सीएम मोहन यादव पर लगे आरोपों को BJP ने किया खारिज, कहा- कांग्रेस के षड्यंत्र को जनता नहीं करेगी माफ

भोपाल
 भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। पार्टी ने कहा है कि कांग्रेस भ्रम की स्थिति निर्मित कर रही है। प्रदेश की जनता कांग्रेस के षडयंत्र को बर्दाश्त नहीं करेगी। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोकप्रिय नेता हैं और प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में दिन-रात काम कर रहे हैं।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी द्वारा हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर जो आरोप लगाया गया, वो पूरी तरह गलत है। कांग्रेस और उनके नेताओं द्वारा भ्रम की स्थिति निर्मित करने का प्रयास किया जा रहा है। मैं समझता हूं कि इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है।

उन्होंने कहा, “मैं बताना चाहता हूं कि हमारे मुख्यमंत्री के द्वारा साल 2023 में जो नामांकन दाखिल किया गया उसके मुताबिक उस वक्त उनके पास 17 एकड़ की जो जमीन थी, वो साल 2026 में भी उतनी ही है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ की जो जमीन थी, इसमें भी 2026 में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।”

उन्होंने कहा कि एक सिद्धि विनायक कंपनी, जिसका आरोप में जिक्र किया गया, उसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून में घटकर मात्र 65 एकड़ रह गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साल 2017 में इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था।

प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के बेटे वैभव के पास भी 2023 से पहले जो 16 एकड़ जमीन थी, उसमें डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई परिवर्तन नहीं आया। ये सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने से पहले की थी। उनकी बहू शालिनी यादव द्वारा 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई, जो मास्टर प्लान एरिया के बाहर की थी।

आरोपों में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है। वो पूरी तरह से गलत है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई लेना देना नहीं है। उनके रिश्तेदारों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है।

उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी में यह आया है कि रिश्तेदारों पर भी जो आरोप लगाए गए, उसमें भी दिए गए तथ्य गलत हैं। मुझे बताया गया है कि ये रिश्तेदार भी अपनी बात कहेंगे और कार्रवाई करेंगे।

CM मोहन यादव पर कांग्रेस के आरोपों को भाजपा ने बताया षड्यंत्र

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की जमीन खरीद से जुड़े आरोपों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इसे पूरी तरह निराधार और राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि जब-जब ओबीसी वर्ग का मुख्यमंत्री बना और आगे बढ़ा तो यह कांग्रेस को रास नहीं आया।

उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री मोहन पर जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। कांग्रेस और उसके नेताओं के द्वारा भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है‌।

2023 के बाद जमीन में कोई बढ़ोतरी नहीं
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के द्वारा 2023 के विधानसभा चुनाव में जो नामांकन दाखिल किया था, उस स्थिति में उनके पास 17 एकड़ जमीन थी। आज उसमें कुछ भी परिवर्तन नहीं हुआ है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ की जो जमीन थी, इसमें भी 2026 में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।

जिस सिद्धिविनायक कंपनी का उल्लेख किया गया उसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून 2026 में घटकर 65 एकड़ रह गई। मुख्यमंत्री ने 2017 में इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके पुत्र वैभव के पास भी 2023 के पूर्व 16 एकड़ जो जमीन थी, डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया। यह सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने के पहले थी।

पुत्रवधू द्वारा खरीदी गई 10 एकड़जमीन का भी दिया विवरण
खंडेलवाल ने आगे कहा कि सीएम की पुत्रवधू शालिनी यादव के द्वारा जरूर 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई है, जो कि विकसित मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर थी। आरोप में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है, वह भी पूरी तरह से गलत है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई उसे लेना-देना है। उनके रिश्तेदारों का स्वतंत्र अस्तित्व है और मेरी जानकारी में यह आया है कि वे आरोपों के संबंध में अपना स्टैंड लेंगे और जो कार्रवाई करना होगी, वह करेंगे।

प्रदेश के सतत विकास में जुटे सीएम
खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के द्वारा प्रदेश के विकास में लगातार काम किया जा रहा है। इस प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने काम किया है फिर वह चाहे किसानों की बात हो या फिर चाहे औद्योगिक विकास की। इस प्रदेश को मध्य प्रदेश को देश के सबसे विकसित राज्यों में ले जाने का काम मुख्यमंत्री द्वारा किया जा रहा है। उनके खिलाफ षड्यंत्र का काम कांग्रेस पार्टी कर रही है।

