सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन बनाने की जरूरत, हर नागरिक बने डिजिटली जागरूक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सायबर खतरा एक ऐसा अदृश्य दुश्मन है , जो बिना दस्तक दिए हमारे घरों तक पहुंच रहा है। सायबर खतरों को समझना ही उनसे बचने का सबसे बड़ा रास्ता है। सावधानी ही सुरक्षा है और जानकारी ही बचाव है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, डीप-फेक, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी धोखाधड़ी, ऑनलाइन शॉपिंग ठगी, रैनसमवेयर हमले और फर्जी निवेश लिंक जैसे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की जनता को सायबर सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण सूत्र ‘जागरूकता, सावधानी और सहभागिता’ के बारे में बताकर कहा कि जो लोग सायबर सुरक्षा की जानकारी रखते हैं, वे दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित ‘राज्य व्यापी सायबर जागरूकता अभियान’ के तहत “सेफ क्लिक 2.0” के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह अभियान 24 जून से शुरू होकर 8 जुलाई तक प्रदेश के 10 संभाग, 55 जिलों और 50 हजार से अधिक गांव में एक साथ चलेगा। इस अभियान के तहत सायबर ठगी और अन्य अपराधों से बचने के लिए जागरूक किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने सायबर जागरूकता अभियान के पोस्टर, स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई सायबर जागरूकता बुकलेट्स तथा अभियान के ऑफिशियल वीडियो का विमोचन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर जागरूकता रथ को झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। समापन पर प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के संचालन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि संकट के समय मध्यप्रदेश पुलिस हमेशा संकटमोचक हनुमान की भूमिका में रहती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रदेश में विभिन्न सायबर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से 33 लाख से अधिक नागरिकों को जागरूक किया गया। अब अभियान का विस्तार पंचायतों, स्कूलों, बैंकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों तक किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार के 56 विभागों की लगभग 1700 सेवाएं एकीकृत पोर्टल पर उपलब्ध हैं और इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से सायबर सुरक्षा को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में सायबर खतरे अदृश्य रूप में हमारे जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन और कंप्यूटर के माध्यम से होने वाले सायबर अपराधों से बचाव के लिए सावधानी और जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अपराधों के प्रति प्रदेशवासियों को जागरुक करने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस का “सेफ क्लिक 2.0” सायबर जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अभियान से प्रदेश के सभी नागरिक जागरूक होंगे। उन्होंने कहा कि सायबर अपराधी एक प्रकार से डिजिटल दौर के राक्षस हैं, जो दबे पाँव लैपटॉप, कम्प्यूटर और मोबाइल के जरिए हमारे साथ सेंधमारी और डकैती करते हैं। आजकल डिजिटल अरेस्ट, डीप फेक, डेटा ब्रीजिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, रेनसमवेयर अटैक जैसे अनेक प्रकार के सायबर अपराध संचालित हैं। लेकिन सायबर अपराधों के मामले में सावधानी ही बचाव है। मध्यप्रदेश पुलिस ने देश में पहली बार सायबर डकैती का लाइव पर्दाफाश किया था। इसके लिए मध्यप्रदेश पुलिस बधाई की पात्र है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष अपने सायबर जागरुकता अभियान के माध्यम से लगभग 33 लाख से अधिक नागरिकों को सतर्क किया था। इस वर्ष 15 दिन तक चलने वाले “सेफ क्लिक 2.0” अभियान में हर दिन अलग थीम रखी गई है। इस दौरान लोगों को बैंकिंग, महिला सुरक्षा, ग्रामीण इलाकों में जागरुकता के बारे में बताया। यह अभियान बैंकों, बाजारों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थलों पर संचालित किया जाएगा। इसके लिए लोकरंजन के रुचिकर कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। सायबर सुरक्षा को जागरूकता, सावधानी और सहभागिता के माध्यम से प्रभावी बनाया जाएगा। सायबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के बारे में लोगों को बताया जा रहा है। यह नंबर सायबर अपराध के मामले में सबसे पहले पीड़ितों की ढ़ाल बनता है।

लालच और जल्दबाजी कर सकती है आर्थिक नुकसान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि अगर आपको कोई अनजान लिंक मिले या डराने धमकाने की कॉल आए तो “रुको, सोचो और फिर एक्शन लो”। लालच और जल्दबाजी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। पुलिस के अभियान को जन जागरुकता अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में हम सभी सहभागी बनें। राज्य सरकार ने सायबर अपराध के विरुद्ध मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया है। नागरिकों के डेटा संरक्षण के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा एक्ट को भारत सरकार ने लागू किया है। प्रदेश में कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का गठन किया गया है। राज्य शासन के 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाओं को एक पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। यह एक प्रशंसनीय पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि “सेफ क्लिक 2.0” अभियान में बैकों, बाजारों, धार्मिक स्थलों सबको जोड़ा गया है। अभियान को शुरू करने का यही सही समय है, क्योंकि हमारी युवा पीढ़ी उच्च शिक्षा के लिए महाविद्यालयों में प्रवेश ले रही है।

जागरुकता ही सायबर क्राइम से बचने का है सुरक्षा कवच : डीजीपी मकवाना

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून से 8 जुलाई तक सेफ क्लिक 2.0 सायबर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज सायबर अपराध केवल एक आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह समाजिक विश्वास और राष्ट्रीय सुरक्षा के भी जुड़ा गंभीर विषय है। पिछले कुछ वर्षों में सायबर अपराधों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और करीब 80 प्रतिशत शिकायतें वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित होती हैं। डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल, फर्जी सिमकार्ड, म्यूल बैंक अकाउंट, महिला एवं बच्चों के जुड़े अपराधों की संख्या भी बढ़ी है। मध्यप्रदेश पुलिस सायबर अपराध पर काबू पाने की कोशिश कर रही है। हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है- रोकथाम, अनुसंधान और जागरुकता। इसी दिशा में 25 दिसंबर 2025 से प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर की शुरुआत की गई है। वर्तमान में 1 लाख रुपए तक की सायबर धोखाधड़ी की ई-जीरो एफआईआर दर्ज कर पीड़ितों को न्याय दिलाया जा रहा है। इसके साथ ही  हेल्पलाइन नम्बर 1930 से पीड़ितों को त्वरित सहायता भी उपलब्ध हो रही है। सायबर धोखाधड़ी से संबंधित राशि को बैंक खाते में रोकने और अकाउंट होल्डर को दिलवाने में प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में कुल 135 करोड़ राशि होल्ड कराई गई। पीड़ितों को भी राशि दिलवाई गई। पुलिस सायबर अपराध से जुड़े सिस्टम को चि‍न्हित कर ठोस कार्रवाई कर रही है। म्यूल अकाउंट्स और सायबर स्लेवरी से जुड़े लोगों की पहचान भी की जा रही है।

सायबर अपराध रोकने चलाये जा रहे हैं विशेष अभियान

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा विशेष अभियान “ऑपरेशन फास्ट”, “ऑपरेशन फेस्ट”, “ऑपरेशन मैट्रिक्स”, “ऑपरेशन नयन” संचालित किए गए। मध्यप्रदेश पुलिस को डीएससीआई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

जन जागरूकता सबसे बड़ी शक्ति सायबर अपराध रोकथाम के लिये

सायबर अपराधों की रोकथाम और जन जागरुकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। मप्र पुलिस ने करोड़ों लोगों को अपने जागरुकता अभियान से जोड़ा है। पहला “सेफ क्लिक” अभियान जन जागरुकता का विषय बना था। इससे डिजिटल अरेस्ट पर बहुत हद तक रोक भी लगी थी। उन्होंने कहा कि “सेफ क्लिक 2.0” अभियान से इन प्रयासों को और ज्यादा गति मिलेगी, इस अभियान का मूल मंत्र है। सावधानी ही बचाव है। पुलिस गांव-गांव तक लोगों को “सेफ क्लिक” के लिए जागरुक करेगी। जनता को बैंकिंग सुरक्षा, महिला सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर जागरूक करेंगे। इसमें सायबर हेल्पलाइन 1930 का व्यापक प्रचार प्रसार भी शामिल है।

कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सायबर सुरक्षा) ए. साईं मनोहर ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले 2 सप्ताह में मध्यप्रदेश पुलिस इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए काम करेगी।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे सहित सोशल मीडिया इन्फलूएंसर्स भी उपस्थित थे। 

घनश्याम सिरसाम 

ईरान के राष्ट्रपति ने PM मोदी को खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने का न्योता दिया

नई दिल्ली
 ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेदेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। सूत्रों के अनुसार, अंतिम संस्कार समारोह 5 जुलाई से 9 जुलाई कर आयोजित किए जाएंगे।

हालांकि, पीएम मोदी को मिले निमंत्रण के बारे में भारत की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है।

28 फरवरी को हुई थी खामेनेई की मौत
तीन दशकों तक ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुई थी, जो तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के बड़े हवाई हमलों का पहला दिन था।

राजनयिक सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति पेजेशकियान ने भारतीय प्रधानमंत्री को अंतिम संस्कार समारोह के लिए आमंत्रित किया है। अंतिम संस्कार तेहरान और कोम में 5,6 और 7 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद शहर में होगा।

 

उद्धव ठाकरे के सामने नया संकट, सांसदों के बाद अब दफ्तर पर भी मंडराया खतरा

मुंबई 
लोकसभा सांसदों की बगावत के झटके से उबर रही शिवसेना (यूबीटी) की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं. पार्टी को अब संसद में एक और बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. पार्टी के 6 सांसदों के शिवसेना (शिंदे) में विलय के बाद न सिर्फ उसकी संसदीय ताकत घटेगी, बल्कि संसद भवन परिसर में मिले उसके दफ्तर पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। 

सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल में सिर्फ चार सांसद ही बाकी रह जाएंगे।  

संसद के नियम के तहत आमतौर पर पांच या उससे ज्यादा सांसदों वाले दलों को ही संसद भवन परिसर में अलग दफ्तर आवंटित किया जाता है. ऐसे में पार्टी को अपने वर्तमान कार्यालय से हाथ धोना पड़ सकता है। 

संसदीय गतिविधियों में पार्टी की भागीदारी पर पड़ सकता है असर
सांसदों की संख्या घटने का असर राजनीतिक और संसदीय गतिविधियों में पार्टी की भागीदारी पर भी पड़ सकता है. अहम राष्ट्रीय और संसदीय मुद्दों पर केंद्र सरकार की ओर से बुलाई जाने वाली सर्वदलीय बैठकों में आमतौर पर पांच से कम सांसदों वाले दलों को आमंत्रित नहीं किया जाता है. ऐसे में भविष्य में शिवसेना (यूबीटी) की इन बैठकों में मौजूदगी पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। 
फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल का दफ्तर संविधान सदन (पुराना संसद भवन) के कमरा नंबर 128A में स्थित है. ये दफ्तर अविभाजित शिवसेना को आवंटित कमरे नंबर 128 के ठीक बगल में है. सांसदों की संख्या में संभावित कमी के बाद इस कार्यालय के आवंटन की स्थिति पर भी नजरें टिकी हुई हैं। 

महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा
पिछले कई दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ खूब चर्चा में हैं. इस दलबदल को एकनाथ शिंदे का ‘ऑपरेशन टाइगर’ कहा जा रहा है. शिवसेना पर आए इस संकट को राज्यसभा सांसद संजय राउत सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. संजय राउत दिल्ली में हैं. वहीं पार्टी के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई भी दिल्ली में ही ठहरे हुए हैं.  बताया जा रहा है कि संजय राउत दलबदल को रोकने के लिए किताबों और संसदीय प्रक्रिया का अध्यन करने में लगे हैं। 

संजय राउत और अनिल देसाई ने दिल्ली के प्रमुख वकीलों के साथ इस बात पर बातचीत की कि अगर छह सांसद बेहतर अवसरों की तलाश में अगर पार्टी बदल लेते हैं तो उसमें क्या कानूनी उपाय किए जाने चाहिए. इसको लेकर अनिल परब ने बताया कि अगर सुप्रीम कोर्ट यूबीटी और शिंदे गुट के धनुष-बाण चिन्ह वाले फैसले पर सुनवाई की होती तो हमारा पक्ष मजबूत होता। 

