाएं
अमेजन के सीईओ ने बताया कि उनकी कंपनी दशकों पहले भारत आई थी और इसके बाद से ही यहां लगातार सेवाएं दे रही है. अमेजन आज अपने कस्‍टमर्स, सेलर, डेवलपर्स, स्‍टार्टअप और छोटी कंपनियों सहित तमाम कारोबार को सेवाएं दे रही है. अभी तक का प्रदर्शन काफी बेहत रहा है, खासकर ई-कॉमर्स, एआई और क्‍लाउड के बिजनेस में अमेजन काफी अच्‍छा काम कर रही है। 

पीएम मोदी की जमकर तारीफ
एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद कहा क‍ि अमेजन भारत में अपने विकास के साथ यहां छोटे कारोबारियों की मदद करने और जॉब पैदा करने में भी सहयोग दे रही है. हमने अगले 5 साल में 48 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है, जो देश के हर क्षेत्र की डिमांड के हिसाब से किया जाएगा. हम पीएम मोदी के विजन से काफी प्रभावित हैं, जो विकसित और आत्‍मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं के जरिये लॉन्‍ग टर्म में विकास का हिस्‍सा बनने के लिए प्रेरित करते हैं। 

38 लाख नौकरियां पैदा करने में मदद
एंडी जेसी ने कहा कि पीएम मोदी के इस विजन के साथ अमेजन ने करीब 38 लाख नौकरियां पैदा की हैं और 80 अरब डॉलर के ई-कॉमर्स निर्यात में भी मदद की है. इसके अलावा 1.5 करोड़ से ज्‍यादा छोटे कारोबारियों तक एआई का फायदा पहुंचाने के साथ साल 2030 तक 40 लाख सरकारी स्‍कूलों तक भी एआई की सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्‍य है. साल 2026 से 2030 के बीच भारत में अमेजन 48 अरब डॉलर का निवेश करेगी, जिसमें से 21 अरब डॉलर का इस्‍तेमाल तो सिर्फ एआई और क्‍लाउड निवेश में किया जाएगा। 

भारत को लेकर क्या हैं प्राथमिकताएं
एंडी जेसी ने कहा, “जैसे-जैसे हम भारत में Amazon का विस्तार कर रहे हैं, हमारे बिज़नेस की प्राथमिकताएं भारत की प्राथमिकताओं के साथ मेल खाती जा रही हैं – जैसे AI तक पहुंच को आसान बनाना, छोटे बिज़नेस को डिजिटल बनाना, रोज़गार पैदा करना और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना।

भारत में अपने बिज़नेस की बढ़ती मांग को पूरा करने और देश को इन प्राथमिकताओं को हासिल करने में मदद करने के लिए हम अगले पाँच सालों में $48 बिलियन से ज़्यादा का निवेश कर रहे हैं।” एंडी जेसी ने यह भी कहा कि हम प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित और आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न से प्रेरित हैं और भारत के साथ लंबे समय तक पार्टनर बने रहने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 

Gold Price Crash: 3 महीने के निचले स्तर पर सोना, रॉबर्ट कियोसाकी बोले- ‘मैं खरीदने को तैयार हूं’

 नई दिल्ली

सोना सस्ता हो रहा है, चांदी भी दनादन क्रैश होती नजर आ रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX तक पर सोना-चांदी का भाव टूटा है. हाल ये है कि गोल्ड रेट अब 12 हफ्ते या तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया है. इस बीच मशहूर किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब एक्स) पर एक पोस्ट किया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है. Gold Price Crash के बीच उन्होंने कहा है कि ये बहुत अच्छी खबर है, सोना सस्ता हो रहा है और मैं इसे खरीदने की तैयारी कर रहा हूं। 

सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट
बीते कुछ दिनों में सोना-चांदी की कीमतों में तगड़ी गिरावट देखने को मिली है. बुधवार को टूटते हुए Gold-Silver Rate करीब तीन महीने के लो-लेवल पर आ गए. इसके पीछे की वजह का जिक्र करें, तो जियो-पॉलिटिकल तनाव कम होने और अमेरिकी ब्याज दरों के लंबे समय तक हाई पर बने रहने का उम्मीद के बीच निवेशक डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं. MCX Gold Rate की बात करें, तो 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1.41 लाख रुपये पर आ गया है. तो वहीं MCX Silver Price गिरते हुए 2.12 लाख रुपये तक टूट गई।  

‘मैं और खरीदूंगा सोना…’
कीमती धातुओं के भाव में बड़ी गिरावट के बीच ‘Rich Dad Poor Dad’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी (Robert Kiyosaki) ने अपनी नई पोस्ट में सोना-चांदी में गिरावट को खरीदारी का बेहतरीन मौका बताया है. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट (Robert Kiyosaki X Post) में लिखा, ‘बड़ी खुशखबरी: सोने की कीमत गिर रही है और मैं तकनीकी चार्ट में बदलाव का इंतजार कर रहा हूं, इसके साथ ही मैं सोना और खरीदूंगा। 