कांग्रेस कर रही षड्यंत्र
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जब-जब प्रदेश को ओबीसी मुख्यमंत्री मिला, चाहे उमा भारती हो, शिवराज सिंह चौहान या डॉ. मोहन यादव, उन्हें षड्यंत्र करके कमजोर करने का काम कई लोगों के द्वारा किया गया। इस तरह मुख्यमंत्री को कमजोर करने का काम कांग्रेस के लोग करते हैं।

उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को जनता के द्वारा जो विकास कार्य किए जा रहे हैं, उसमें पीछे नहीं कर पाए तो इस तरह के षड्यंत्र करके हमारी सरकार और मुख्यमंत्री को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। इसे इस प्रदेश की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

कांग्रेसी पिछड़े वर्ग का नेतृत्व बर्दाश्त नहीं करती
प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि किसी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इस प्रदेश को विकसित बना रहे हैं। चाहे किसानों की बात करें, चाहे उद्योगों के विकास की बात करें, सीएम डॉ. यादव इस प्रदेश को आगे ले जा रहे हैं। उनके खिलाफ कांग्रेस पार्टी षडयंत्र रच रही है।

उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि जब-जब एक पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री इस प्रदेश को मिला, चाहे उमा भारती हों, चाहे शिवराज सिंह चौहान हों, या मोहन यादव हों, कांग्रेस ने उनके खिलाफ षडयंत्र करके, उनको कमजोर करने का काम किया है। समाज के ठेकेदार, जिन्हें प्रदेश में पिछड़े वर्ग का नेतृत्व स्वीकार नहीं होता, वे लगातार इस तरह के षडयंत्र करते हैं और इस तरह एक लोकप्रिय मुख्यमंत्री कमजोर करने का काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि मैं पूरी विनम्रता के साथ, पूरी सख्ती के साथ कांग्रेस के आरोपों का खंडन करता हूं। कांग्रेसी कामों में उन्हें पीछे नहीं कर सके तो इस तरह का षडयंत्र कर रहे हैं। इसे प्रदेश की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

मुंद्रा पोर्ट ड्रग्स केस का पैसा दिल्ली के नाइट क्लबों में? ED की ताबड़तोड़ छापेमारी

नई दिल्ली

देश के सबसे बड़े ड्रग्स मामलों में से एक, गुजरात के मुंद्रा पोर्ट ड्रग्स मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को दिल्ली में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीमों ने दिल्ली में पांच अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह कार्रवाई करीब 21,000 करोड़ रुपये की कीमत के 3,000 किलो ड्रग्स की तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और उससे हुई कमाई के निवेश को लेकर की गई है।

जांच एजेंसियों को इस मामले में कुछ बेहद चौंकाने वाले इनपुट मिले थे, जिसके बाद यह एक्शन लिया गया। जानकारी के मुताबिक ईडी इस बात की पड़ताल कर रही है कि नशीले पदार्थों की तस्करी से कमाए गए काले धन को कहां-कहां सफेद किया गया। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसी को पुख्ता शक है कि ड्रग्स के इस अवैध धंधे से हुई मोटी कमाई को दिल्ली के नामी नाइट क्लबों में इनवेस्ट किया गया था।

हरप्रीत सिंह तलवार के ठिकानों पर रेड
ईडी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को हुई इस छापेमारी का मुख्य फोकस मामले से जुड़े दो बड़े किरदारों पर रहा। ED ने हरप्रीत सिंह तलवार, शम्सुद्दीन और उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की। बता दें कि इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आरोपी हरप्रीत सिंह तलवार को गिरफ्तार भी किया था। वह हाल ही में जमानत पर बाहर आया था।

क्या है 21 हजार करोड़ का मुंद्रा पोर्ट ड्रग्स केस?
यह पूरा मामला भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी ड्रग्स बरामदगी से जुड़ा हुआ है। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर जांच एजेंसियों ने एक बड़े ऑपरेशन के तहत करीब 3,000 किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस भारी-भरकम ड्रग्स की खेप की कीमत लगभग 21,000 हजार करोड़ आंकी गई थी। एनआईए के साथ-साथ ईडी भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से इस केस की जांच कर रही है।