शिवसेना संकट पर क्या बोले एक्सपर्ट्स?
इस बीच एक्सपर्ट्स का कहना है कि ठाकरे के लिए इस संकट से निपटना चुनौती भरा हो सकता है, जिसे देश की राजनीति के तेजी से बदलते स्वरूप के रूप में देखा जाना चाहिए. लेखक और शिवसेना के इतिहासकार प्रकाश अकोलकर यह सब पैसे का खेल है. कोई भी पार्टी बीजेपी के पैस और संसाधनों का सामना नहीं कर सकती. सांसद से लेकर विधायक तक बिकने को तैयार हैं. बीजेपी जो ऐसा कर रही है यह बेहद शर्मनाक है। 

उन्होंने कहा कि 20 से 25 साल के युवाओं की सिर्फ यही राय है कि उद्धव ठाकरे को बीजेपी का डटकर सामना करना चाहिए. एक कार्यकर्ता ने कहा कि अब समय आ गया है कोई बीजेपी के सामने खड़ा हो और देश में विपक्षी पार्टियों को खत्म करने की नापाक साजिश को पर्दाफाश करे। 

वहीं दूसरी तरफ कई शिवसैनिक ‘ऑपरेशन टाइगर के विरोध के लिए सड़कों पर उतरने के लिए भी तैयार हैं.’ बता दें कि पार्टी बदलने वाले 6 सांसदों में संजय दीना पाटिल ने पहले कहा था कि उनकी गठबंधन में जाने की मर्जी नहीं है। 

रायगढ़ इस्पात संयंत्र में फर्नेस ब्लास्ट, 4 मजदूर घायल; मौके पर मची अफरा-तफरी

रायगढ़.

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से बड़ी खबर सामने आई है। पूंजी पथरा स्थित रायगढ़ इस्पात संयंत्र में फर्नेस ब्लास्ट हुआ है, जिसकी चपेट में आने से करीब 4 मजदूर घायल हो गए हैं। सभी घायलों को तत्काल अपेक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

जानकारी के अनुसार, फर्निश में अधिक नमी (मॉइश्चर) जमा हो जाने के कारण ब्लास्ट होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक सभी घायलों की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। घायलों में अमरेश कुमार, फिरोज आलम खान और रामनाथ सूर्यवंशी (जांजगीर-चांपा) शामिल हैं, जबकि एक अन्य घायल की पहचान अभी नहीं हो सकी है। सभी घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है, हालांकि इनमें से दो घायलों को बेहतर उपचार के लिए रेफर करने की तैयारी है।

ब्लास्ट होने की बात से इस्पात के जीएम ने किया इनकार
रायगढ़ इस्पात के जीएम सुनील पांडा ने कहा कि बरसात के समय में फर्नेस में रॉ मैटेरियल के कारण नमी (मॉइश्चर) आ जाता है। नमी आने की वजह से जब फर्नेस हिट होता है तो कभी-कभी उसमें गैस का फॉर्मेशन हो जाता है। गैस ऊपर निकलने के कारण धुआं काफी फैल गया और आसपास मौजूद मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान ऊपर कार्य कर रहे कुछ मजदूरों ने घबराहट में इधर-उधर छलांग लगा दी, जिसकी वजह से उन्हें चोटें आई हैं।

उन्होंने ब्लास्ट होने की बात से इनकार किया है और कहा कि यह घटना अफरा-तफरी के कारण हुई है। इस घटना में करीब चार लोग घायल हुए हैं। घटना के बाद उद्योग प्रबंधन के अधिकारी अपेक्स अस्पताल में मौजूद हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं मौके पर औद्योगिक स्वास्थ्य विभाग की टीम और पुलिस भी पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है।

कोदो-कुटकी की खेती अपनाएं, पोषण और समृद्धि दोनों पाएं

विशेष लेख

कोदो-कुटकी की खेती अपनाएं, पोषण और समृद्धि दोनों पाएं

पारंपरिक धरोहर से आधुनिक पहचान तक

रायपुर 

छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि परंपरा में कोदो और कुटकी का विशेष महत्व रहा है। सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के भोजन का अभिन्न हिस्सा रहे ये लघु धान्य आज एक बार फिर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। बदलती जलवायु परिस्थितियों, पोषण संबंधी चुनौतियों और बेहतर कृषि की आवश्यकता के बीच कोदो-कुटकी जैसी मिलेट फसलें भविष्य की खेती का मजबूत आधार बनकर उभर रही हैं।

