शफीक उर रहमान की हॉलीवुड एंट्री, ‘द एम्प्टी एड्रेस’ से करेंगे ग्लोबल डेब्यू

 

शफीक उर रहमान इन दिनों काफी चर्चाओं में हैं। इसकी वजह है उनकी नई फिल्म ‘द एम्प्टी एड्रेस’, जिसकी हाल ही में आधिकारिक घोषणा की गई है। शफीक ने इस प्रोजेक्ट की जानकारी अपने सोशल मीडिया के जरिए दी, जिसके बाद एंटरटेनमेंट और फैशन इंडस्ट्री में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि यह उनका पहला इंटरनेशनल यानी हॉलीवुड प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

क्या है ‘द एम्प्टी एड्रेस’?
‘द एम्प्टी एड्रेस’ एक मल्टीलिंगुअल फिल्म होगी, जिसे अंग्रेजी, हिंदी और तेलुगु में बनाया जाएगा। इस फिल्म को सागर जोशी डायरेक्ट कर रहे हैं और इसे ‘द स्टार लाइफ हैदराबाद’ बैनर के तहत प्रोड्यूस किया जा रहा है।

फिल्म की शूटिंग भारत और यूएई में होगी। हालांकि अभी तक फिल्म की कास्ट और पूरी कहानी सामने नहीं आई है, लेकिन जल्द ही और जानकारी आने की उम्मीद है।

कौन हैं शफीक उर रहमान?
शफीक उर रहमान का जन्म 25 जनवरी 1985 को हैदराबाद में हुआ था। वह एक प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं। उनके पिता खलील उर रहमान राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं और उन्होंने सिविल एविएशन और एनर्जी मंत्रालय की एग्जीक्यूटिव कमेटी में भी काम किया है।

उनकी मां फर्रुख जमाल हैदराबाद के एक सम्मानित जागीरदार परिवार से हैं। वहीं उनकी पत्नी साहेबजादी महीन निकहत हैदराबाद के शाही निजाम परिवार से ताल्लुक रखती हैं।

फैशन और लाइफस्टाइल में बड़ा नाम
शफीक ने फैशन और लाइफस्टाइल की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। ‘द स्टार लाइफ हैदराबाद’ के जरिए वह भारत और विदेशों में 200 से ज्यादा बड़े फैशन और लाइफस्टाइल इवेंट्स आयोजित कर चुके हैं।

उन्होंने कई भारतीय डिजाइनर्स और नए टैलेंट को इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। फरवरी 2022 में उन्हें फैशन टीवी (FTV) का सिटी पार्टनर भी बनाया गया था, जिससे उनकी इंटरनेशनल पहचान और मजबूत हुई।

अवार्ड्स और काम
शफीक को उनके काम के लिए इंटरनेशनल ग्लोरी अवॉर्ड (IGA), ग्लोबल आइकन अवॉर्ड और मैन ऑफ द पीपल अवॉर्ड जैसे सम्मान मिल चुके हैं।

अब ‘द एम्प्टी एड्रेस’ के साथ शफीक उर रहमान इंटरनेशनल सिनेमा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इंडस्ट्री के लोगों का मानना है कि यह उनके करियर का बड़ा और नया कदम है, जो उन्हें ग्लोबल लेवल पर पहचान दिला सकता है।

 

रिटायरमेंट पर बोले अक्षय कुमार, ‘36 साल से यही सोच रहा हूं’

‘वेलकम’ फ्रैंचाइजी का एक नया चैप्टर शुरू होने वाला है. अहमद खान के डायरेक्शन में बनी ‘वेलकम टू द जंगल’ का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज हो चुका है. इसी दौरान अक्षय कुमार ने अपनी रिटायरमेंट पर बड़ी बात कह दी.

अपने रिटायरमेंट पर क्या बोले अक्षय कुमार
अक्षय कुमार बॉलीवुड इंडस्ट्री में लगभग 36 सालों से काम कर रहे हैं. ट्रेलर लॉन्च के दौरान एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें रिटायरमेंट का कभी ख्याल आता है. इसपर खिलाड़ी कुमार ने जवाब दिया, “बेटा, ऐसा होता है ना कि सुबह 4 बजे ख्याल आता है, लेकिन 5 सेकंड के अंदर ही मुझे याद आ जाता है कि मुझे फिल्म की शूटिंग के लिए जाना है. फिर मुझे यह भी याद आता है कि सेट पर 300 लोग मेरा इंतजार कर रहे हैं. तब मैं तय करता हूं कि रिटायरमेंट के बारे में अगली सुबह सोचूंगा. फिर सुबह 4 बजे उठता हूं और यही प्रोसेस रिपीट करता है. ऐसा करते करते 36 साल हो गए.”