कांग्रेस ने पीएम मोदी पर बोला था हमला
कांग्रेस ने 2022 में हुए गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर खूब हमला बोला था। मुंद्रा पोर्ट और गुजरात के अन्य बंदरगाहों से लगातार भारी मात्रा में मिल रही ड्रग्स की खेपों को लेकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए थे। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा था कि गुजरात में व्यापार करने की सहूलियत की जगह ‘इज ऑफ डूइंग ड्रग बिजनेस’ चल रहा है। राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा था, “गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर तीन बार में हजारों करोड़ की ड्रग्स बरामद हुई। कानून-व्यवस्था की ऐसी धज्जियां उड़ने पर भी प्रधानमंत्री आखिर कब तक चुप रहेंगे?”

India-US Trade Deal: जल्द फाइनल हो सकती है भारत-अमेरिका डील, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के दौरे से बढ़ी उम्मीदें

नई दिल्‍ली

भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट सामने आया है. फरवरी 2025 में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू होने के बाद अब इस हफ्ते अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर भारत आ रहे हैं. इस दौरान वह क्रेंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अन्‍य सीनियर सिटीजन अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। 

दोनों देश अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के तहत अंतरिम व्यापार समझौते और संयुक्त बयान पर बातचीत करेंगे. साथ ही भारत और अमेरिका के बीच डील को आगे बढ़ाएंगे. 21 जून को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) कार्यालय की ओर से इसकी जानकारी दी गई. साथ ही भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी सोशल मीडिया पोस्‍ट के जरिए इसकी जानकारी दी है। 

भारत और अमेरिका के बीच इस डील पर अपडेट तब आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जी-7 समिट के दौरान मुलाकात हुई थी. अमेरिका की ओर से कहा गया है कि जेमिसन ग्रीयर का भारत दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 13 फरवरी 2025 को हुई बैठक के बाद, डील को लेकर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए हो रहा है. इस बैठक के तहत डील पर विस्‍तार से आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। 

सर्जियो गोर ने एक्स पोस्ट पर क्या कहा?
सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘नई दिल्ली में राजदूत ग्रीर का स्वागत करने के लिए उत्साहित हूं। अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई बैठकें निर्धारित हैं।’ ग्रीर की पीयूष गोयल के साथ बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देश प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे को अगले महीने की महत्वपूर्ण टैरिफ समयसीमा से पहले अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

अंतरिम समझौता भविष्य के लिए अहम
मंत्रिस्तरीय स्तर की यह बैठक भारत और अमेरिका के बीच चल रही अंतरिम व्यापार समझौते की बातचीत का हिस्सा है। माना जा रहा है कि यह अंतरिम समझौता भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रास्ता तैयार करेगा। बीते रविवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि उनके अमेरिकी समकक्ष व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए नई दिल्ली आने वाले हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत के लिए मेरे समकक्ष कल दिल्ली आ रहे हैं।’

बीटीए का पहला चरण अगले महीने तक होगा पूरा
इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा था कि दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत का मुख्य उद्देश्य ढांचा समझौते को अंतिम रूप देना और व्यापक व्यापार समझौते पर वार्ता को आगे बढ़ाना होगा। पीयूष गोयल ने भी कहा था कि भारत और अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते से जुड़े सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया था कि बीटीए का पहला चरण अगले महीने के मध्य तक पूरा किया जा सकता है।

यह वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अमेरिका की ओर से सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ 24 जुलाई को समाप्त होने वाला है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में घोषित यह अस्थायी टैरिफ ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (एमएफएन) शुल्क दरों के अतिरिक्त लगाया गया था। 150 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिका नई टैरिफ व्यवस्था लागू कर सकता है।
 
यह नई मंत्रिस्तरीय बातचीत 2 जून से 4 जून के बीच नई दिल्ली में हुई मुख्य वार्ताकार स्तर की बैठकों के बाद हो रही है। उन बैठकों में भी प्रस्तावित व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई थी।भारत और अमेरिका दोनों आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और व्यापार बढ़ाने के उद्देश्य से चरणबद्ध व्यापार व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। साथ ही दोनों देश एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।