कोदो (पास्पलम स्क्रोबिकुलेटम) और कुटकी (पैनिकम सुमाट्रेंस) ऐसी फसलें हैं जिन्हें कम पानी, कम लागत और सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यही कारण है कि ये छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बन रही हैं। कम उपजाऊ, पथरीली और ढालू भूमि में भी इनकी खेती संभव है, जहां अन्य फसलें अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पातीं।

आज जब दुनिया स्वास्थ्यवर्धक भोजन की ओर लौट रही है, तब कोदो और कुटकी का महत्व और बढ़ गया है। कोदो में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि कुटकी फाइबर, प्रोटीन, फास्फोरस तथा अन्य खनिज तत्वों से भरपूर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इनका नियमित सेवन मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और एनीमिया जैसी समस्याओं के नियंत्रण में सहायक हो सकता है। यही वजह है कि आज इन्हें ‘सुपर फूड’ के रूप में पहचान मिल रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार भी मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2026 में कोदो का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तथा कुटकी का 3,350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ इन फसलों की खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। विभागीय जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश में कोदो फसल 39.02 हेक्टेयर और कुटकी फसल 38.03 हेक्टेयर रकबे में लगाए गए थे। वैसे विगत खरीफ वर्ष में प्रति हेक्टेयर कोदो की उत्पादन 550 किलोग्राम तथा कुटकी की उत्पादन 675 किलोग्राम दर्ज की गई है। यानी कोदो की उत्पादन 21.46 टन थी, वहीं 25.67 टन कुटकी का उत्पादन हुआ था।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों का उत्पादन बढ़ाने की अपील की है।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्नत तकनीकों को अपनाकर कोदो-कुटकी की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। मानसून की शुरुआत के साथ जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक बुवाई, बीजोपचार, कतार पद्धति, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण जैसे उपाय किसानों को बेहतर उत्पादन दिला सकते हैं।

बढ़ती बाजार मांग, मिलेट आधारित उत्पादों का विस्तार और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं इन फसलों के व्यावसायिक महत्व को लगातार बढ़ा रही हैं। एक समय केवल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक सीमित रहने वाली कोदो-कुटकी आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रही हैं।

पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए कोदो और कुटकी अत्यंत महत्वपूर्ण फसलें हैं। आवश्यकता इस बात की है कि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ इन पारंपरिक फसलों का उत्पादन बढ़ाएं और उपभोक्ता इन्हें अपने दैनिक भोजन का हिस्सा बनाएं। कोदो-कुटकी केवल अनाज नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज, उत्तम कृषि और समृद्ध भविष्य की आधारशिला हैं।

(एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

बस्तर के 30 मेधावी छात्र सीखेंगे सेमीकंडक्टर तकनीक, IIT मद्रास में मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

जगदलपुर.

बस्तर संभाग के युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में एक नई उम्मीद की किरण जगी है। पहली बार बस्तर के 30 मेधावी छात्रों को देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास में सेमीकंडक्टर चिप मैन्युफैक्चरिंग की विशेष ट्रेनिंग लेने का अवसर मिलेगा।

यह पहल न केवल छात्रों को अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराएगी, बल्कि उन्हें भविष्य के हाई-टेक रोजगार बाजार के लिए भी तैयार करेगी। जानकारी के अनुसार, IIT मद्रास में 12 जुलाई से 24 जुलाई तक आयोजित होने वाले विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए बस्तर विश्वविद्यालय के छात्रों का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इंटरनल टेस्ट की मेरिट सूची के आधार पर पूरी होगी। इसमें चयनित 30 छात्र पहली बार हवाई यात्रा कर चेन्नई पहुंचेंगे और देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में से एक IIT मद्रास में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन भी उत्साहित है। चयनित छात्रों को राज्यपाल की मौजूदगी में रवाना किया जाएगा। खास बात यह है कि छात्रों की हवाई यात्रा का पूरा खर्च दंतेवाड़ा जिला प्रशासन वहन करेगा, जबकि इस पहल को सफल बनाने में बस्तर कलेक्टर का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

