8वें वेतन आयोग में हो सकता है बड़ा बदलाव, महंगाई को लेकर उठी नई मांग

नई दिल्ली

ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज़ फेडरेशन (AIDEF) ने आठवें वेतन आयोग से महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्मूले में बदलाव की मांग की है. उनका कहना है कि मौजूदा फॉर्मूला कर्मचारियों और पेंशनर्स पर महंगाई के बोझ का सही कैलकुलेशन नहीं करता है। 

महंगाई के अनुसार ज्‍यादा खर्च 
अभी महंगाई भत्ता (DA) और पेंशन भत्ता (DR) में संशोधन अखिल भारतीय औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के 12 महीने के एवरेज पर बेस्‍ड है. यह इंडेक्‍स कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती कीमतों के लिए नुकसान की भरपाई करने और महंगाई के खिलाफ उनकी खरीदने की क्षमता की रक्षा के लिए है। 

मौजूदा फॉर्मूले में बड़ी खामियां            
हालांकि, आठवें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने दूसरे डिमांड में AIDEF ने कहा कि मौजूदा फॉर्मूले में महत्वपूर्ण कमियां हैं और यह कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों के बदलते खर्च करने के तरीकों को पर्याप्त रूप से नहीं दिखा सकता है। 
 
देखें ये आंकड़े       
फेडरेशन के अनुसार, 2022-23 में पेश किए गए संशोधित कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स में फूड आइटम्‍स और मौसमी एग्री प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी को पर्याप्‍त तौर पर नहीं बताता है. एआईडीईएफ ने बताया कि खाद्य और पेय पदार्थों का भार अब सूचकांक में 36.75% है, जबकि आवास, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, संचार और डिजिटल सेवाओं जैसी कैटेगरी को ज्‍यादा वेटेज दिया गया है। 
 
पेंशनर्स के लिए चुनौती
AIDEF ने पेंशनभोगियों के चुनौतियों का भी जिक्र किया, जिनमें से कई अपनी मंथली इनकम का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, दवाओं, चिकित्सा उपचार और देखभाल सेवाओं पर खर्च करते हैं. अगर इन आवश्यक वस्तुओं की कीमतें महंगाई से ज्‍यादा बढ़ती हैं, तो महंगाई राहत में बदलाव उतना नहीं होता है। 

मौजूदा फॉर्मूले की जांच की मांग
इन चिंताओं को देखते हुए, AIDEF ने मौजूदा महंगाई फॉर्मूले की जांच करने और सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के खर्च को मैनेज करने के लिए बदलने के लिए कहा है। 

हर राज्‍य में आयोग की हो रही बैठक
गौरतलब है कि आठवें वेतन आयोग की बैठक कई राज्‍यों में पूरी हो चुकी है, जिसमें सैलरी बढ़ोतरी, महंगाई भत्ते में इजाफा और फिटमेंट फैक्‍टर समेत कई मांग रखी गई है. 

डिटर्जेंट गोदाम की आड़ में बन रहा था गुटखा, किराएदार की तलाश में जुटी पुलिस

दुर्ग.

दुर्ग जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में गुटखा और उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जप्त की है। पूरा मामला जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र के कचांदुर गांव का है, जहां डिटर्जेंट पाउडर बनाने के नाम पर एक गोदाम किराए पर लेकर अवैध रूप से जर्दा युक्त गुटखा तैयार और पैकेजिंग का काम किया जा रहा था।

दरअसल सुपेला का रहने वाला मोहम्मद मुस्तफा के गोदाम को उत्तर प्रदेश उन्नाव के रहने वाले मोहम्मद शान ने करीब 20 दिन पहले किराए पर लिया था। गोदाम लेने के दौरान उसने डिटर्जेंट पाउडर निर्माण का काम करने की जानकारी दी थी, लेकिन कई दिनों तक उसका गोदाम मालिक से कोई संपर्क नहीं हुआ। किराएदार का मोबाइल फोन लगातार बंद रहने से गोदाम मालिक को संदेह हुआ, जिस पर उसने जेवरा सिरसा चौकी पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और गोदाम की जांच की तो जांच के दौरान वहां से 32 बड़े बोरों में तैयार गुटखा, 32 बोरों में मीठी सुपारी, गुटखा बनाने में उपयोग होने वाला रॉ मटेरियल, और पैकिंग, मिक्सिंग मशीन बरामद की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने फूड सेफ्टी विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गोदाम में अवैध गुटखा की पैकेजिंग और निर्माण का कार्य किया जा रहा था। फिलहाल बरामद सामग्री को फूड सेफ्टी अधिकारियों को सौंपी गयी है, और मामले में संबंधित व्यक्तियों की तलाश के साथ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