और कहां फंसा है पेच?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) कार्यालय ने मार्च में भारत समेत कई देशों के खिलाफ धारा 301 के तहत एकतरफा जांच दो मामलों में शुरू की थी। ये जांच ग्लोबल सप्लाई चेनों में कथित बंधुआ मजदूरी और ‘अत्यधिक उत्पादन क्षमता’ से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। यूएसटीआर ने 2 जून को भारत समेत 54 देशों पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था। यह टैरिफ बंधुआ मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहने के आरोप में लगाने की बात कही गई थी। यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है। इस पर हितधारक 22 जून तक सुनवाई में भाग लेने के अनुरोध और बयान जमा कर सकते हैं। यूएसटीआर 7 जुलाई को सुनवाई करेगा। दूसरी जांच की रिपोर्ट अभी पेंडिंग है।

क्‍यों महत्‍वपूर्ण है ये बैठक? 
भारत और अमेरिका एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं. कुछ सालों में दोनों देशों के बीच व्यापार का आंकड़ा 190 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है. दोनों सरकारों ने आन वाले सालों में व्‍यापार को और बढ़ाने की इच्‍छा जताई है. इस कारण जेमिसन ग्रीर की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्‍योंक इससे व्‍यापार वार्ता की दिशा का संकेत मिल सकता है। 

अभी तक डील पर क्‍या हुआ है? 
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्‍यापार समझौते का ऐलान किया गया है, लेकिन अभी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार समझौते को लेकर बातचीत पूरी नहीं हुई है. इस डील पर दोनों पक्ष लगातार बातचीत कर रहे हैं, जल्‍द ही इस डील पर फाइनल मोहर लग सकती है. वहीं भारत अमेरिका से टैरिफ को और कम करने की मांग रख सकता है, जबकि अमेरिका भारत से एग्री के कुछ प्रोडक्‍ट्स को परमिशन देने की मांग कर रहा है। 

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायगढ़ में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

रायपुर

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु रायगढ़ में विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायगढ़ के सहयोग से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) अंतर्गत नगर निगम ऑडिटोरियम, रायगढ़ में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।  

पंचायत प्रतिनिधि एवं अन्य हितधारकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान राज्य सलाहकार मती मोनिका सिंह एवं  पुरुषोत्तम पंडा ने मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रतिभागियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं सतत ग्रामों के निर्माण में वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा सभी ग्राम पंचायतों को नियमों के अनुरूप कार्य करना आवश्यक होगा।

कचरा पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण पर विशेष जोर

प्रशिक्षण सत्र में घरेलू एवं सामुदायिक स्तर पर उत्पन्न होने वाले विभिन्न प्रकार के कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को 4-वे कचरा पृथक्करण प्रणाली की जानकारी दी गई, जिसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी अपशिष्ट तथा घरेलू खतरनाक अपशिष्ट को अलग-अलग संग्रहित करने एवं उनके सुरक्षित निस्तारण की प्रक्रिया समझाई गई।

विशेषज्ञों ने बताया कि स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण करने से अपशिष्ट प्रबंधन अधिक प्रभावी एवं पर्यावरण अनुकूल बनता है। ग्राम पंचायतों में कचरा संग्रहण, परिवहन एवं अंतिम निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करने पर भी बल दिया गया। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि ग्राम पंचायत क्षेत्रों में कचरे को खुले में फेंकना, जलाना अथवा भूमि में दबाना नियमों के विरुद्ध है तथा ऐसे मामलों में जुर्माना सहित वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

बल्क वेस्ट जेनरेटरों के पंजीयन और जनजागरूकता पर चर्चा

 कार्यशाला में बल्क वेस्ट जेनरेटरों की पहचान एवं उनके पंजीयन की प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर बल्क वेस्ट जेनरेटरों के पंजीयन की प्रक्रिया समझाई गई तथा बताया गया कि बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के अपशिष्ट प्रबंधन की नियमित निगरानी की जाएगी। 

प्रशिक्षण के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता अभियान संचालित करने, प्रत्येक परिवार को कचरा पृथक्करण के लिए प्रेरित करने तथा स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने संबंधी दिशा-निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि सामुदायिक सहभागिता और जनजागरूकता के माध्यम से ही स्वच्छ, स्वस्थ एवं पर्यावरण अनुकूल ग्रामों का निर्माण संभव है।

 कार्यक्रम में मुख्य रसायनज्ञ  नवीन चंद्र मालवीय, वैज्ञानिक सु श्वेता खाखा, वैज्ञानिक  सतीश पटेल, पर्यावरण विभाग के अधिकारीगण, जिला पंचायत से एपीओ  वीरेंद्र सिंह राय, जिला सलाहकार (एसबीएम-जी)  अर्जुन मेहेर, विभिन्न जनपद पंचायतों की एसबीएम-जी टीम, सरपंच, सचिव एवं स्वच्छाग्रही बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

 कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने ग्राम पंचायत क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।

साय सरकार की पहल से श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिलेगा बेहतर भविष्य, सरकार उठाएगी पढ़ाई का पूरा खर्च

साय सरकार की पहल से श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिलेगा बेहतर भविष्य, सरकार उठाएगी पढ़ाई का पूरा खर्च

 अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 3 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित, निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन और अध्ययन सामग्री की सुविधा

रायपुर, 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को राज्य के चयनित निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा छठवीं से बारहवीं तक अध्ययन की सुविधा प्रदान की जाएगी। विशेष बात यह है कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक फीस, छात्रावास, भोजन, गणवेश, लेखन सामग्री तथा अन्य आवश्यक खर्चों का पूरा वहन छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा किया जाएगा। इससे श्रमिक परिवारों को बच्चों की शिक्षा के आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण में अध्ययन का अवसर प्राप्त होगा।

प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए, इसी सोच के अनुरूप राज्य सरकार विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के कमजोर और श्रमिक वर्गों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना भी इसी दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हो रही है, जिससे श्रमिकों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिल रही है।

योजना का लाभ लेने के लिए पात्र एवं पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को श्रम विभाग के पोर्टल www.shramevjayate.cg.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया 22 जून से प्रारंभ हो चुकी है और इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की सुविधा श्रम विभाग के पोर्टल, निकटतम श्रम कार्यालय, लोक सेवा केंद्र तथा श्रमेव जयते एप के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है, जिससे अधिक से अधिक पात्र परिवार इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।

यह योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाएगी तथा शिक्षा के माध्यम से सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करेगी।

MP के लाखों छात्रों को बड़ी राहत! सस्ती हो सकती है इंजीनियरिंग की पढ़ाई, निजी कॉलेजों ने भेजा शुल्क कटौती प्रस्ताव

भोपाल
 प्रदेश के निजी कॉलेजों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई और सस्ती हो जाएगी। कई इंजीनियरिंग कॉलेजों ने शुल्क विनियामक समिति (एफआरसी) को अपने न्यूनतम शुल्क में कटौती का प्रस्ताव भेजा है। उनकी मांग है कि उनके यहां शिक्षण शुल्क 35 हजार रुपये सालाना कर दिया जाए। इसकी मंजूरी मिलती है तो यह निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के पूरे तंत्र को प्रभावित करेगा।

छात्रों की कमी से जूझ रहे संस्थान
दरअसल निजी संस्थान विद्यार्थियों की कमी से जूझ रहे हैं। पिछले एक दशक में 58 कॉलेज बंद हो चुके हैं। इस बीच केवल एक सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज खुला है। पिछले वर्षों में इन कॉलेजों की औसतन 45 से 55 प्रतिशत सीटों पर ही प्रवेश हो पाए। वहीं सरकारी कॉलेजों में 80 से 90 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं।

इस वजह से घट रही संख्या
विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योगों की जरूरतों और इंजीनियरिंग कोर्स के बीच बढ़ती दूरी, रोजगार को लेकर विद्यार्थियों की बदलती प्राथमिकताएं और नई तकनीकों के अनुरूप पाठ्यक्रम का समय पर अपडेट नहीं होना है इसका प्रमुख कारण है। प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में अधिकतर प्रवेश दूसरे राज्यों के विद्यार्थी लेते हैं।

सीटें रिक्त रहने से बढ़ रही लागत
कटौती का प्रस्ताव देने वाले कॉलेजों का तर्क है कि सीटें खाली रहने के कारण प्रति विद्यार्थी लागत बढ़ रही है। इससे संस्थान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। यदि शुल्क कम नहीं किया गया तो संचालन और मुश्किल हो जाएगा। कहा जा रहा है कि शुल्क कटौती से दूसरे प्रदेश के विद्यार्थियों के अलावा प्रदेश के कम आय वाले परिवारों के बच्चे भी आकर्षित होंगे।