कियोसाकी ने बताया अपना प्लान
रॉबर्ट कियोसाकी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अपनी खरीदारी के प्लान को एक उदाहरण के जरिए बताया. उन्होंन लिखा, ‘ट्रेंड ही आपका दोस्त है! मैं पुराना सबक दोहरा रहा हूं. सोने का टूटना वैसा ही है, जैसे किसी घर की कीमत का गिरना. मैं यह जानना चाहता हू कि आस-पास के इलाके में क्या हो रहा है? अगर इलाके की कीमत बढ़ रही है, तो मैं कम कीमत वाला घर खरीद सकता हूं. वहीं अगर इलाके की कीमत गिर रही है, तो मैं कम कीमत वाला घर खरीदने का प्लान छोड़ सकता हूं। 

कियोसाकी के मुताबिक, ठीक ऐसा ही सोने के साथ ही मैं Gold Rate Fall देख रहा हूं और मुझे जानना है कि ऐसा क्यों हो रहा है? इकोनॉमी में आखिर क्या चल रहा है. अगर ये गिर रही है, तो शायद मैं सोना न खरीदूं, लेकिन सोने की कीमत गिरने के साथ जिस पल मुझे लगेगा कि इकोनॉमी ऊपर जा रही है, मैं बहुत कम कीमत पर सोना खरीद सकता हूं. उन्होंने अपने गोल्ड एसेट्स के बारे में बताते हुए लिखा, ‘आज मेरे पास जो सोना है, उसमें से ज्यादातर मैंने 300 डॉलर (उस समय लगभग 20,000 रुपये) के भाव में खरीदा था. अपना ख्याल रखें। 

गौरतलब है कि रॉबर्ट कियोसाकी सोशल मीडिया पर खासे एक्टिव रहते हैं और उनकी पोस्ट में अक्सर सोना-चांदी, बिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी में निवेश की सलाह दी जाती है. डॉलर, स्टॉक, बॉन्ड को नकली करेंसी बताते हुए वे Gold-Silver-Bitcoin को अमीर बनने का जरिया बताते हैं। 

26 मार्च के बाद सबसे सस्ता सोना
साल 2026 की शुरुआत में सोना-चांदी की कीमतों में आग लगी हुई नजर आई थी. Gold Rate तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था, तो वहीं चांदी की कीमत 100 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई थी. लेकिन हालिया महीनों में इसकी कीमत तेजी से नीचे आई है. एक्सचेंज के आंकड़ों से पता चला कि दोनों कीमती धातुओं ने 26 मार्च, 2026 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर को छू लिया है। 

लगातार दूसरे दिन सस्ता हुआ सोना-चांदी, चांदी ₹3000 और सोना ₹2000 तक हुआ सस्ता

इंदौर 
सोने और चांदी का रेट आज 24 जून को लगातार दूसरे दिन फिसल गया है. सोने का भाव आज एमसीएक्स पर सुबह 9:40 बजे पर 2234 रुपये गिरकर 144295 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. चांदी का भाव भी 3407 रुपये फिसलकर 222427 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा है. कॉमैक्स पर गोल्ड का दाम 1.59% गिरकर 4081 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है. सिल्वर 1.55% फिसलकर 61.110 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। 

सोने के अलावा अन्य कीमती धातुओं की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली. प्लैटिनम 0.9% की कमजोरी के साथ 1,637.34 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा. इसके अलावा, पैलेडियम की कीमत में 1.2% की गिरावट आई और यह 1,223.29 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। 

अलग-अलग शहरों में कितना है सोने का रेट?
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सराफा बाजार की बात करें तो चेन्नई में 24 कैरेट सोना 14,792 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 13,559 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 11,339 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है. वहीं, दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 14,474 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट का 13,269 रुपये और 18 कैरेट का 10,859 रुपये प्रति ग्राम है। 

मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में सोने की कीमतें लगभग समान रहीं. इन शहरों में 24 कैरेट सोना 14,459 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 13,254 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 10,844 रुपये प्रति ग्राम पर रहा। 

क्या सोने में आएगी और गिरावट?
जर्मनी के प्रमुख बैंक डच बैंक(Deutsche Bank) ने सोने की कीमतों को लेकर अपने अनुमान में 20% से अधिक की कटौती की है. बैंक का कहना है कि अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में 3 से 4 बार बढ़ोतरी की संभावना बाजार में मजबूत होती है, तो सोने की कीमत गिरकर 3,800 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक की दी गई जानकारी में बताया गया है कि एमपीसी को लेकर बदलती उम्मीदों ने सोने के लिए रिस्क का संतुलन नीचे की ओर कर दिया है। 

डच बैंक के विश्लेषक माइकल शुएह ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बैंक के बेस केस अनुमान के अनुसार, यदि फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करता है, तो इस साल की चौथी तिमाही में सोने की कीमत 4,800 डॉलर प्रति औंस तक रह सकती है. हालांकि, अगर मार्केट आने वाले समय में कई बार ब्याज दर बढ़ने की संभावना को कीमतों में शामिल करता है, तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है और इसकी कीमत 3,800 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकती है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े और फेडरल रिजर्व की नीति को लेकर बदलती उम्मीदें सोने की कीमतों में हालिया गिरावट की सबसे बड़ी वजह हैं. Investing.com के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स मंगलवार को 1.6% गिरकर 4,135 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गए. ग्लोबल लेवल पर पिछले एक महीने में सोने की कीमतों में करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई है. साथ ही एशियाई बाजारों में मांग कमजोर पड़ने के संकेत भी मिले हैं, जिससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर दबाव बढ़ा है। 

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