एक हफ्ते में घोषित होंगे बचे हुए एल्डरमैन, 244 नगरीय निकायों में होंगे मनोनीत पार्षद

भोपाल/ इंदौर 

एमपी में हफ्ते भर में नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति हो सकती है। सीएम डॉ. मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच मंथन पूरा हो चुका है। संभवत: इसी हफ्ते में बचे हुए निकायों में एल्डरमैन घोषित करने की तैयारी है। प्रदेश के करीब 244 नगरीय निकायों में मनोनीत पार्षदों यानी एल्डरमैन की नियुक्ति होना बाकी है।

नगर निगमों में नियुक्त होंगे एल्डरमैन एमपी के 16 नगर निगमों में 12-12 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर जबलपुर सहित सभी नगर निगमों के एल्डरमैन के लिए संभावित नामों की लिस्ट जिला स्तरीय कोर ग्रुप में चर्चा के बाद प्रदेश संगठन को भेजे जा चुके हैं। दो बडे़ शहरों में कुछ नामों पर चर्चा अंतिम दौर में है।

इन नगर निगमों में नियुक्त होंगे मनोनीत पार्षद

    भोपाल
    इंदौर
    जबलपुर
    ग्वालियर
    उज्जैन
    सागर
    रीवा
    सतना
    सिंगरौली
    मुरैना
    छिंदवाड़ा
    देवास
    कटनी
    रतलाम
    खंडवा
    बुरहानपुर

मार्च में 169 निकायों में नियुक्त हुए थे एल्डरमैन
मार्च में मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन की नियुक्ति के आदेश जारी किए थे। इन नियुक्तियों में विशेष रूप से नगर परिषदों और नगर पालिकाओं को कवर किया गया था, जिसका विवरण इस प्रकार है।

नगर परिषद: एमपी में कुल 299 नगर परिषद हैं। इनमें से 28 मार्च को 123 नगर परिषदों में एल्डरमैन नियुक्त किए गए थे। तय फॉर्मूले के मुताबिक, प्रत्येक नगर परिषद में 4-4 एल्डरमैन मनोनीत किए गए। इस लिहाज से नगर परिषदों में कुल 492 एल्डरमैन बनाए गए थे। अब 176 नगर परिषदों में नियुक्तियां होना बाकी हैं।

नगर पालिका: एमपी में कुल 98 नगर पालिका परिषद हैं। इनमें से मार्च में 46 नगर पालिकाओं में एल्डरमैन की घोषणा की गई थी। यहां के लिए प्रति नगर पालिका 6-6 एल्डरमैन का फॉर्मूला तय किया गया था, जिससे नगर पालिकाओं में कुल 276 एल्डरमैन नियुक्त हुए। अब 52 नगर परिषदों में एल्डरमैन नियुक्त होने बाकी हैं।

यदि दोनों को जोड़कर देखा जाए, तो मार्च में हुई घोषणा के तहत कुल 768 एल्डरमैन नगर परिषद और नगर पालिका में नियुक्त किए गए थे। हालांकि, उस समय आपसी सहमति न बन पाने के कारण सागर को छोड़कर शेष बुंदेलखंड और चंबल संभाग के कई निकायों की सूची होल्ड पर रख दी गई थी।

क्या होती है एल्डरमैन की भूमिका?
मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम के तहत नगरीय निकायों में ऐसे लोगों को एल्डरमैन बनाया जाता है, जिन्हें प्रशासनिक अनुभव और नगरीय निकायों के कामकाज का अच्छा ज्ञान हो। ये मनोनीत पार्षद परिषद की बैठकों और चर्चाओं में हिस्सा तो ले सकते हैं और अपने सुझाव भी दे सकते हैं।

इनके पास बैठकों के दौरान वोट देने का अधिकार नहीं होता है। यानी ये परिषद में ‘मार्गदर्शक’ की भूमिका निभाते हैं, ‘निर्णायक’ की नहीं। इनका कार्यकाल वर्तमान परिषद के कार्यकाल के साथ या आगामी आदेश तक प्रभावी रहता है।

यात्रियों को राहत, मैसूरू-मदार साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन के फेरे फिर बढ़ाए गए

रतलाम
 पश्चिम रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा तथा विशेष रूप से ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान बढ़ती यात्रा मांग को ध्यान में रखते हुए विशेष किराये पर संचालित मैसूरू-मदार साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन के फेरे पुनः विस्तारित किए गए हैं।

जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार 06281 मैसूरू-मदार स्पेशल 11 जुलाई व 06282 मदार-मैसूरू स्पेशल 13 जुलाई 2026 तक विस्तारित की गई है। ट्रेनों के आगमन/प्रस्थान समय, ठहराव और संरचना के समय के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यात्री www.enquiry.indianrail.gov.in पर जा सकते हैं। साथ ही रेलवन एप के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि यात्रियों के बढ़ते दबाव और विशेष मांग के चलते स्पेशल ट्रेन के फेरे बढ़ाए गए हैं। मैसूरू-मदार साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन विशेष किराये पर संचालित की जा रही है।

गोल्डन टेम्पल मेल अगले छह माह तक बांद्रा टर्मिनस से ही संचालित होती रहेगी

रतलाम : रेल मंडल से गुजरने वाली गोल्डन टेम्पल मेल के टर्मिनल स्टेशन से संबंधित अस्थायी परिचालन व्यवस्था को आगामी छह माह तक जारी रखने की अधिसूचना जारी की गई है। 12903 मुंबई सेंट्रल-अमृतसर गोल्डन टेम्पल मेल 17 फरवरी 2027 तक मुंबई सेंट्रल के बजाय बांद्रा टर्मिनस से ही ओरिजिनेट होगी। इसी प्रकार 12904 अमृतसर–मुंबई सेंट्रल गोल्डन टेम्पल मेल 15 फरवरी 2027 तक मुंबई सेंट्रल के बजाय बांद्रा टर्मिनस पर ही टर्मिनेट होगी।

ओंकारेश्वर-ममलेश्वर झूला पुल की तार टूटी, सुरक्षा के मद्देनजर आवाजाही बंद

 ओंकारेश्वर
तीर्थनगरी ओंकारेश्वर को ममलेश्वर से जोड़ने वाले प्रमुख झूला पुल की लोडिंग तार की एक कड़ी टूटने से मंगलवार देर रात पुल से आवाजाही को बंद कर दिया गया है। बुधवार सुबह प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुल के दोनों ओर ताला लगा दिया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और ममलेश्वर मंदिर को जोड़ने वाले इस पुल की कड़ी टूटने से पुल की अन्य सपोर्ट कड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुल का एक हिस्सा हल्का झुका हुआ भी नजर आ रहा है। इससे लोगों की सुरक्षा को लेकर खतरा और बढ़ गया है। इसी के मद्देनजर पुल को आवाजाही के लिए बंद करने का निर्णय लिया गया है।

नायब तहसीलदार उदय मंडलोई ने बताया कि मरम्मत कार्य शुरू करा दिया गया है और तकनीकी जांच के बाद ही पुल को दोबारा खोला जाएगा। अनुमान है कि दो से तीन दिन में आवागमन बहाल हो सकता है।

रखरखाव और दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 में भी महाशिवरात्रि से पहले पुल में तकनीकी खराबी सामने आई थी। वर्ष 2004 में एनएचडीसी द्वारा निर्मित इस पुल में दूसरी बार खराबी आने से इसके रखरखाव और दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

पांच दिन पहले इसी पुल से गुजरी थीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
विदित हो कि पांच दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इसी झूला पुल से भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजन करने के लिए गुजरी थीं। गनीमत रही कि उस दौरान कोई अनहोनी नहीं हुई। उनके दौरे के बाद यह घटना सामने आई है।

रखरखाव में लापरवाही या जिम्मेदारी से बचने की कोशिश
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की एक कड़ी टूटने के बाद अन्य सपोर्ट कड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और पुल का एक हिस्सा हल्का झुक भी गया है। वर्ष 2004 में एनएचडीसी द्वारा निर्मित इस पुल में वर्ष 2023 के बाद दूसरी बार तकनीकी खराबी सामने आई है। इसके बावजूद समय पर व्यापक मरम्मत और सुरक्षा ऑडिट नहीं होना चिंता का विषय है। तीन वर्ष पूर्व महाशिवरात्रि पर पुल की केबल टूटने से करीब दो माह तक आवाजाही बंद रही थी। तत्कालीन कलेक्टर अनूप कुमार सिंह ने पुल पर भार कम करने के लिए इसके उपर लगा टीन का शेड हटवा दिया था।

हैंडओवर पर एनएचडीसी और नगर परिषद के बीच खींचतान
सूत्रों के अनुसार लंबे समय से झूला पुल को नगर परिषद को हैंडओवर करने का मामला लंबित है। एनएचडीसी और नगर परिषद के बीच जिम्मेदारी तय नहीं होने से रखरखाव प्रभावित होने की बात भी सामने आती रही है। सवाल यह है कि आखिर पुल की नियमित निगरानी और मरम्मत की अंतिम जिम्मेदारी किसकी है। जब तक यह स्थिति स्पष्ट नहीं होगी, तब तक श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर खतरा बना रहेगा। फिलहाल एनएचडीसी ही इसका रखरखाव कर रही है।

बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़, सुरक्षा इंतजाम कमजोर
ओंकारेश्वर में हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों के चलते आने वाले समय में यह संख्या कई गुना बढ़ने वाली है। ऐसे में झूला पुल जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं की नियमित तकनीकी जांच,लोड क्षमता का परीक्षण और वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लापरवाही भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

सिंहस्थ पर फोकस, लेकिन स्थानीय व्यवस्थाएं उपेक्षित
प्रशासन का पूरा ध्यान सिंहस्थ की तैयारियों पर केंद्रित है, लेकिन स्थानीय बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं की अनदेखी अब सामने आने लगी है। नर्मदा पर बना यह झूला पुल तीर्थयात्रियों की जीवनरेखा हैए इसलिए इसके रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

अनुभवी प्रशासनिक नेतृत्व की जरूरत
स्थानीय लोगों का मानना है कि सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन और ओंकारेश्वर जैसी संवेदनशील धार्मिक नगरी के प्रभावी प्रबंधन के लिए केवल प्रोबेशनरी आइएएस अधिकारी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। यहां अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती समय की आवश्यकता है। पिछले करीब चार साल से पुनासा एसडीएम के पद पर प्रशिक्षु आइएएस की लर्निंग स्कूल बना हुआ है। यहां के एसडीएम के पास ही ओंकारेश्वर जैसी महत्वपूर्ण जगह का प्रभार भी रहता है।

इधर ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट में लंबे समय से रिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी ;सीईओद्ध के पद पर भी योग्य और अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति शीघ्र की जानी चाहिएए ताकि विकास कार्यों, सुरक्षा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का बेहतर समन्वय हो सके।

नायब तहसीलदार उदय मंडलोई ने बताया कि पुल की मरम्मत शुरू कर दी गई है और तकनीकी परीक्षण के बाद ही इसे दोबारा खोला जाएगा। अनुमान है कि दो से तीन दिन में आवागमन बहाल हो सकता हैए लेकिन इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि समय रहते स्थायी और जिम्मेदार समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस मामले में कलेक्टर ऋषव गुप्ता और पुनासा एसडीएम पकंज वर्मा से वस्तु स्थिति जाने के लिए फोन लगाने पर चर्चा नहीं हो सकी

 

ख्वाजा आसिफ की युद्ध वाली गीदड़भभकी पर भारत का पलटवार, PoK का जिक्र कर दिया करारा जवाब

 नई दिल्ली
भारत ने  पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया युद्ध संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने कहा कि पीओके में अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान की ओर से ऐसी बयानबाजी की जा रही है. साथ ही भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हो रही कार्रवाई का मुद्दा भी उठायाव्। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, ‘पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की टिप्पणियों को लेकर हमने रिपोर्ट्स देखी हैं. इस तरह के बयान पाकिस्तान की अपनी विफलताओं को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने की हताश कोशिश हैं. हम इन मनगढ़ंत दावों को पूरी तरह खारिज करते हैं.’ रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूदा हालात पाकिस्तान की दशकों पुरानी नीतियों का नतीजा हैं। 

उन्होंने कहा, ‘पीओके में चल रहे घटनाक्रम पाकिस्तान की उस नीति का सीधा परिणाम हैं, जिसमें आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित करना और अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक दमन शामिल रहा है.’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने पीओके में सरकारी विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति रोकी है, इंटरनेट सेवाएं बंद की हैं और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग किया है। 

रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन घटनाओं में कई लोगों की जान भी गई है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग की. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कृत्यों, गलत नीतियों और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराएगा। 

भारत की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की उस चेतावनी के तीन दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि सिंधु जल संधि को लेकर भारत की किसी कार्रवाई से पाकिस्तान की जल सुरक्षा प्रभावित होती है तो उनका देश सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है. एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने कहा था, ‘जिस क्षण हमें लगेगा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, जिसमें पानी भी शामिल है, खतरे में है, हम भारत के खिलाफ युद्ध शुरू करेंगे. निश्चित रूप से करेंगे। 

महाकाल मंदिर की आय ने बनाया नया रिकॉर्ड, 142 करोड़ रुपए का दान; पिछले साल से 27 करोड़ अधिक