दूसरे राज्यों की तुलना में पहले से कम है फीस
यहां पर यह भी बता दें कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात जैसे पड़ोसी राज्यों में इंजीनियरिंग का वार्षिक शुल्क औसतन एक से डेढ़ लाख रुपये तक है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने भी न्यूनमत शुल्क करीब 80 हजार रुपये तय किया है। इसके उलट मध्यप्रदेश में यह शुल्क 40 से 60 हजार रुपये तक है।

पांच वर्षों के दौरान यह स्थिति

वर्ष — कॉलेज — सीटें — प्रवेशित
2021-22 — 126 — 47,520 — 28,534
2022-23 — 124 — 58,535 — 31,659
2023-24 — 123 — 60,754 — 33,334
2024-25 — 142 — 73,637 — 42,924
2025-26 — 128 — 64,473 — 38,171

    उप्र, महाराष्ट्र, तमिलनाडु सहित अन्य राज्यों की तुलना में यहां इंजीनियरिंग का शुल्क कम है। इस कारण यहां पर दूसरे राज्यों के विद्यार्थी भी प्रवेश लेते हैं। कुछ कॉलेज विवि में कन्वर्ट हो रहे हैं, इसलिए वे काउंसलिंग में शामिल नहीं हो रहे हैं।

    – डा. अजीत सिंह पटेल, उपाध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ टेक्निकल प्रोफेशनल इंस्टि्टयूशंस मप्र

    पांच-छह इंजीनियरिंग कॉलेजों से शुल्क तय करने के प्रस्ताव आए हैं। समिति कालेजों का लेखा-जोखा देखकर न्यूनतम शुल्क तय करती है। इस पर विचार किया जा रहा है।

    – डॉ. अनिल शिवानी, सचिव, एफआरसी

 

श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना ने एक दिन में रिकार्ड 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का किया निस्तारण

श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना ने एक दिन में रिकार्ड 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का किया निस्तारण

भोपाल

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना दोंगलिया ने फ्लाई ऐश के उपयोग एवं पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना में गत दिवस एक ही दिन में कुल 284 बल्करों के माध्यम से लगभग 11721 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का परिवहन कर अब तक सर्वाधिक फ्लाई ऐश परिवहन करने का रिकार्ड बनाया गया। इनमें 114 बल्कर परियोजना के विद्युत गृह क्रमांक एक से और 170 बल्कर विद्युत गृह क्रमांक दो से लोड कर निस्तारित किए गए।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना द्वारा 30 मार्च 2025 को 236 बल्करों के माध्यम से 9429 मीट्रिक टन फ्लाई ऐश परिवहन का रिकॉर्ड स्थापित किया गया था। उस दौरान विद्युत गृह क्रमांक 1 से 132 बल्कर व विद्युत गृह क्रमांक 2 से 104 बल्कर लोड किए गए थे। इस नवीन उपलब्धि ने न केवल इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया, बल्कि फ्लाई ऐश प्रबंधन एवं निस्तारण के क्षेत्र में परियोजना की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को भी दर्शाया है।

 

नया बिजली कनेक्शन लेना हुआ आसान, सरल संयोजन पोर्टल से करें ऑनलाइन आवेदन

भोपाल

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिये सरल और सुविधाजनक तरीके से त्वरित नवीन बिजली कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं को सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में घर बैठे ही नवीन कनेक्शन उपलब्ध कराये जा रहे हैं।

गौरतलब है कि कंपनी द्वारा विगत जुलाई 2023 से शुरू किये गये ऑनलाइन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से अब तक भोपाल शहर एवं भोपाल ग्रामीण वृत्त में एक लाख 21 हजार 619 नए कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं, जबकि पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र में 6 लाख 11 हजार से अधिक नए कनेक्शन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से सफलतापूर्वक दिये गए हैं। इनमें 10 किलोवॉट तक के अस्थायी कनेक्शन भी शामिल हैं।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने बताया है कि कंपनी के सरल संयोजन पोर्टल पर आवेदन करते ही निर्धारित समयावधि में तत्काल नया बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। नये कनेक्शन लेने के लिये उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी के पोर्टल https://saralsanyojan.mpcz.in:8888/home अथवा UPAY ऐप पर जाकर जरूरी दस्तावेज अपलोड कर समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए निर्धारित शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। आवेदक द्वारा विधिवत ऑनलाइन आवेदन और भुगतान प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत बिजली कंपनी द्वारा सर्वे एवं अन्य औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर उपभोक्ता के परिसर में नया कनेक्शन उपलब्ध करा दिया जाएगा।

 

ईरान को 300 अरब डॉलर देने का वादा, लेकिन पैसा देगा कौन? खाड़ी दौरे पर मार्को रुबियो से उठेगा सबसे बड़ा सवाल!

वाशिंगटन/तेहरान 

मध्य पूर्व युद्ध को खत्म करने वाले समझौते की सबसे बड़ी शर्त रही- ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड की. ईरान को हुए नुकसान की भरपाई के लिए ये रकम काफी है लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि इस भारी-भरकम राशि का खर्चा कौन उठाएगा? इस्लामाबाद MoU में लिखा है कि अमेरिका अपने खाड़ी के साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का एक ठोस योजना तैयार करेगा. इस योजना को अंतिम समझौते के साथ 60 दिनों के अंदर लागू किया जाएगा। 

इसके अलावा अमेरिका सभी जरूरी लाइसेंस, छूट और अनुमतियां भी देगा ताकि पैसे के लेन-देन में कोई रुकावट न आए. इस फंड के अलावा अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होते ही ईरान पर लगी सभी प्रकार की पाबंदियां हटा ली जाएंगी और उसे तुरंत तेल बेचने की छूट मिल जाएगी. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा है कि ईरान को ये सब पाने के लिए 60 दिनों में शर्तों का पालन करना होगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स का एक भी डॉलर ईरान को नहीं जाएगा. तो फिर ईरान को इतने पैसे देगा कौन?

कौन देगा ईरान को 300 बिलियन डॉलर?
    ईरान की इस डील को लेकर एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अमेरिका इसके पैसे अपने अमीर खाड़ी देशों से वसूलेगा. आपको बता दें कि ये वही देश हैं, जहां अमेरिका के मिलिट्री बेसेज हैं और जिन पर युद्ध के दौरान ईरान ने हजारों ड्रोन और मिसाइलें दागी थीं. युद्ध के तबाह हो चुके ईरान को इस फंड की बहुत जरूरत है, लेकिन खाड़ी देश अभी तैयार नहीं दिख रहे। 

    सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने पिछले हफ्ते इस फंड पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने ये कहकर बात टाल दी कि पहले विश्वास बहाल करना होगा. ईरान के हमलों के बाद रिश्ते सुधारने की बातचीत जरूरी है, उसके बाद ही आर्थिक सहयोग और निवेश की बात हो सकती है. सऊदी अरब अपनी घरेलू परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रहा है। 

    वहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पहले ही ईरान से युद्ध क्षतिपूर्ति मांगी थी, हालांकि समझौते से पहले उसका रुख कुछ नरम हुआ था. UAE युद्ध से पहले ईरान का प्रमुख व्यापारिक साझेदार भी था, बावजूद इसके उसे ईरान के हमलों का सामना करना पड़ा। 

मार्को रुबियो देंगे इस सवाल का जवाब?
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो इन सवालों के बीच तीन दिन के खाड़ी देशों के दौरे पर आ रहे हैं, जहां वे यूएई, कुवैत और बहरीन के नेताओं से मुलाकात करने वाले हैं. उनकी इस यात्रा का मकसद ही अपने साझेदार देशों में ये विश्वास जगाना है कि तेहरान के साथ अमेरिका की डील से उनका कोई नुकसान नहीं होगा. उन्होंने इस देशों को साफ करना होगा कि 300 अरब डॉलर का इंवेस्टमेंट पैकेज आएगा कहां से और उसे कैसे इस्तेमाल किया जाएगा. अमेरिका के लिए तो ये डील है लेकिन खाड़ी देशों के सर्वाइवल का सवाल है क्योंकि तेहरान ये रकम मिलने के बाद खुद को खड़ा तो करेगा लेकिन उनकी सेना और क्षेत्रीय प्रभाव भी मजबूत होगा. कतर, बहरीन, कुवैत, यूएई और सऊदी जैसे देश खाड़ी की सुरक्षा में अहम योगदान निभाते हैं, ऐसे में ईरान का मजबूत होना उनके लिए सिरदर्द है। 