बस्तर विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को सेमीकंडक्टर चिप निर्माण, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, एडवांस डेटा ट्रांसफर सिस्टम और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह प्रशिक्षण छात्रों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल विकसित करने में मदद करेगा। प्रशिक्षण का एक बड़ा लाभ रोजगार के अवसरों के रूप में भी सामने आ सकता है। रायपुर में स्थापित हो रही गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित 5G और 6G डेटा ट्रांसफर टेक्नोलॉजी कंपनी में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं बनने की उम्मीद है। ऐसे में यह कार्यक्रम बस्तर के छात्रों को सीधे उभरती हुई सेमीकंडक्टर और दूरसंचार उद्योग से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बस्तर के लिए यह पहल एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल क्षेत्र के युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों और उद्योगों तक उनकी पहुंच भी मजबूत होगी। बस्तर विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन की यह संयुक्त पहल क्षेत्र के प्रतिभाशाली युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।

गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल

गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड किए जाए निर्धारित : राज्यपाल पटेल

 राज्यपाल ने सिकल सेल उन्मूलन अभियान की प्रगति पर हर्ष व्यक्त किया
लोक भवन में जनजातीय कार्य विभाग समीक्षा बैठक हुई

भोपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि योजनाओं की मंशा और क्रियान्वयन की व्यवहारिकता में संवेदनशीलता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन मुख्यतः तकनीकी विषय है, इसलिए हितग्राहियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। निर्माण सामग्री एवं कार्य की गुणवत्ता की निगरानी के मानक मापदंड निर्धारित किए जाए। अधिकारियों द्वारा निगरानी मापदंड के अनुसार नियमित गुणवत्ता परीक्षण करना चाहिए।

      राज्यपाल पटेल लोक भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल को बैठक में पीएम-जनमन योजना अंतर्गत 9 विभागों की 11 अधोसंरचनात्मक, 7 हितग्राही मूलक योजनाओं और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत 17 विभागों की 25 योजनाओं  की प्रगति की जानकारी दी गई।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता की पहल पीएम-जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजनाएं है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के लिए निर्धारित समय सीमा तक कार्य की रीति-नीति उचित नहीं है। रणनीति, समय सीमा से पहले कार्य पूरा करने की होनी चाहिए। नए कार्यों के क्रियान्वयन में पूर्व अनुभवों और चुनौतियों को दृष्टिगत रखते हुए कार्य योजना तैयार की जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अति पिछड़ी जनजातियों के विकास और उत्थान के प्रयासों को आवश्यकता और बहुलता की प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन की औपचारिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए।

राज्यपाल पटेल ने प्रदेश में सिकल सेल उन्मूलन अभियान के तीव्र गति से क्रियान्वयन पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 से पूर्व वर्ष 2026 तक लक्ष्य का पूरा होना अनुमानित है। उन्होंने सभी संबंधितों को इसके लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष की आयु तक के सिकल सेल रोगी वाहक के स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे उनका भावी जीवन सुरक्षित हो जाएगा। जरूरी है कि सिकल सेल की दवाओं की उपलब्धता सदैव सुनिश्चित रहे। एलोपैथिक उपचार पद्धति के साथ ही आयुर्वेद औषधियों के उपयोग के संबंध में जन जागरण के प्रयासों की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की दवाओं के उपयोग से रक्त की उपलब्धता बढ़ने और थकान में कमी के उत्साह जनक प्रारंभिक परिणाम प्राप्त हुए है। राज्यपाल ने बैठक में जनजातीय बहुल क्षेत्रों की तहसीलवार बुनियादी सुविधाओं का मानचित्र तैयार कर प्रभावी निगरानी, जन औषधि केन्द्रों के संचालन में जनजातीय युवाओं की भागीदारी तथा विद्यालयों में छात्राओं, छात्र के पृथक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल दिया।

समीक्षा बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, जनजातीय प्रकोष्ठ की सदस्य सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, प्रकोष्ठ के सदस्य, लोक भवन और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

 

जो एक बार मध्यप्रदेश आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जो एक बार मध्यप्रदेश आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण बनाने के लिए लागू की हैं पारदर्शी और उद्योग मित्र नीतियां
मध्यप्रदेश देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में है शामिल
विकसित भारत @2047 में 2 ट्रिलियन डॉलर का होगा मध्यप्रदेश का योगदान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर किया उनका स्मरण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विकसित मध्यप्रदेश पर आयोजित कॉन्क्लेव को किया संबोधित