उज्जैन 
महाकाल लोक बनने के बाद बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ दान का प्रवाह भी लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में महाकाल मंदिर समिति को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई है, जिसमें केवल दान मद से ही 78 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं। यह बीते छह वर्षों में सबसे अधिक दान है और पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 27 करोड़ रुपए ज्यादा है।

मंदिर समिति के अनुसार दान पेटियों से 62 करोड़ रुपए, नगद काउंटर पर 5 करोड़ 50 लाख रुपए, मनी ऑर्डर से 1.23 लाख रुपए, ऑनलाइन माध्यम से 3 करोड़ 60 लाख रुपए, अन्नक्षेत्र से 3 करोड़ 38 लाख रुपए तथा गुप्त दान के रूप में 4 करोड़ 65 लाख रुपए प्राप्त हुए।

लड्‌डू की बिक्री 65 करोड़ की
वहीं लड्डू प्रसादी की बिक्री से 65 करोड़ रुपए की आय हुई। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के करोड़ों रुपए मूल्य के आभूषण भी दान किए हैं।

गौरतलब है कि 11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री ने महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। इसके बाद महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में करीब तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

पहले जहां प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख प्रतिदिन तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ मंदिर की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

दान कक्ष में सिली हुई जेब वाले कपड़ों में ही मिलती है एंट्री
राम मंदिर में दान को लेकर चल रहे विवाद के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया ने बताया कि मंदिर में प्राप्त होने वाले दान के संबंध में पूरी पारदर्शिता और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। मंदिर परिसर में कुल 95 दान पेटियां स्थापित हैं, जिनमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में दान करते हैं। इसके अलावा श्रद्धालु क्यूआर कोड के माध्यम से भी ऑनलाइन दान कर रहे हैं।

हर सप्ताह दान पेटियां खोली जाती हैं। इन्हें सुरक्षा व्यवस्था के बीच गणना कक्ष तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद निरीक्षक, सहायक प्रशासक तथा मंदिर समिति के अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में दान पेटियां खोली जाती हैं। दान की गणना की फोटोग्राफी कराई जाती है और पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है।

दान की गणना के लिए नियुक्त कर्मचारियों को विशेष नियमों का पालन करना पड़ता है। उन्हें बिना जेब वाले कपड़े या सिली हुई जेब वाले परिधान पहनने के बाद ही गणना कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे।

दान बढ़ा तो खर्च भी दोगुना हुआ
श्री महाकाल लोक के लोकार्पण से पहले महाकाल मंदिर का क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर था, जो विस्तार के बाद बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। वर्तमान में मंदिर समिति के कुल 306 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों के वेतन के अलावा मंदिर की सुरक्षा, साफ-सफाई, रखरखाव, निर्माण कार्य, पर्व-त्योहारों की व्यवस्थाएं, धर्मशाला, अन्नक्षेत्र, महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान, गोशाला तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर बड़ी राशि खर्च होती है।

मासिक खर्च भी बढ़कर 5 करोड़ से ज्यादा
इसके अतिरिक्त महाशिवरात्रि, श्रावण मास, नागपंचमी सहित अन्य प्रमुख पर्वों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी अतिरिक्त व्यय किया जाता है। पहले मंदिर का मासिक खर्च करीब 2.5 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 5 करोड़ रुपए से अधिक प्रतिमाह हो गया है।

EWS छात्रों को नहीं मिली राहत, सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सरकारी फीस की मांग खारिज की

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने EWS आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेज फीस को लेकर याचिका खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों को सरकारी कॉलेजों जैसी फीस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता क्योंकि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है. जस्टिस बी वी नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा कि निजी कॉलेजों में अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकते तो स्कॉलरशिप समेत अन्य विकल्प जैसे सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं. जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि सरकारी संस्थानों को सरकार से अनुदान मिलता है, जबकि निजी संस्थान अपनी फीस से चलते हैं और अगर निजी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त फीस लेने से रोका गया तो चिकित्सा शिक्षा में उनका योगदान प्रभावित होगा। 

जो वहन नहीं कर सकते हैं फीस 
इस मु्द्दे पर फैसला देते हुए जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि अगर कोई छात्र फीस वहन नहीं कर सकता है, तो स्कॉलरशिप, सबवेंशन या अन्य वित्तीय सहायता के विकल्प उपलब्ध हैं। 

देश को डॉक्टरों की जरूरत
उन्होंने आगे कहा कि देश को अधिक डॉक्टरों की जरूरत है और निजी मेडिकल कॉलेज इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में निजी कॉलेजों की फीस अधिक है केवल इसलिए उन्हें सरकारी कॉलेजों के बराबर फीस लेने का आदेश नहीं दिया जा सकता. हालांकि,  सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि इस मामले से जुड़ा कोई व्यापक कानूनी प्रश्न भविष्य में उठाया जा सकता है। 

राजस्थान का भी उठा मामला
वहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने भी निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस संरचना को वैध माना था और कहा था कि राज्य की फीस नियामक समिति द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार ही फीस तय की गई है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की 8 लाख रुपये के वार्षिक आय सीमा और निजी मेडिकल कॉलेजों की ऊंची फीस के बीच कथित विरोधाभास को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल की गई अपील पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। 

सिया के बर्थडे पर ग्रैंड पार्टी की थी तैयारी, महाबलेश्वर के रिजॉर्ट में बुक थे 40 कमरे

 पुणे

जिस सिया गोयल ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल किले से धक्का देकर मार दिया, उसने सिया के बर्थडे पर ग्रैंड सेलिब्रेशन की तैयारी कर रखी थी. जांच में सामने आया है कि 19 जून को केतन अग्रवाल ने महाबलेश्वर के एक बड़े रिजॉर्ट में लगभग 40 से 50 कमरे बुक किए थे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सिया गोयल पर केतन अग्रवाल की हत्या की मुख्य साजिशकर्ता होने का आरोप है। 

इस पूरे मामले की जांच करने वालों का दावा है कि सिया ने इस पूरे कांड की साजिश इसलिए रची, क्योंकि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी. वह अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ रिलेशन रखना चाहती थी। 

पुलिस ने कहा कि सिया ने अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर हत्या की प्लानिंग की. जांच के दौरान सामने आया कि सिया पहले 31 मई को केतन के साथ ट्रेकिंग के लिए लोहागढ़ किले गई थी. पुलिस को शक है कि इसी दौरान केतन को चट्टान से नीचे धकेलने का खयाल सबसे पहले उसके मन में आया था। 

इसके बाद 14 जून को दोनों ने फिर से फोटोशूट के बहाने लोहागढ़ किले का विजिट किया. इस दौरान सिया ने यह कहकर हंगामा कर दिया कि उसके पास एक सांप आ गया है, लेकिन केतन को घाटी में धकेलने की प्लानिंग नाकाम रही. बाद में 18 जून को सिया के बर्थडे से एक दिन पहले वह केतन को एक बार फिर लोहागढ़ किले ले गई. पुलिस का दावा है कि चेतन चौधरी के साथ मिलकर उसने केतन को चट्टान से नीचे धकेल दिया गया। 

मंगेतर के साथ सिया की रोमांटिक पोस्ट

पुणे में मंगेतर की हत्या करने वाली 20 साल की सिया गोयल ने सोशल मीडिया अकाउंट पर केतन अग्रवाल (26) के साथ कई रोमांटिक पोस्ट किए थे। कभी प्रपोजल की तस्वीरें, कभी फूल देकर प्यार जताने वाले पल, तो कभी डांस और गले मिलने के वीडियो।

दोनों की नवंबर में होने वाली शादी की तैयारियां भी सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा थीं। इस साल फरवरी में सगाई के बाद सिया ने इंस्टाग्राम पर एक केक की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- मेरे दिल को उसका घर मिले एक महीना पूरा हुआ। उसने केतन को टैग भी किया था।

पुलिस के मुताबिक, 18 जून को केतन की मौत के दिन लोहगढ़ किले पर एक युवक 33°C तापमान में हुडी पहनकर आया था। पुलिस ने जांच में इसे ही आधार बनाकर एक-एक कड़ियां जोड़ीं। आखिरकार सिया और उसे बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी (22) को केतन की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया।

19 जून को सिया का बर्थडे, केतन से पहले से सेलिब्रेशन शुरू कर दिया
सोशल मीडिया पर सिया और उसके मंगेतर केतन का रिश्ता किसी परफेक्ट लव स्टोरी जैसी थी। 19 जून को सिया का बर्थडे था। केतन ने एक महीने पहले यानी 19 मई से ही काउंटडाउन सेलिब्रेशन शुरू कर दिया था। वह रोज उसे अलग-अलग तरीके से अपनी मंगेतर सरप्राइज देता।

सिया सोशल मीडिया पर इसके वीडियो पोस्ट करती थी। ये पोस्ट अब वायरल हो रहे हैं। एक पोस्ट में केतन अपनी कार फूलों से सजाकर सिया को गिफ्ट देता दिखा। सिया ने इसका वीडियो पोस्ट कर लिखा- उसने ‘पसंद है तुम्हें’ वाली बात को बहुत सीरियसली से ले लिया।