क्या-क्या आ रही हैं चुनौतियां?
    खाड़ी देशों को डर है कि पैसा ईरान के हथियारों और प्रॉक्सी समूहों पर खर्च न हो जाए. इसलिए उन्हें मजबूत गारंटी चाहिए. जब तक उन्हें ये विश्वास मिल नहीं जाता, तब तक वे शायद ही अपना कोष ईरान के लिए खोलें। 

    समझौते में ईरान के फ्रोजन असेट्स को पूरी तरह उपलब्ध कराने का वादा है. जेडी वेंस ने कहा कि कतर और जेयर्ड कुश्नर ने इसके लिए एक दिलचस्प समाधान निकाला है. अमेरिका और कतर इस प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। 

    वेंस के मुताबिक अगर पैसे छोड़े गए तो वे ईरानी लोगों को खाना खिलाने और अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाने में लगाए जाएंगे. ईरान इस पैसे से अमेरिका से सोयाबीन, मक्का और गेहूं खरीद सकेगा. हालांकि तेहरान के केंद्रीय बैंक ने इससे इनकार कर दिया है। 

समझौते की 60 दिनों का मियाद अब शुरू हो चुकी है. अगर इस दौरान अच्छी प्रगति हुई तो 300 अरब डॉलर का फंड ईरान को नया जीवन दे सकता है, लेकिन अगर विश्वास की कमी बनी रही तो यह सिर्फ कागजी वादा बनकर रह सकता है. यह फंड मध्य पूर्व में स्थायी शांति का आधार बन सकता है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों को समझौता करना होगा. फिलहाल सवाल यह है कि क्या खाड़ी देश ईरान को फिर से खड़ा करने के लिए अपना खजाना खोलेंगे?

UCC ड्राफ्ट की कमान जज रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में, जानिए किन बड़े पदों पर दे चुकी हैं सेवाएं

भोपाल 
मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है. राज्य सरकार ने UCC का मसौदा तैयार करने और इसकी व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है. सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में UCC का ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा. इसके लिए न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को जिम्मेदारी सौंपी गई है. उनकी अध्यक्षता में बनी कमेटी भोपाल पहुंच चुकी है. 22 जून से कमेटी ने काम शुरू भी कर दिया है. अब सवाल है कि न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को यूसीसी ड्राफ्ट के लिए क्यों चुना गया है. जानते हैं कौन है न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई जिनकी निगरानी में तैयारी हो रही है? वहीं, कांग्रेस यूसीसी को लेकर बीजेपी पर लगातार हमले कर रही है। 

न्यायमूर्ति रंजना की अध्यक्षता में बनी कमेटी प्रदेश की एससी, एसटी और महिला सहित सभी आयोग के पदाधिकारियों के साथ मीटिंग करेंगी. इसके अलावा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, धर्म गुरुओं के साथ चर्चा की जाएगी. छह सदस्यों वाली इस कमेटी में जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना प्रसाद देसाई के साथ रिटायर्ड IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, कानूनी विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और समाजसेवी बुधपाल सिंह शामिल हैं. सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय कटेसरिया को कमिटी का सचिव नियुक्त किया गया है। 

कौन हैं जस्टिस रंजना प्रसाद देसाई
न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई देश की सबसे अनुभवी सेवानिवृत्त न्यायाधीशों में मानी जाती हैं और कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समितियों का नेतृत्व कर चुकी हैं. उनका जन्म 30 अक्टूबर 1949 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था. उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज से बीए और साल 1973 में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज मुंबई से LLB की पढ़ाई पूरी की. उनके पिता एक मशहूर आपराधिक वकील थे। 

30 जुलाई 1973 से उन्होंने वकालत शुरू की. शुरुआत में उन्होंने न्यायमूर्ति प्रताप के सहायक के तौर पर काम किया. 1979 में वह सरकारी वकील बनी और 1 नवंबर 1995 को उन्हें मुंबई हाईकोर्ट में सरकारी वकील नियुक्त किया गया. वह 1996 में बॉम्बे हाई कोर्ट की जज बनीं और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की न्यायाधीश नियुक्त हुईं. 29 अक्टूबर 2014 को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुईं। 

रिटायरमेंट के बाद मिली जिम्मेदारियां
लोकपाल चयन समिति की सदस्य
डिलिमिटेशन कमीशन (सीमांकन आयोग) की अध्यक्ष
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की अध्यक्ष
उत्तराखंड UCC समिति की अध्यक्ष
गुजरात UCC समिति की अध्यक्ष
8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) की अध्यक्ष

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