रिटायर होकर ये नहीं करना चाहते हैं अक्षय कुमार
उन्होंने आगे कहा, “अगर मैं रिटायर हो जाऊं, तो मुझे घर पर बैठे इलेक्ट्रीशियन का काम मिल जाएगा. मैं कुत्तों को घुमाने वाला या माली बन जाऊंगा. घर के सारे काम काज मुझे मिलेंगे. मैं रिटायर होने के बजाय काम पर जाना पसंद करूंगा.”

मरने से 5 सेकंड पहले रिटायर होना चाहते हैं अक्षय कुमार
अक्षय कुमार ने आगे कहा, “काम करते रहना ही बेहतर है. मुझे ‘रिटायर’ शब्द से थोड़ी दिक्कत है. इंसान को अपनी मौत से बस 5 सेकंड पहले रिटायर होना चाहिए. मरने से पहले इंसान को कहना चाहिए, ‘भाई, अब मैं रिटायर हो रहा हूं.’ यह ज्यादा बेहतर होगा. कभी भी रिटायरमेंट न चुनें. अगर आप लंबी जिंदगी चाहते हैं, तो काम करते रहें.” ‘वेलकम टू द जंगल’ 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

दुर्ग नगर निगम का एक्शन, बिजली खंभों और सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध होर्डिंग्स लगाने वालों को नोटिस

दुर्ग.

आयुक्त सुमित अग्रवाल के निर्देश पर बाजार । विभाग द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर बिजली के खंभों, पेड़ों तथा सार्वजनिक संपत्तियों पर बिना अनुमति होर्डिंग एवं प्रचार सामग्री लगाकर विज्ञापन किए जाने के मामले सामने आए।

निरीक्षण में पाया गया कि विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के खंभों एवं पोलों पर डॉ. सुशांत कुमार ( मस्तिष्क एवं नस रोग विशेषज्ञ) तथा डॉ. प्रशांत कुमार (मस्तिष्क एवं नस रोग विशेषज्ञ) के होर्डिंग बोर्ड लगाकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इसके अलावा शहर के उद्यानों की दीवारों पर भी प्रचार सामग्री चस्पा कर सार्वजनिक संपत्तियों का उपयोग विज्ञापन के लिए किया जा रहा था।

जांच के दौरान पेड़ों पर विद्यापीठ, भिलाई द्वारा एडमिशन ओपन संबंधी होर्डिंग तथा बिजली के खंभों पर वेदांतु के नीट एवं आईआईटी जेईई कोचिंग संबंधी विज्ञापन भी लगाए पाए गए। निगम अधिकारियों ने इसे नगर निगम के नियमों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित संस्थानों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। मौका निरीक्षण के उपरांत बाजार विभाग द्वारा अवैध रूप से होर्डिंग एवं प्रचार सामग्री लगाने वाले पांच संबंधित व्यक्तियों / संस्थानों को पचास हजार रुपये का जुर्माना राशि हेतु नोटिस जारी किया गया है।

नारायणपुर का मॉडल बना मिसाल, किसानों के खेतों में फलदार क्रांति

नारायणपुर का मॉडल बना मिसाल, किसानों के खेतों में फलदार क्रांति

बासीन ग्राम में मनरेगा का असर: 99% पौधे जीवित, किसानों के लिए नई उम्मीद

रायपुर, 
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नारायणपुर जिले के ओरछा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंदला के आश्रित ग्राम बासीन में किसानों की आय बढ़ाने और हरित विकास को बढ़ावा देने की एक उल्लेखनीय पहल सामने आई है। यहां किसानों के खेतों में लगाए गए फलदार वृक्षों में लगभग 99 प्रतिशत पौधे जीवित एवं स्वस्थ पाए गए हैं, जो योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सफल उदाहरण बनकर उभरा है।

किसानों के दीर्घकालिक लाभ, पर्यावरण संरक्षण के लिए लगाए फलदार वृक्ष
        मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत नर्सरी में उद्यान विभाग द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड आम के पौधे तैयार किए गए और वित्तीय वर्ष 2025-26 में चयनित किसानों के खेतों में उनका रोपण कराया गया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ उपलब्ध कराना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार वृक्षों का विस्तार करना है।

पौधों के संरक्षण-संवर्धन के लिए रखरखाव व्यवस्था की गई सुनिश्चित
       योजना के तहत केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक वर्ष तक रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। साथ ही उद्यान विभाग द्वारा किसानों को सामूहिक फेंसिंग (बाड़बंदी) का लाभ दिया गया, जिससे पौधों को नुकसान से बचाया जा सका। किसानों ने भी सिंचाई और देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाई। 