बैकग्राउंड में ‘पसंद है तुम्हें’ गाना भी बज रहा था। एक स्टोरी में उसने केतन की तस्वीर को ‘दैट स्माइल’ कैप्शन के साथ शेयर किया था। केतन की मौत के अगले दिन सिया ने इंस्टाग्राम पर एक इमोशनल पोस्ट लिखी- ‘केतन तुम मुझे मेरे जन्मदिन पर अकेला छोड़ गए। वापस आ जाओ।’

पिता ने बयां किया दर्द, बोले- बेटा कोहिनूर था
केतन के पिता विशाल अग्रवाल से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि 26 साल का बेटा गुजर गया, ये दुख समंदर से बड़ा है. मेरा बेटा मेरे बुढापे का सहारा था, मेरा वंशज था. विशाल अग्रवाल ने कहा कि मेरी चिता को वही मुखाग्नि देने वाला था. आज वही चला गया. मेरा सब खत्म हो गया. उन्होंने बताया कि केतन पढ़ाई में होशियार था. उसने यूएस से एमबीए किया था. इसके बाद वह मेरे बिजनेस में ही हाथ बंटा रहा था. बेटा मेरे लिए कोहिनूर था, जिसे धोखे से मार दिया। 

कॉल रिकॉर्ड से प्रेमी का खुलासा, 2004 कॉल्स और 238 घंटे बातचीत हुई
पुलिस को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और डिजिटल कम्युनिकेशन डेटा की जांच से पता चला सिया चेतन नाम के लड़के से लगातार संपर्क में थी। दोनों के बीच 1 जनवरी से 18 जून तक 2004 कॉल्स हुए। इससे दोनों के बीच गहरे संबंध के संकेत मिले।

पुलिस ने चेतन की तस्वीरों और सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच की। जब उसकी तस्वीरों को CCTV फुटेज में दिख रहे हुडी वाले युवक से मैच किया गया तो हत्या का शक और मजबूत हो गया। इसके बाद पुलिस ने चेतन चौधरी को हिरासत में लिया।

प्रेमी बोला- सिया बदनामी के कारण भागकर शादी के खिलाफ थी
पूछताछ में चेतन से जब पूछा गया कि सिया और तुमने भागकर शादी क्यों नहीं की। इस पर उसने बताया कि सिया सगाई तोड़कर भागने के पक्ष में नहीं थी। उसे लगता था कि इससे उसके परिवार की बदनामी होगी। इसके बाद पुलिस ने सिया और चेतन दोनों को गिरफ्तार कर हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप में मामला दर्ज किया।

रियल एस्टेट कारोबारी थे केतन, शादी के लिए 17 करोड़ में पैलेस बुक था
केतन अग्रवाल पुणे के गहुंजे के रहने वाले थे। वे रियल एस्टेट कारोबारी और सक्सेस ग्रुप के डायरेक्टर विशाल अग्रवाल के बेटे थे। विशाल पुणे के रियल एस्टेट सर्कल में ‘लैंड बैंक’ माने जाते हैं। केतन भी कंपनी में डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) के पद पर थे।

उन्होंने सिंबायोसिस यूनिवर्सिटी से BBA किया था। अमेरिका के बैब्सन F.W. ओलिन ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से एंटरप्रेन्योरशिप में MS (मास्टर ऑफ साइंस) की डिग्री ली। सिया ड्राई फ्रूट्स कारोबारी की बेटी है। नवंबर में दोनों की शादी होनी थी। इसके लिए राजस्थान में 17 करोड़ रुपए का एक पैलेस बुक किया जा चुका था। मेहमानों के लिए दो चार्टर्ड प्लेन बुक थे।

बहन को हुआ शक, 4 दिन बाद पहुंची थी सिया
पुलिस जांच में 18 जून की गतिविधियां भी संदेह के घेरे में आ गईं. जांचकर्ताओं के मुताबिक, घटना वाले दिन सुबह 7 बजे से शाम 5 बजकर 40 मिनट तक चेतन चौधरी का इंटरनेट बंद रहा. इस अवधि को पुलिस ने बेहद महत्वपूर्ण माना और उसकी गतिविधियों की बारीकी से पड़ताल शुरू की। 

25 नवंबर को होनी थी केतन और सिया की शादी
जांच में यह भी सामने आया कि चेतन चौधरी कथित तौर पर अपना मोबाइल फोन दुकान पर छोड़कर गया था. पुलिस का दावा है कि वह अपने कर्मचारी का मोबाइल लेकर लोहगढ़ पहुंचा था. जांचकर्ताओं को शक है कि ऐसा अपनी वास्तविक लोकेशन छिपाने और मोबाइल ट्रैकिंग से बचने के लिए किया गया। 