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समय तभी बदलता है, जब संकल्प बड़ा होता है। सभी भारतीयों के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का समय बदला है। विश्व के कई देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से प्रधानमंत्री मोदी को विभूषित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने विकसित भारत @2047 और अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर पहुंचाने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार का यह प्रयास होगा कि इसमें से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर का योगदान मध्यप्रदेश का हो। मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री मोदी के सेवा, सुशासन और जन कल्याण के संकल्पों को पूर्ण करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। वर्तमान में मध्यप्रदेश की गिनती देश के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्यों में हो रही है। हम विरासत भी और विकास भी के पथ पर लगातार अग्रसर हो रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। उन्होंने रानी दुर्गावती का स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेशवासी रानी दुर्गावती के बलिदान को सदैव याद रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव “विकसित मध्यप्रदेश” विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल में आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ  किया। कॉन्क्लेव में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सूक्ष्म लघु एवं उद्योग मंत्री चैतन्य काश्यप, मुख्य सचिव अनुराग जैन विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में शामिल उद्योगपतियों से राज्य में मौजूद निवेश संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की विशेषता है कि एक बार जो मध्यप्रदेश आता है, यहीं का होकर रह जाता है। कार्यक्रम में उद्योग व्यापार जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि तथा नीति निर्माता शामिल हुए।

 प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार बढ़ रहा है आगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पिछले तीन साल से विकास का कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में नए उद्योग स्थापित करने के लिए पर्याप्त लैंड बैंक है। राज्य सरकार ने उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने लिए पारदर्शी और उद्योग मित्र नीतियां लागू की हैं। मध्यप्रदेश की इन्हीं विशेषताओं के कारण निवेशक उद्योग लगाने के लिए राज्य में आ रहे हैं। देश के मध्य में स्थित होने के कारण उन्हें  कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स का विशेष लाभ भी मिलेगा। प्रदेश सरकार ने चारों दिशाओं में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए अधोसंरचना विकास पर विशेष बल दिया है।

राज्य सरकार 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को ला चुकी है धरातल पर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 का आयोजन किया गया, जिसमें अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ और एमओयू साइन हुए। यह प्रसन्नता का विषय है कि 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को राज्य सरकार धरातल पर ला चुकी है। मध्यप्रदेश की छवि कृषि प्रधान राज्य के साथ उद्योग मित्र राज्य की भी बनी है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025 को उद्योग और रोजगार को समर्पित किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय युवा प्रतिभाओं ने दुनिया की बड़ी से बड़ी कंपनियों में शीर्ष पदों पर पहुंचकर भारत का मान बढ़ाया है। स्पेस टेक्नोलॉजी में भारतीय वैज्ञानिकों ने नए कीर्तिमान गढ़े हैं। राज्य सरकार ने भी अपनी स्पेस-टेक पॉलिसी लॉन्च की है। मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं। 

‘परमाणु ठिकानों का निरीक्षण होकर रहेगा’, IAEA की ईरान को दो टूक

 टोक्यो

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने बुधवार को संकेत दिया कि ईरान के न्यूक्लियर एनरिचमेंट साइट्स का निरीक्षण उनकी टीम द्वारा किया जाएगा. यह अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए अंतरिम समझौते का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. IAEA प्रमुख का यह इस मामले में अब तक का सबसे स्पष्ट बयान है. संयुक्त राष्ट्र की यह परमाणु निगरानी एजेंसी ईरान के परमाणु भंडार की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 

इजरायल ने ईरान के साथ 2025 में 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान उनके परमाणु स्थलों को निशाना बनाया था. अमेरिका ने भी B-2 बमवर्षक विमानों से ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फहान न्यूक्लियर फैसेलिटी पर हमले किए थे. इन हमलों के बाद से ईरान ने IAEA को उन परमाणु सुविधाओं तक पहुंचने से रोक रखा है. इन परमाणु सुविधाओं में ईरान के पास इतना उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम होने का अनुमान है कि यदि वह चाहे तो लगभग 10 परमाणु बम बना सकता है। 

ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है. हालांकि, वह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास बिना किसी घोषित वेपन प्रोग्राम के 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है. इन परमाणु स्थलों का IAEA की टीम द्वारा निरीक्षण करने के मामले में अमेरिका और ईरान ने 23 जून को विरोधाभासी बयान दिए थे. अमेरिका ने दावा किया था कि ईरान ने अपने परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने की अनुमति दे दी है. वहीं, ईरान ने इस तरह की कोई अनुमति देने से इनकार किया था। 

ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण होकर रहेगा: IAEA
जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में IAEA प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने पत्रकारों से कहा, ‘मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, वे वास्तविकता का हिस्सा हैं. लेकिन मैं आपको यह याद दिलाना चाहता हूं कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. उस समझौते में स्पष्ट रूप से लिखा है कि परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी IAEA द्वारा की जाएगी. जाहिर है, ऐसा करने के लिए हमें निरीक्षण करना होगा. यह निरीक्षण परसों हो, एक हफ्ते बाद हो या 10 दिन बाद, यह महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि यह होगा। 

ये निरीक्षण इसलिए बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि समझौते के तहत ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम संवर्धित स्तर तक लाने यानी ‘डाउनब्लेंड’ करने की बात कही गई है. ईरान की ओर से ग्रॉसी के इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मंगलवार को तेहरान में पत्रकारों से कहा था कि पिछले साल अमेरिका द्वारा बमबारी किए गए परमाणु स्थलों का निरीक्षण करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों के आने की कोई योजना नहीं है। 

उन्होंने यह बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणी को खारिज करते हुए दिया था. पिछले साल के 12 दिन तक चले युद्ध के बाद से IAEA को ईरान के कुछ अन्य परमाणु स्थलों, जैसे बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, का दौरा करने की अनुमति दी गई है. लेकिन संवर्धन स्थलों तक पहुंच न होने के कारण एजेंसी यह सत्यापित नहीं कर पा रही है कि ईरान के यूरेनियम भंडार की वास्तविक स्थिति क्या है और यूरेनियम संवर्धन में इस्तेमाल होने वाली सेंट्रीफ्यूज मशीनों की स्थिति कैसी है. ईरान और IAEA दोनों का कहना है कि तेहरान फिलहाल यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है. हालांकि, परमाणु विशेषज्ञों को आशंका है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किसी गुप्त स्थान पर स्थानांतरित कर सकता है। 

बंगाल में आवास योजना पर ‘कट मनी’ के आरोप, दबाव बढ़ने पर TMC नेताओं ने लौटाए पैसे

 कूचबिहार

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में सीतलकुची ब्लॉक की भैरथाना ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 194 के तहत आने वाले छोटे बांगदाकी गांव में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. यह विवाद ‘आवास योजना’ के तहत घर बनाने की सुविधा दिलाने के बदले ग्रामीणों से ‘कट मनी’ यानी गैर-कानूनी कमीशन या रिश्वत वसूलने के गंभीर आरोपों के बाद शुरू हुआ। 

स्थानीय लोगों का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के तीन स्थानीय नेताओं- मनोज अधिकारी, उत्तम बर्मन और क्षितीश देब शर्मा ने सरकारी आवास योजना का फायदा दिलाने का वादा करके ग्रामीणों से पैसे लिए थे। 

खबरों के मुताबिक, जनता के भारी दबाव और बढ़ते गुस्से की वजह से इन तीनों नेताओं ने हाल ही में कई स्थानीय निवासियों को करीब 90,000 रुपए वापस किए। 

आरोपों पर क्या बोले TMC नेता?
पैसे वापस करने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में इस पर बहस छिड़ गई. स्थानीय लोगों का दावा है कि नेताओं के द्वारा हर लाभार्थी से रिश्वत के तौर पर 8,000 से 10,000 रुपए तक वसूले जाते थे। 

आरोपों के बारे में पूछे जाने पर टीएमसी नेता मनोज अधिकारी ने कहा, “पार्टी के निर्देशों के मुताबिक कुछ फंड इकट्ठा किए गए थे. हालांकि, निवासी अब अपने पैसे वापस मांग रहे हैं, इसलिए हम उन्हें पैसे लौटा रहे हैं। 

TMC के ही एक अन्य नेता उत्तम बर्मन ने भी इसी बात को दोहराया. वहीं, TMC नेता क्षितीश देब शर्मा के बेटे अक्षय देब शर्मा ने बताया कि उस खास दिन कई निवासियों को कुल 13,000 रुपए वापस किए गए थे। 

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