विवेक झा, भोपाल। बदलते कर कानूनों और अनुपालन की नई चुनौतियों के बीच टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल द्वारा शनिवार को मोटल शिराज में एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया। संगोष्ठी में आयकर अधिनियम-2025, प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन और जीएसटी लिटिगेशन जैसे समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास कैलाश सारंग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि लगभग 150 अधिवक्ताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कर सलाहकारों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

कर संग्रहण में पेशेवरों की भूमिका अहम : विश्वास कैलाश सारंग
मुख्य अतिथि विश्वास कैलाश सारंग ने अपने संबोधन में कहा कि देश की कर व्यवस्था को मजबूत बनाने में कर पेशेवरों, अधिवक्ताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और सरल कर प्रणाली विकसित भारत की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने केंद्र सरकार की समावेशी आर्थिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि कर सुधारों का उद्देश्य अनुपालन को आसान बनाना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

आयकर अधिनियम-2025 से कानून होगा अधिक सरल
प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए पंकज शाह ने “प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन एवं आयकर अधिनियम-2025” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए कहा कि नए आयकर कानून का उद्देश्य प्रावधानों को सरल, स्पष्ट और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है। उन्होंने बताया कि छोटे व्यापारियों, स्वतंत्र पेशेवरों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े करदाताओं के लिए प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन व्यवस्था अनुपालन का आसान विकल्प प्रदान करती है, जिससे जटिल लेखांकन और विस्तृत रिकॉर्ड रखने का बोझ कम हो सकता है।

उन्होंने प्रतिभागियों को समय पर आयकर रिटर्न दाखिल करने, डिजिटल भुगतान प्रणाली अपनाने और वित्तीय अभिलेखों को व्यवस्थित रखने की सलाह दी। सीए शाह ने कहा कि नए कानून में कई प्रावधानों को पुनर्गठित कर अधिक तार्किक स्वरूप दिया गया है, जिससे करदाताओं और पेशेवरों दोनों को सुविधा मिलेगी।
प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन से छोटे कारोबारियों को राहत
अपने व्याख्यान में सीए पंकज शाह ने बताया कि प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन योजना का उद्देश्य छोटे और मध्यम करदाताओं के लिए कर अनुपालन को आसान बनाना है। इस व्यवस्था के तहत पात्र व्यवसायी निर्धारित शर्तों के अनुसार अनुमानित आय के आधार पर कर दे सकते हैं, जिससे विस्तृत खातों और ऑडिट की जटिलताओं से राहत मिलती है। उन्होंने कहा कि सही योजना का चयन करदाता के व्यवसाय की प्रकृति और आय के आधार पर किया जाना चाहिए।
जीएसटी नोटिस को हल्के में न लें : सीए आंचल कपूर
जीएसटी कानून और उससे जुड़े विवादों पर आयोजित विशेष सत्र में सीए आंचल कपूर ने “जीएसटी लिटिगेशन : नोटिस से अपीलीय अधिकरण तक” विषय पर व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीएसटी विभाग से प्राप्त किसी भी नोटिस का समयबद्ध और तथ्यों पर आधारित उत्तर देना अत्यंत आवश्यक है।

लापरवाही या देरी अनावश्यक विवादों और दंडात्मक कार्रवाई का कारण बन सकती है।
उन्होंने प्रतिभागियों को शो-कॉज नोटिस, जांच प्रक्रिया, मांग आदेश, अपील और अपीलीय अधिकरण तक की संपूर्ण कानूनी प्रक्रिया सरल भाषा में समझाई।
दस्तावेज और तथ्य ही मजबूत बचाव का आधार
सीए आंचल कपूर ने कहा कि किसी भी जीएसटी विवाद में उचित दस्तावेजी रिकॉर्ड सबसे बड़ा बचाव होता है। उन्होंने वास्तविक मामलों और न्यायिक निर्णयों के उदाहरण देते हुए बताया कि नोटिस का उत्तर विधिक प्रावधानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन और समय पर अपील दायर करना करदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रतिभागियों ने पूछे व्यावहारिक सवाल
संगोष्ठी के दौरान उपस्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, अधिवक्ताओं, उद्योगपतियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने जीएसटी आकलन, शो-कॉज नोटिस, मांग आदेश, अपील प्रक्रिया और अपीलीय अधिकरण से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने सभी जिज्ञासाओं का विस्तार से समाधान प्रस्तुत किया, जिसे प्रतिभागियों ने अत्यंत उपयोगी और व्यवहारिक बताया।

ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों की बढ़ी जरूरत
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने कहा कि बदलते कर कानूनों और बढ़ते कर विवादों के दौर में इस प्रकार की संगोष्ठियां करदाताओं और पेशेवरों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रतिभागियों को प्राप्त जानकारी भविष्य में कर अनुपालन और विवाद प्रबंधन में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेगी।
संस्था के पदाधिकारी और वरिष्ठ सदस्य रहे मौजूद
सेमिनार में टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज पारख, उपाध्यक्ष मयंक अग्रवाल एवं अंकुर अग्रवाल, सचिव धीरज अग्रवाल, सह-सचिव संदीप चौहान, कोषाध्यक्ष दीपेश भंडारी तथा वरिष्ठ सदस्य आर.के. पारख, अमित जैन, संदीप मुखर्जी, गोविंद वसंता, राजेश्वर दयाल, सौरभ श्रीवास्तव, प्रदीप शर्मा, जयंत जोशी सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।
संगोष्ठी से निकले प्रमुख संदेश
- आयकर अधिनियम-2025 का उद्देश्य कर कानूनों को अधिक सरल और व्यवस्थित बनाना है।
- प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन छोटे व्यापारियों और पेशेवरों के लिए अनुपालन का आसान विकल्प हो सकता है।
- समय पर आयकर रिटर्न दाखिल करना और डिजिटल लेन-देन अपनाना महत्वपूर्ण है।
- जीएसटी नोटिसों का तथ्यों और विधिक आधार पर समयबद्ध उत्तर देना आवश्यक है।
- मजबूत दस्तावेजी रिकॉर्ड और सही अपील प्रक्रिया विवादों से बचाव में सहायक होती है।
- बदलते कर कानूनों को समझने के लिए नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम समय की जरूरत हैं।