मामले को और पुख्ता करने के लिए पुलिस ने 18 जून को चेतन के मोबाइल पर आने वाली सभी कॉल्स की जांच की. जिन लोगों ने उस दिन फोन किया था, उनसे पूछताछ की गई. पुलिस के अनुसार, कई कॉलर्स ने बताया कि फोन पर खुद चेतन ने बात नहीं की थी, बल्कि उसके कर्मचारियों ने कॉल रिसीव कर जवाब दिए थे. इससे जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा हो गया। 

डिजिटल सुरागों ने बदली जांच की दिशा
पुलिस का कहना है कि कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट गतिविधियों, मोबाइल लोकेशन और पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों ने जांच को हत्या की साजिश की ओर मोड़ दिया. जांच में मिले तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कई महत्वपूर्ण कड़ियां जोड़ी हैं. फिलहाल मामले की जांच जारी है. हालांकि, इस पूरे केस में केतन की बहन का शुरुआती शक वह पहला सुराग साबित हुआ, जिसने एक कथित हादसे के पीछे छिपी कहानी को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई. अब पुलिस डिजिटल सबूतों और पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की परत-दर-परत जांच कर रही है। 

लगातार दूसरे दिन सस्ता हुआ सोना-चांदी, चांदी ₹3000 और सोना ₹2000 तक हुआ सस्ता

इंदौर 
सोने और चांदी का रेट आज 24 जून को लगातार दूसरे दिन फिसल गया है. सोने का भाव आज एमसीएक्स पर सुबह 9:40 बजे पर 2234 रुपये गिरकर 144295 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. चांदी का भाव भी 3407 रुपये फिसलकर 222427 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहा है. कॉमैक्स पर गोल्ड का दाम 1.59% गिरकर 4081 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है. सिल्वर 1.55% फिसलकर 61.110 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। 

सोने के अलावा अन्य कीमती धातुओं की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली. प्लैटिनम 0.9% की कमजोरी के साथ 1,637.34 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा. इसके अलावा, पैलेडियम की कीमत में 1.2% की गिरावट आई और यह 1,223.29 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। 

अलग-अलग शहरों में कितना है सोने का रेट?
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, सराफा बाजार की बात करें तो चेन्नई में 24 कैरेट सोना 14,792 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 13,559 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 11,339 रुपये प्रति ग्राम पर कारोबार कर रहा है. वहीं, दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 14,474 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट का 13,269 रुपये और 18 कैरेट का 10,859 रुपये प्रति ग्राम है। 

मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में सोने की कीमतें लगभग समान रहीं. इन शहरों में 24 कैरेट सोना 14,459 रुपये प्रति ग्राम, 22 कैरेट सोना 13,254 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 10,844 रुपये प्रति ग्राम पर रहा। 

क्या सोने में आएगी और गिरावट?
जर्मनी के प्रमुख बैंक डच बैंक(Deutsche Bank) ने सोने की कीमतों को लेकर अपने अनुमान में 20% से अधिक की कटौती की है. बैंक का कहना है कि अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में 3 से 4 बार बढ़ोतरी की संभावना बाजार में मजबूत होती है, तो सोने की कीमत गिरकर 3,800 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक की दी गई जानकारी में बताया गया है कि एमपीसी को लेकर बदलती उम्मीदों ने सोने के लिए रिस्क का संतुलन नीचे की ओर कर दिया है। 

डच बैंक के विश्लेषक माइकल शुएह ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बैंक के बेस केस अनुमान के अनुसार, यदि फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करता है, तो इस साल की चौथी तिमाही में सोने की कीमत 4,800 डॉलर प्रति औंस तक रह सकती है. हालांकि, अगर मार्केट आने वाले समय में कई बार ब्याज दर बढ़ने की संभावना को कीमतों में शामिल करता है, तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है और इसकी कीमत 3,800 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकती है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े और फेडरल रिजर्व की नीति को लेकर बदलती उम्मीदें सोने की कीमतों में हालिया गिरावट की सबसे बड़ी वजह हैं. Investing.com के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स मंगलवार को 1.6% गिरकर 4,135 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आ गए. ग्लोबल लेवल पर पिछले एक महीने में सोने की कीमतों में करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई है. साथ ही एशियाई बाजारों में मांग कमजोर पड़ने के संकेत भी मिले हैं, जिससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर दबाव बढ़ा है। 

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