किसानों की भागीदारी, विभागीय समन्वय से हुई 99 प्रतिशत जीवितता दर
       हाल ही में किए गए क्षेत्रीय निरीक्षण में लगाए गए पौधों की 99 प्रतिशत जीवितता दर दर्ज की गई, जो किसानों की भागीदारी, विभागीय समन्वय और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का परिणाम माना जा रहा है। इस पहल से आने वाले वर्षों में किसानों को आम उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, वहीं क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। ग्राम बासीन का यह मॉडल अब अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

        “रोजगार के साथ हरियाली और आय वृद्धि” की अवधारणा को साकार करती यह पहल ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है।

छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना का किया अध्ययन

छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना का किया अध्ययन

भोपाल 
“मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना” के क्रियान्वयन संबंधी जानकारी लेने और इसमें विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिये छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के अधिकारियों का एक दल मध्यप्रदेश भ्रमण पर है। इस दल ने गुरूवार को खाद्य संचालनालय में अधिकारियों से योजना की कार्य प्रणाली, परिवहन व्यवस्था, आईटी आधरित मॉनीटरिंग प्रणाली, संबंधित विभागों के बीच समन्वय, हित धारकों की भूमिका तथा खाद्यान वितरण व्यवस्था में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी ली।

अपर संचालक खाद्य एचएस परमार एवं अन्य अधिकारियों ने योजना के क्रियान्वयन के संबंध में पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया। छत्तीसगढ़ के दल में सहायक महाप्रबंधक आईटी एवं उपार्जन महेन्द्र साहू, उप सहायक महाप्रबंधक परिवहन मनोज वर्मा, उप सहायक महाप्रबंधक सार्वजनिक वितरण प्रणाली त्रिनाधा रेड्डी, वरिष्ठ सलाहकार सुशील तिवारी और सलाहकार संदीप हलदर शामिल हैं।

9954-मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना

लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत प्रदाय केन्द्र से उचित मूल्य’ दुकानों तक राशन सामग्री के परिवहन का कार्य परिवहनकर्ता ठेकेदार के स्थान पर बेरोजगार युवकों के माध्यम से कराकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिये मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना नवाचार के रूप में लागू की गई है। इसमें लगभग 900 परिवहन कर्ता हैं। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजनांतर्गत ऋण स्वीकृति से 7.5 मीट्रिक टन क्षमता के वाहन उपलब्ध कराएँ गए हैं। वाहनों के लिये राज्य सरकार द्वारा 1.25 लाख रूपये प्रति वाहन मार्जिन मनी और 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाता है। वाहनों से प्रतिमाह लगभग 3,000 क्विंटल राशन सामग्री का परिवहन किया जा रहा है। योजना में बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ सामग्री का परिवहन भी त्वरित गति से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के वाहनों में जीपीएस के माध्यम से स्टेट लेवल कमांड कंट्रोल सेंटर से मॉनीटरिंग की जाती है।

 

त्विषा मौत मामला: जेल में ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ती मिलीं गिरिबाला सिंह, महिला आयोग ने की मुलाकात

भोपाल 
त्विषा शर्मा मौत मामले में न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल में बंद रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह से बुधवार को मध्यप्रदेश महिला आयोग की टीम ने मुलाकात की। आयोग की टीम महिला कैदियों और बंदियों की स्थिति का जायजा लेने जेल पहुंची थी। आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने गिरिबाला सिंह से जेल में भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। इस दौरान गिरिबाला सिंह ने किसी भी प्रकार की परेशानी से इनकार करते हुए कहा कि जेल में सभी व्यवस्थाएं ठीक हैं और उन्हें कोई शिकायत नहीं है। जानकारी के अनुसार, आयोग की टीम जब उनके पास पहुंची, तब वे लेखक देवदत्त पटनायक की पुस्तक ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पढ़ रही थीं। टीम को देखते ही उन्होंने किताब बंद कर दी। बातचीत के दौरान वे काफी शांत नजर आईं। निरीक्षण के दौरान महिला आयोग की टीम को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि गिरिबाला सिंह को जेल में किसी प्रकार की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हो।  

क्या है ‘द प्रेग्नेंट किंग’ की कहानी
देवदत्त पटनायक का उपन्यास ‘द प्रेग्नेंट किंग’ पौराणिक कथा से प्रेरित है। कथा के अनुसार राजा युवनाश्व संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ कराते हैं। यज्ञ के बाद रानियों के लिए तैयार किया गया मंत्रयुक्त पेय वे स्वयं पी लेते हैं, जिसके बाद वे गर्भवती हो जाते हैं। बाद में उनके शरीर से पुत्र मांधाता का जन्म होता है। इसी कथा को आधार बनाकर यह उपन्यास लिखा गया है। 

लीगल एड के वकीलों ने पेश किया वकालतनामा
त्विषा शर्मा मामले में गिरिबाला सिंह की ओर से चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने जिला अदालत में वकालतनामा प्रस्तुत किया है। दोनों वकील विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े हैं। इस कारण अदालत ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से पूछा है कि उन्हें मामले में पैरवी की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। कोर्ट ने इस संबंध में आवश्यक अनुमति और दिशा-निर्देश मांगे हैं। 

दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच तेज
त्विषा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीबीआई को मिल गई है। जांच एजेंसी अब मेडिकल, डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर रही है। जांच का फोकस गर्भावस्था, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी के फंदे से जुड़े तथ्यों पर है। इसके अलावा मोबाइल और लैपटॉप से रिकवर किए गए चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और अन्य डिलीट किए गए डेटा का भी विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि मामले की सभी कड़ियों को जोड़ा जा सके। 

CBI जुटा रही मेडिकल और डिजिटल सबूत
ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच कर रही सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिल गई है। एजेंसी अब मेडिकल, डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों का मिलान कर रही है। जांच में प्रेग्नेंसी, अबॉर्शन, शरीर पर मिले चोटों के निशान और फांसी के फंदे से जुड़े तथ्यों पर फोकस किया जा रहा है।

वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से जिला कोर्ट में लीगल एड डिफेंस काउंसिल की रीना वर्मा और श्रेयस सक्सेना ने वकालतनामा पेश किया। दोनों वकील विधिक सेवा प्राधिकरण (लीगल सर्विस अथॉरिटी) से जुड़े हैं, इसलिए कोर्ट ने प्राधिकरण से अनुमति मांगी है।

सीबीआई मोबाइल, लैपटॉप से मिले चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो और डिलीट डेटा की भी जांच कर रही है, ताकि मामले की पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके।

मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों की जांच कर रही सीबीआई
एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा डेथ केस की जांच कर रही सीबीआई मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और अन्य तथ्यों को जोड़कर जांच कर रही है। गिरिबाला सिंह की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट में पेश दस्तावेज में सामने आया है कि जांच से जुड़े तथ्य पहले ही उनके पास पहुंच रहे थे।

ट्विशा के परिजन के वकील अंकुर पांडे का कहना है कि इसी के चलते गिरिबाला अग्रिम जमानत लेने में सफल हो गईं। मामले की प्रारंभिक जांच और रस्सी जब्त करने वाले एसआई दिनेश शर्मा से दोबारा पूछताछ की जाएगी।

शर्मा ने ही घटना के बाद सबसे पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया और क्राइम सीन तैयार किया था। घटनास्थल की तस्वीरों में कमरे में दो अलग-अलग रिंग पर दो बेल्ट लटकी नजर आ रही थीं, लेकिन पुलिस ने 13 मई को केवल एक बेल्ट जब्त की।

महिला बंदियों ने प्रस्तुत किए भजन
महिला आयोग की टीम ने जेल के महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर का निरीक्षण किया। इस दौरान बंदियों से उनकी समस्याओं और जरूरतों के बारे में भी जानकारी ली गई। जेल के सांस्कृतिक कक्ष में महिला बंदियों के ऑर्केस्ट्रा दल ने भजन प्रस्तुत किए। निरीक्षण के दौरान आयोग के सचिव सुरेश तोमर, जेल अधीक्षक राकेश भांगरे सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। 

एसआई ने रस्सी जब्त की और कार में रख ली
वकील अंकुर पांडे ने कहा– कटारा हिल्स थाने के एसआई दिनेश शर्मा 13 मई 2026 को सुबह करीब 9:42 बजे ट्विशा के घर पहुंचे। उन्होंने गिरिबाला और समर्थ के सामने रस्सी जब्त की, लेकिन दस्तावेज में किसी को चश्मदीद नहीं बनाया।

उन्होंने रस्सी अपनी कार में रख ली, जबकि ये तत्काल एम्स के डॉक्टरों को देना था। 13 मई को पीएम कराने भी दिनेश शर्मा ही एम्स पहुंचे थे। ट्विशा के परिजन ने इस पर 14 मई को हंगामा कर दिया। इसके बाद एसआई ने 15 मई को ये रस्सी डॉक्टरों को दी।

वकील कहते हैं, ऐसे सबूत जुटाते समय गवाह बनाना कानूनी रूप से जरूरी है। पुलिस को शुरुआत में ही गिरिबाला और पति समर्थ को संदिग्ध के रूप में चिह्नित करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया। इतनी बड़ी चूक के बावजूद जिम्मेदार उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी थी। एक जून को गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की टीम गिरिबाला और समर्थ सिंह को लेकर उनके घर पहुंची थी।

रस्सी की पहचान करने वाले व्यक्ति का नाम दर्ज नहीं
वकील का दावा है कि प्रारंभिक जांच करने वाले एसआई दिनेश शर्मा की भूमिका संदिग्ध है। अग्रिम जमानत के लिए दिए गए आवेदन में जब्ती से जुड़े दस्तावेज में हुई गलतियों का जिक्र था। इसी आधार पर जमानत मांगी गई। इससे संकेत मिलता है कि केस डायरी से जुड़ी अहम जानकारी गिरिबाला सिंह तक पहुंच रही थी।

अंकुर ने बताया कि ट्विशा के परिजन शुरू से ही पुलिस की मंशा पर सवाल उठा रहे थे। उनका आरोप था कि पुलिस जानबूझकर गंभीर त्रुटियां कर रही है, जिससे केस कमजोर हो सकता है। एम्स में परीक्षण के बाद 16 मई को रस्सी को एफएसएल जांच के लिए भेजा गया।

फिलहाल सीबीआई केवल ट्विशा की मौत की जांच कर रही है। 29 मई को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को भोपाल की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था।

दो बेल्ट थे, पुलिस ने एक की जब्ती की
ट्विशा मामले में घटनास्थल की तस्वीरों में कमरे में दो अलग-अलग रिंग पर दो बेल्ट लटकी नजर आ रही थीं, लेकिन पुलिस ने 13 मई को केवल एक बेल्ट जब्त की। जब्ती पंचनामा में यह स्पष्ट नहीं है कि बेल्ट किसकी निशानदेही पर मिली। इसके बावजूद पुलिस ने उसी बेल्ट को मौत में इस्तेमाल मानकर जांच में शामिल किया और एम्स भोपाल भेजा।

केस डायरी के दस्तावेज आरोपियों तक पहुंचने के आरोप
अग्रिम जमानत खारिज कराने लगाई गई याचिका के जवाब में गिरिबाला की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया है कि रस्सी से संबंधित जब्ती दस्तावेज केस डायरी का हिस्सा था। उस समय समर्थ और गिरिबाला आरोपी नहीं थे, इसलिए कानूनी रूप से उन्हें उस दस्तावेज तक पहुंच का अधिकार नहीं था।

यह अधिकार सिर्फ पुलिस को रहता है। इसके बावजूद अग्रिम जमानत याचिका के जवाब के साथ यह दस्तावेज दाखिल किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।

ट्विशा के परिजन के वकील का आरोप है कि इससे जांच से जुड़े दस्तावेज आरोपियों तक पहले ही पहुंच रहे थे। हालांकि, इस संबंध में जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

नटराजन के नामांकन रद्द होने पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई, दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक आज

भोपाल 

सुप्रीम कोर्ट कल कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने अपने राज्यसभा नामांकन पत्रों को खारिज किए जाने को चुनौती दी है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति पीके मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए इसे अत्यंत तत्काल सुनवाई योग्य मामला बताया और शीघ्र सुनवाई या अंतरिम आदेश की मांग की। अदालत ने उनकी दलीलों पर संज्ञान लेते हुए मामले को कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

सिंघवी ने दलील दी कि रिटर्निंग ऑफिसर ने यह कहते हुए नामांकन खारिज किया कि नटराजन ने लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी, जबकि वास्तव में केवल समन जारी हुआ था और मामले में अभी तक संज्ञान भी नहीं लिया गया था। उन्होंने कहा कि यहां तक कि संज्ञान भी नहीं लिया गया था, फिर भी नामांकन खारिज कर दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि रिटर्निंग ऑफिसर का निर्णय अवैध, मनमाना और पक्षपातपूर्ण है। साथ ही नामांकन खारिज करने के आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है।

याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश होते हुए आरोप लगाया कि उनका नामांकन गलत कानूनी आधार पर संक्षेप में खारिज किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई, लेकिन साथ ही कहा कि वास्तविक कानूनी उपाय चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव याचिका (इलेक्शन पिटीशन) दायर करना है। 

मीनाक्षी नटराजन को चुनाव आयोग पर भरोसा
पूरे मामले पर मीनाक्षी नटराजन का भी बयान सामने आया था। चुनाव आयोग के दफ्तर से बाहर आकर मीडिया से उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने हमारी बात सुनी है और सिंघवी जी ने पूरे मामले को विस्तार से उनके समक्ष रखा है। हमें संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा भरोसा है। हम अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे।

चुनाव आयोग के फैसले का इंतजार
जो जानकारी सामने आ रही है, इसके मुताबिक कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को करीब 35 मिनट तक चुनाव आयुक्त से  बातचीत की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, मीनाक्षी नटराजन, भूपेश बघेल, अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बाहर आकर प्रेस को ब्रीफ किया था। उसमें सिंघवी ने बताया था कि चुनाव आयोग तक हमने हमारी बात पहुंचा दी है। उन्होंने हमारी बात पर विचार कर फैसला लेने का कहा है। हालांकि ये फैसला कब आएगा, इसका कहीं जिक्र नहीं है। बुधवार रात तक कोई फैसला नहीं आया। अब संभावना जताई जा रही है कि कुछ देर में चुनाव आयोग मामले में अपना फैसला सुना सकता है। 

न्याय में इतनी देरी क्यों : सिंघार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उनका कहना था कि चुनाव आयोग चाहता तो इस मामले में बुधवार को ही फैसला दे सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में भाजपा उम्मीदवार के मामले में चुनाव आयोग ने निर्णय लिया था, लेकिन इस प्रकरण में आयोग ने कोई विचार नहीं किया। सिंघार ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों की अनदेखी की है।

उन्होंने कहा, “हमने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई और निर्णय की मांग की थी। अदालत ने कल का समय दिया है, लेकिन न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? कई मामलों में रातभर सुनवाई होती रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा की कठपुतली की तरह काम कर रहा है और संवैधानिक संस्थाओं का उपयोग रबर स्टांप की तरह किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने विश्वास जताया कि सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को न्यायपूर्ण फैसला देगा।

तीनों राज्यसभा सीटें जीत सकती है भाजपा
दरअसल, मामले पर चुनाव आयोग की चुप्पी ने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के अनुसार, आयोग इस मामले में कानूनी राय लेने के बाद फैसला करेगा। यदि तब तक आयोग कांग्रेस के पक्ष में कोई फैसला नहीं करता या खामोश ही रहता है तो भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्वाचन तय हो जाएगा।

बाकी दो सीटों पर भाजपा उम्मीदवार तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल का निर्वाचन निर्विरोध तय है। ऐसे में प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटें भाजपा बिना लड़े जीत जाएगी।

सिंघार बोले- न्याय में देरी क्यों?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। चुनाव आयुक्त चाहते तो कल इस बारे में निर्णय दे सकते थे। खारिज करना या स्वीकार करना, यह विशेष अधिकार चुनाव आयोग को है। हरियाणा में चुनाव आयोग ने हस्तक्षेप किया था, गुजरात में हस्तक्षेप किया था तो एमपी में क्यों नहीं किया?

सिंघार ने भोपाल में मीडिया से कहा- झारखंड में बीजेपी कैंडिडेट को आप (चुनाव आयोग) वैलिड कर सकते हैं तो मीनाक्षी नटराजन के मामले में फैसला क्यों नहीं लिया? इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग भाजपा के रबर स्टैंप के रूप में काम कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर चुनाव आयोग ने कोई विचार नहीं किया। उनके रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्ट रूप से नियमों की धज्जियां उड़ाईं।

सुप्रीम कोर्ट ने कल का समय दिया है। मैं समझता हूं कि इसमें न्याय होगा लेकिन न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? सुप्रीम कोर्ट इस पर निर्णय आज करता तो बेहतर होता क्योंकि आज नामांकन वापसी की लास्ट डेट है।

अदालत के निर्णय के बाद ही करें कार्यवाही
वहीं, पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा विधानसभा पहुंचे और अपने समर्थकों के साथ विधानसभा गेट पर नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा की निर्वाचन शाखा भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। शर्मा ने कहा कि ऐसी जानकारी मिल रही है कि दोपहर एक से तीन बजे के बीच भाजपा के तीनों राज्यसभा उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर प्रमाणपत्र दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “हमने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए विधानसभा की निर्वाचन शाखा को अदालत के निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।” 

कांग्रेस की बैठक में होगी चर्चा
गुरुवार को दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक भी आयोजित की गई है। पार्टी ने अपने सभी महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों को दिल्ली तलब किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में ये बैठक होगी। बताया जा रहा है कि मीनाक्षी नटराजन का मामले पर भी इस बैठक में चर्चा हो सकती है। इधर कांग्रेस आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात कर सकती है।  

अब आगे क्या हो सकता है…
1. आयोग नामांकन बहाल करता है तो चुनाव फिर मुकाबले में बदल जाएगा

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत के अनुसार, यदि चुनाव आयोग यह मानता है कि रिटर्निंग ऑफिसर से त्रुटि हुई है तो वह स्पष्ट आदेश जारी कर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन वैध घोषित कर सकता है। ऐसे में फिर से वोटिंग होगी।

2. आयोग राहत नहीं देता तो भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन होगा

यदि आयोग हस्तक्षेप नहीं करता या रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को बरकरार रखता है, तो कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव से बाहर मानी जाएंगी। ऐसे में भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध जीतेंगे।

3. राष्ट्रपति के पास जाने से कांग्रेस को क्या मिलेगा?

राष्ट्रपति से मिलकर कांग्रेस गलत तरीके से नामांकन निरस्त करने का मुद्दा उठा सकती है। राष्ट्रपति मामले का संज्ञान लेकर चुनाव आयोग या संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से जानकारी मांग सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति सीधे चुनाव आयोग, रिटर्निंग ऑफिसर या चुनाव प्रक्रिया के किसी फैसले को रद्द नहीं कर सकते। इस मुलाकात का महत्व संवैधानिक और राजनीतिक संदेश के रूप में अधिक माना जा रहा है।

कोर्ट में मामला लंबित होने की शिकायत हुई थी
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र 9 जून को स्क्रूटनी के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने खारिज कर दिया था। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट और पार्टी नेताओं ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी ने अपने चुनावी हलफनामे (फॉर्म 26) में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित एक कानूनी मामले की जानकारी छिपाई है।

कांग्रेस की दलील- यह केस नहीं, सिर्फ नोटिस है
चुनाव आयोग के सामने कांग्रेस की ओर से सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज ही नहीं है। सिंघवी के मुताबिक, तेलंगाना में एक निजी शिकायत के आधार पर अदालत ने केवल एक कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि संज्ञान क्यों न लिया जाए?

कांग्रेस का कहना है कि जब तक अदालत किसी मामले में संज्ञान लेकर आरोप तय नहीं करती, तब तक उसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसलिए इसे हलफनामे में लिखना अनिवार्य नहीं था। कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गैर-कानूनी और सीटों की चोरी करार दिया है।

ममता का ‘खेला’ खत्म? कल्याण बनर्जी ने दिया अल्टीमेटम, अभिषेक बनर्जी के केस से खुद को किया अलग

कोलकाता

पश्चिम बंगाल की सत्ता का 15 साल तक सिरमौर रहीं ममता बनर्जी और उनकी अगुवाई वाली पार्टी तृणमूल कांग्रेस मुश्किल में हैं. एक के बाद एक नेता टीएमसी से किनारा कर रहे हैं. 60 से ज्यादा विधायक बागी हो गए हैं. दिल्ली में लोकसभा सदस्यों ने भी पार्टी में बगावत का बिगुल फूंक दिया है. वहीं, ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका अब कल्याण बनर्जी का ताजा रुख है। 

ममता बनर्जी ने जिन कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप बनाने के लिए 40 साल पुरानी सहयोगी काकोली घोष को पद से हटा दिया, अब वही कल्याण बनर्जी भी बगावत का झंडा बुलंद करते दिख रहे हैं. कल्याण बनर्जी ने टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को यह अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो वह अभिषेक को चुन लें, या फिर मेरे जैसे वफादारों को। 

कल्याण बनर्जी ने कहा है कि ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी को हटाएं. नहीं तो हम पार्टी में नहीं रह सकते. उन्होंने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ फर्जी हस्ताक्षर केस से भी खुद को अलग करने का ऐलान किया और कहा कि अभिषेक बनर्जी ने कभी भी मुझपर भरोसा नहीं किया और आगे भी नहीं करेंगे. कल्याण बनर्जी ने कहा कि हम कल अभिषेक के केस के लिए तैयारी कर रहे थे और आधी रात मुझे बताया गया कि वकील बदल दिया गया है। 

उन्होंने कहा कि यह बहुत ही अपमानजनक है. अभिषेक बनर्जी को वरिष्ठों का सम्मान करना नहीं आता. कल्याण बनर्जी ने अभिषेक को घमंडी व्यक्ति बताया और तल्ख लहजे में कहा कि वह हैं कौन? अभिषेक बनर्जी की वजह से पार्टी को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि मैं ममता बनर्जी के साथ हूं. लेकिन दीदी को अब फैसला करना होगा कि उनको पार्टी और वफादार नेता चाहिए या बच्चा और परिवार। 

कल्याण का बागी रुख ताबूत में आखिरी कील?
कल्याण बनर्जी की गिनती ममता बनर्जी के विश्वस्त नेताओं में होती है. पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद कल्याण बनर्जी कई अहम मामलों में कोर्ट के भीतर भी टीएमसी से जुड़े मामलों की पैरवी करते नजर आए हैं. फर्जी हस्ताक्षर से संबंधित जिस केस में अभिषेक बनर्जी भी आरोपी हैं, उस मामले में भी कल्याण बनर्जी ही वकील थे. कल्याण बनर्जी के बागी रुख को टीएमसी के ताबूत में आखिरी कील की तरह देखा जा रहा है। 

बिछड़ रहे सब बारी-बारी
ममता बनर्जी और उनकी पार्टी से सांसद-विधायक और नेता बारी-बारी बिछड़ रहे हैं. कल्याण बनर्जी के बागी रुख अख्तियार करने से कुछ घंटे पहले ही ममता बनर्जी को दो बड़े झटके लगे. पहले प्रकाश चिक बराइक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. वहीं, कल तक ममता बनर्जी के साथ खड़े नजर आए प्रसून बनर्जी भी बागी काकोली गुट के साथ हो लिए. काकोली गुट को लोकसभा में अलग गुट के तौर पर मान्यता देने की मांग वाले पत्र पर प्रसून बनर्जी ने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। 

 

खैरागढ़ में उज्ज्वला योजना में गड़बड़ी, गैस एजेंसी के खिलाफ मामला दर्ज

खैरागढ़.

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों को गैस वितरण में कथित अनियमितताओं के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बाजार आतरिया क्षेत्र स्थित साल्हेकला इंडियन ग्रामीण वितरक के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

साथ ही एजेंसी के विरुद्ध आगे की कार्रवाई के लिए राज्य स्तरीय समन्वयक, तेल उद्योग को भी पत्र भेजा गया है। मामला उस समय सामने आया जब क्षेत्र के अनेक ग्रामीणों ने शिकायत की कि गैस एजेंसी के कर्मचारी उपभोक्ताओं के मोबाइल पर आए ओटीपी की जानकारी लेकर सिस्टम में सिलेंडर कई की डिलीवरी दर्ज कर देते हैं जबकि मामलों में सिलेंडर वास्तविक रूप से उपभोक्ताओं तक पहुंचता ही नहीं है। इसके बावजूद रिकॉर्ड में वितरण दर्शाया जाता है और सब्सिडी की प्रक्रिया पूर्ण भी पूरी हो जाती है।
लगातार मिल रही शिकायतों और मीडिया में मामले के उजागर होने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर जांच कराई गई।

जांच में एजेंसी द्वारा द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) प्रदाय एवं वितरण विनियमन आदेश, 2000 के प्रावधानों के उल्लंघन की पुष्टि हुई। इसके आधार पर प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि रिकॉर्ड में डिलीवर दिखाए गए कई सिलेंडर वास्तविक हितग्राहियों तक नहीं पहुंचे। इससे वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायतों में घरेलू गैस के संभावित व्यावसायिक उपयोग और कालाबाजारी की आशंका भी जताई गई है।

बता दे कि साल्हेकला एजेंसी से खैरागढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में उपभोक्ता जुड़े हुए हैं ऐसे में मामले का प्रभाव व्यापक माना जा रहा है। प्रशासन अब यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि कथित अनियमितताएं कब से चल रही थीं और कितने उपभोक्ता प्रभावित हुए। प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट संकेत मिला है कि उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों द्वारा की गई शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। अब लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है और प्रभावित उपभोक्ताओं को किस प्रकार राहत प्रदान की जाती है।

सरकारी जमीन पर बन रहा था रिसॉर्ट! शिकायत मिलते ही प्रशासन ने लगाई रोक

धमतरी.

धमतरी जिले के ग्राम बरारी में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर रिसॉर्ट का निर्माण करने का मामला सामने आया है. शिकायत के बाद कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य रुकवा दिया है. दरअसल, ग्राम बरारी में करीब 70 डिसमिल शासकीय भूमि पर लगे पेड़ों की कटाई कर रिसॉर्ट निर्माण की तैयारी की जा रही थी.

शिकायत मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया और कलेक्टर के निर्देश पर तत्काल काम रोक दिया गया. आरोपों के घेरे में आए बरारी निवासी खूबलाल ध्रुव का कहना है कि वह पिछले करीब 40 वर्षों से इस भूमि पर काबिज है, और डुबान प्रभावित होने के कारण यहां निवास कर रहा है. उसका कहना है कि कुछ लोगों की शिकायत के चलते यह मामला सामने आया है. इसके साथ ही उसने कहा कि प्रशासन जो भी वैधानिक कार्रवाई करेगा, वह स्वीकार्य होगा.

हालांकि, इस पूरे मामले में सवाल यह उठ रहा है कि यदि जमीन शासकीय है तो उस पर निर्माण कार्य किस आधार पर किया जा रहा था. यही नहीं पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं. फिलहाल, निर्माण कार्य रोक दिया गया है, और प्रशासन जांच में जुटा हुआ है.

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