कोलकाता
पश्चिम बंगाल की सत्ता का 15 साल तक सिरमौर रहीं ममता बनर्जी और उनकी अगुवाई वाली पार्टी तृणमूल कांग्रेस मुश्किल में हैं. एक के बाद एक नेता टीएमसी से किनारा कर रहे हैं. 60 से ज्यादा विधायक बागी हो गए हैं. दिल्ली में लोकसभा सदस्यों ने भी पार्टी में बगावत का बिगुल फूंक दिया है. वहीं, ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका अब कल्याण बनर्जी का ताजा रुख है।
ममता बनर्जी ने जिन कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप बनाने के लिए 40 साल पुरानी सहयोगी काकोली घोष को पद से हटा दिया, अब वही कल्याण बनर्जी भी बगावत का झंडा बुलंद करते दिख रहे हैं. कल्याण बनर्जी ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को यह अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो वह अभिषेक को चुन लें, या फिर मेरे जैसे वफादारों को।
कल्याण बनर्जी ने कहा है कि ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी को हटाएं. नहीं तो हम पार्टी में नहीं रह सकते. उन्होंने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर केस से भी खुद को अलग करने का ऐलान किया और कहा कि अभिषेक बनर्जी ने कभी भी मुझपर भरोसा नहीं किया और आगे भी नहीं करेंगे. कल्याण बनर्जी ने कहा कि हम कल अभिषेक के केस के लिए तैयारी कर रहे थे और आधी रात मुझे बताया गया कि वकील बदल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि यह बहुत ही अपमानजनक है. अभिषेक बनर्जी को वरिष्ठों का सम्मान करना नहीं आता. कल्याण बनर्जी ने अभिषेक को घमंडी व्यक्ति बताया और तल्ख लहजे में कहा कि वह हैं कौन? अभिषेक बनर्जी की वजह से पार्टी को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि मैं ममता बनर्जी के साथ हूं. लेकिन दीदी को अब फैसला करना होगा कि उनको पार्टी और वफादार नेता चाहिए या बच्चा और परिवार।
कल्याण का बागी रुख ताबूत में आखिरी कील?
कल्याण बनर्जी की गिनती ममता बनर्जी के विश्वस्त नेताओं में होती है. पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद कल्याण बनर्जी कई अहम मामलों में कोर्ट के भीतर भी टीएमसी से जुड़े मामलों की पैरवी करते नजर आए हैं. फर्जी हस्ताक्षर से संबंधित जिस केस में अभिषेक बनर्जी भी आरोपी हैं, उस मामले में भी कल्याण बनर्जी ही वकील थे. कल्याण बनर्जी के बागी रुख को टीएमसी के ताबूत में आखिरी कील की तरह देखा जा रहा है।
बिछड़ रहे सब बारी-बारी
ममता बनर्जी और उनकी पार्टी से सांसद-विधायक और नेता बारी-बारी बिछड़ रहे हैं. कल्याण बनर्जी के बागी रुख अख्तियार करने से कुछ घंटे पहले ही ममता बनर्जी को दो बड़े झटके लगे. पहले प्रकाश चिक बराइक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. वहीं, कल तक ममता बनर्जी के साथ खड़े नजर आए प्रसून बनर्जी भी बागी काकोली गुट के साथ हो लिए. काकोली गुट को लोकसभा में अलग गुट के तौर पर मान्यता देने की मांग वाले पत्र पर प्रसून बनर्जी ने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं।