निर्माण कार्य पूर्ण होते ही शीघ्र प्रारंभ हों स्वास्थ्य सेवाएं : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

निर्माण कार्य पूर्ण होते ही शीघ्र प्रारंभ हों स्वास्थ्य सेवाएं : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

स्वास्थ्य अधोसंरचना परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश

भोपाल 

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य अधोसंरचना विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं में पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति की आवश्यकता है, उनके प्रस्ताव शीघ्र सक्षम स्तर पर भेजे जाएं। साथ ही जिन संस्थानों में निर्माण कार्य पूर्णता के निकट हैं, वहां मैनपावर, आवश्यक उपकरण एवं फर्नीचर की उपलब्धता प्राथमिकता से सुनिश्चित की जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं शीघ्र प्रारंभ की जा सकें।

स्वास्थ्य अधोसंरचना कार्यों में निरंतर प्रगति

बैठक में बताया गया कि 1 अप्रैल 2025 की स्थिति में विभिन्न योजनाओं अंतर्गत कुल 2841 कार्य स्वीकृत हैं, जिनमें से वर्ष 2025-26 में 1553 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं तथा 1178 कार्य वर्तमान में प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 61 कार्य निविदा स्तर पर हैं। विभिन्न योजनाओं के तहत लगभग 2267 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है, जिसके विरुद्ध लगभग 1315 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सभी कार्यों को गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ पूर्ण करने तथा लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

निर्माण एजेंसी के कार्यों पर विशेष जोर

कुल 1282 स्वीकृत कार्य में से 1177 कार्य प्रगतिरत हैं, 81 कार्य निविदा स्तर पर हैं। इन परियोजनाओं हेतु लगभग 1372 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है, जिसके विरुद्ध अब तक लगभग 546 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक लगभग 34 करोड़ रुपये का व्यय हुआ है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

15वें वित्त आयोग अंतर्गत कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति

15वें वित्त आयोग अंतर्गत स्वास्थ्य अधोसंरचना परियोजनाओं के तहत कुल 1940 इकाइयों हेतु लगभग 1361 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है। इसके विरुद्ध लगभग 1150 करोड़ रुपये के अनुबंध संपादित किए जा चुके हैं और अब तक लगभग 877 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। कुल वित्तीय प्रगति 76 प्रतिशत दर्ज की गई है। भवनविहीन उप स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। कुल 963 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 945 कार्य प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 23 कार्य निविदा स्तर पर हैं।

पीएम-अभिम योजना में 86 प्रतिशत से अधिक वित्तीय प्रगति

पीएम-अभिम योजना अंतर्गत कुल 72 इकाइयों हेतु लगभग 76 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है, जिसके विरुद्ध लगभग 63 करोड़ रुपये के अनुबंध संपादित किए जा चुके हैं। अब तक लगभग 54 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं तथा कुल वित्तीय प्रगति 86 प्रतिशत दर्ज की गई है। इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेट्री (IPHL) परियोजनाओं के अंतर्गत 51 इकाइयों में से 33 कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा 18 कार्य प्रगतिरत हैं। वहीं ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स अंतर्गत 23 इकाइयों में से 1 कार्य पूर्ण एवं 22 कार्य प्रगतिरत हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अशोक बर्णवाल, आयुक्त धनराजू एस, एमडी एमपीपीएचसीएल मयंक अग्रवाल सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी एवं निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

MP में गर्मी का कहर, 46.8°C पहुंचा पारा; कई जिलों में आज भी हीटवेव अलर्ट

भोपाल 

मध्य प्रदेश में मई के तीसरे सप्ताह में आग बरसने लगी है. सोमवार को पूरा प्रदेश तप गया. यहां कई जिलों में पारा 46°C से ऊपर पहुंच गया. वहीं मंगलावर को भी मौसम बेहद गर्म रहने वाला है, जिससे स्थिति और बिगड़ने वाली है. सोमवार को खजुराहो सबसे गर्म रहा. यहां टेम्परेचर रिकॉर्ड दर्ज किया गया. वहीं आज मध्य प्रदेश के 30 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया है। 

47 डिग्री के करीब पहुंचा पारा
सोमवार को छतरपुर के खजुराहो में पारा 46.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जबकि नौगांव में 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. राजगढ़ में पारा 45.5 डिग्री सेल्सियस, रतलाम में तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस, खंडवा में 45.1 डिग्री सेल्सियस, शाजापुर, श्योपुर-मुरैना में 45 डिग्री सेल्सियस, दमोह-सतना में तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस, सागर में पारा 44.7 डिग्री सेल्सियस, गुना-रीवा में 44.5 डिग्री, रायसेन में 44.4 डिग्री, खरगोन में 44.2 डिग्री, धार में 44.1 डिग्री, टीकमगढ़ और मंडला में पारा 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 

वहीं राजधानी भोपाल में तापमान 44 डिग्री रिकॉर्ड किया गया. वहीं इंदौर में 44.3 डिग्री, ग्वालियर में 43.7 डिग्री, उज्जैन में 44 डिग्री और जबलपुर में तापमान 44.2 डिग्री सेल्सियस पारा रहा। 

30 जिलों में लू का अलर्ट
इस बीच मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के पांच जिलों में तीव्र लू की चेतावनी जारी की है, जबकि 30 जिलों में लू चलने का अलर्ट है. IMD के अनुसार, आज छतरपुर, दतिया, भिंड, टीकमगढ़ और निवाड़ी में तीव्र लू चलने की चेतावनी जारी की है. तो वहीं राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर समेत 30 से अधिक जिलों में लू चलने का अलर्ट जारी किया गया है. जबकि 20 जिलों में तेज गर्मी का अलर्ट जारी किया गया है। 

इन जिलों में हीट वेव का अलर्ट
भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, नीमच, राजगढ़, शाजापुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, खंडवा, देवास, सीहोर, विदिशा, दमोह, पन्ना, गुना, अशोकनगर, रायसेन, नरसिंहपुर, सागर, शिवपुरी, श्योपुर और मुरैना में भी हीट वेव का अलर्ट जारी किया गया है. इसके अलावा जबलपुर, झाबुआ, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, आलीराजपुर, हरदा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, अनूपपुर, शहडोल, मंडला, डिंडौरी, उमरिया, कटनी, मैहर, रीवा, मऊगंज, सतना, सीधी और सिंगरौली में भीषण गर्मी का असर देखने को मिलेगा। 

इन जिलों में लू का अलर्ट जारी
मौसम विभाग के अनुसार, आज सोमवार को सूबे के ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, सागर, जबलपुर, दमोह, छतरपुर, सतना, रीवा, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर समेत कई जिलों में लू चलने का अलर्ट जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि, संबंधित क्षेत्रों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से लेकर 44 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना जताई है।

बड़े शहरों में तेज गर्मी
बताया ये भी जा रहा है कि, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में भी भीषण गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। हालांकि कुछ जिलों में लू का अलर्ट नहीं है, लेकिन वहां भी तेज धूप और गर्म हवाओं से लोग परेशान हैं।

16 शहरों में 43 डिग्री से ऊपर तापमान
 प्रदेश के 16 शहरों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। राजगढ़ के बाद रतलाम में 44.8 डिग्री, खंडवा में 44.5 डिग्री, नौगांव और खजुराहो में 44.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। वहीं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में भी तापमान 42 से 43 डिग्री के बीच बना रहा।मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि गर्मी का असर अभी कम होने की संभावना नहीं है।

ऐतिहासिक फैसले के बाद भोजशाला में पहली मंगल आरती, दीपों और पटाखों से गूंजेगा परिसर

धार 

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर MP हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भगवामय हो गया है. 15 मई 2026 को आए फैसले में हाई कोर्ट ने आधिकारिक तौर पर भोजशाला को एक हिंदू मंदिर घोषित किया है, जिसके बाद से रोजाना नियमित रूप से श्रद्धालु भोजशाला पहुंच रहे हैं. चूंकि आज फैसले के बाद पहला मंगलवार है तो भोजशाला परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं, जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत की है।

 ऐतिहासकि फैसले में हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर करार दिया
गौरतलब है मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 15 मई, 2026 को सुनाए अपने ऐतिहासकि फैसले में भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर करार दिया था. हाई कोर्ट ने अपने 242 पन्नों के फैसले में साल 2003 के उस प्रशासनिक आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसके तहत शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज और मंगलवार को हिंदुओं को पूजा की सीमित अनुमति थी। 

हाई कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में ASI की सर्वे रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाया
हाई कोर्ट ने मंदिर के पक्ष में सुनाए अपने ऐतिहासिक फैसले में ASI की सर्वे रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाया. हाई कोर्ट का फैसला ASI की 98 दिनों के वैज्ञानिक और पुरातात्विक सर्वे पर आधारित है, जिसमें आधार पर कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर करार दिया. कोर्ट ने माना कि ऐतिहासिक साक्ष्यों और एएसआई की वैज्ञानिक रिपोर्ट से यह सिद्ध होता है कि इस स्थान का धार्मिक चरित्र मां सरस्वती का मंदिर ही है। 

11वीं शताब्दी में परमार राजवंश के प्रतापी राजा भोज ने की जशाला परिसर स्थापना
उल्लेखनीय है ऐतिसाहसिक तथ्यों के मुताबिक 11वीं शताब्दी में परमार राजवंश के प्रतापी राजा भोज ने भोजशाला परिसर स्थापना की थी. मूल रूप से संस्कृत अध्ययन का एक प्रतिष्ठित केंद्र और विद्या की देवी मां सरस्वती (वाग्देवी) को समर्पित एक भव्य भोजशाला मंदिर है. साल 1875 में खुदाई के दौरान यहां से मां वाग्देवी की एक अत्यंत सुंदर ऐतिहासिक प्रतिमा मिली थी, जिसे तत्कालीन ब्रिटिश अधिकारी अपने साथ इंग्लैंड ले गए थे। 

बड़वानी पुलिस की अनोखी पहल, जनजातीय अंचल में दारू-दहेज और DJ मुक्त विवाह अभियान शुरू

जनजातीय अंचल में 3-D उन्मूलन के लिये बड़वानी पुलिस की पहल

दारू, दहेज और डीजे मुक्त विवाह के लिये चलेगा अभियान

बड़वानी

जनजाति अंचल में पनप रही कुरीतियों के खिलाफ एक अनोखी पहल देखने को मिली, जब बड़वानी में पुलिस अधीक्षक स्वयं विवाह समारोह में पहुँचे। इस अवसर पर उन्होंने “3D” अर्थात दारू, दहेज और डीजे जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन का संकल्प दिलाया। यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की मिसाल बन गया। पुलिस प्रशासन की मौजूदगी ने लोगों को यह संदेश दिया कि समाज सुधार केवल कानून से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और जागरूकता से संभव है। समारोह में उपस्थित लोगों ने भी 3D मुक्त विवाह का समर्थन करते हुए सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया।

पुलिस अधीक्षक बडवानी पद्म विलोचन शुक्ल के नेतृत्व में विगत माह से जिला पुलिस बडवानी द्वारा जिले में विवाह समारोह में दहेज, डीजे एवं दारू का उपयोग नही करने हेतु 3-डी अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस विभाग की अभिनव पहल से प्रेरित होकर गत 4 मई को ग्राम धवली में पुलिस विभाग व्दारा आयोजित जनसंवाद में ग्राम जुनापानी के रामा नरगावे द्वारा अपने तीनों बच्चो के विवाह समारोह में दहेज, डीजे एवं दारू का उपयोग नही करने का संकल्प लिया था। रामा नरगावे द्वारा 17 मई को अपने पुत्र कृष्णा नरगावे, पुत्री रंजिता नरगावे एवं दिना नरगावे का विवाह समारोह बिना दहेज, डीजे एवं दारू के संपन्न किया गया। रामा नरगावे व्दारा पुलिस अधीक्षक बडवानी पद्म विलोचन शुक्ल को अपने बच्चों के विवाह समारोह में आमंत्रित करने पर पुलिस अधीक्षक द्वारा ग्राम जुनापानी विवाह समारोह में सम्मिलित हुए। उन्‍होंने दुल्हा-दुल्हनों को शुमकामना संदेश एवं उपहार देकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। शुक्‍ल ने नरगावे दंपति को शॉल-श्रीफल देकर उनकी साहसिक पहल के लिये सम्मानित किया।

विवाह समारोह में सम्मिलित जनजातीय समाज के लोगो ने भी सालों से चली आ रही सभी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने का संकल्‍प लिया। भविष्य में बिना दहेज, डीजे एवं दारू के विवाह समारोह सम्पन्न कराने तथा दहेज नही लेने व देने की कुरीति को पूर्ण रूप से बंद करने का संकल्‍प दिलाया गया। विवाह समारोह में थाना वरला का पुलिस स्टाफ तथा वन मंडल अधिकारी सेंधवा इंदुसिंह गडरिया एवं गायत्री परिवार के सदस्य खुमसिंह तथा ग्राम सरपंच पटेल भी शामिल हुए।

2 जून से स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट, भोपाल में 32 हजार कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे

भोपाल 

मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत 32 हजार संविदा कर्मचारियों ने दो जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे नाराज कर्मचारियों में यह निर्णय लिया है। हड़ताल की स्थिति में सरकारी अस्पतालों, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों, टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। ऑनलाइन हेल्थ मॉनिटरिंग और स्वास्थ्य योजनाओं का काम भी प्रभावित होने की आशंका है। कर्मचारियों ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस मामले में कर्मचारियों ने कहा है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। इससे पहले सरकार की ओर से मांगों पर सहमति जताई गई थी, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया। इससे कर्मचारियों में आक्रोश है।

25 मई से शुरू होगा आंदोलन
आंदोलन की शुरुआत 25 से 27 मई तक काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन से होगी। 28 और 29 मई को कलेक्टर, सीएमएचओ और बीएमओ को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया जाएगा।

2 जून से काम का बहिष्कार
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गई तो 2 जून से ऑनलाइन और ऑफलाइन सभी कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। आंदोलन के अंतिम चरण में 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि हड़ताल की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। उन्होंने सरकार से अपील की है कि समय रहते मांगों का समाधान कर आम जनता को होने वाली असुविधा से बचाया जाए।

ये हैं प्रमुख मांगें
संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण, एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा लागू करने, हर साल 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि महंगाई भत्ता, वेतन विसंगतियां दूर करने, नियमित कर्मचारियों जैसी छुट्टियां और समान काम के बदले समान वेतन की मांग उठाई है।

ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

    सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित कर दिया जाए।
    न्यू पेंशन स्कीम (NPS) और हेल्थ इंश्योरेंस लागू किया जाए।
    अन्य राज्यों की तरह हर वर्ष 10 प्रतिशत वेतन बढ़ाया जाए।
    नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता दिया जाए।
    स्वास्थ्य अधिकारियों सहित अन्य पदों के वेतन में उचित संशोधन और पूर्व की तरह इंक्रीमेंट दिया जाए।
    वेतन संरचना में जो विसंगतियां हैं, उन्हें सुधारकर संशोधित किया जाए।
    संविदा कर्मचारियों को भी नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश का लाभ दिया जाए।
    जब तक समान काम के बदले समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिलती, तब तक यह मुद्दा प्राथमिकता से हल किया जाए।

राजा रघुवंशी मर्डर केस पर बन रही फिल्म, फर्स्ट लुक देख दहल उठे दर्शक

इंदौर

इंदौर से जुड़े चर्चित राजा रघुवंशी मर्डर केस (Raja Raghuvanshi Case) की गूंज अब बॉलीवुड और ओटीटी की दुनिया तक पहुंच गई है। इस हाई प्रोफाइल केस से प्रेरित बताई जा रही फिल्म सुंदर पूनम का फर्स्ट लुक सामने आ चुका है। खास बात ये है कि यह फिल्म देश की बड़ी प्रोडक्शन कंपनी Tips Industries के बैनर तले बनाई जा रही है।

फिल्म का निर्देशन जाने माने डायरेक्टर पुलकित कर रहे हैं, जो पहले भी सच्ची घटनाओं पर आधारित एक गंभीर फिल्म ‘भक्षक’ का निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म (Sundar Poonam) के फर्स्ट लुक सामने आने के बाद कहानी की शुरुआती डीटेल्स ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। उनके बीच चर्चा है कि सुंदर पूनम फिल्म इंदौर के रौंगटे खड़े कर देने वाले राजा रघुवंशी केस (Raja Raghuvanshi Case) जैसी सच्ची घटनाओं पर आधारित है।

फिल्म में दिखेगी ये कहानी
अब तक मिल रही जानकारी के मुताबिक फिल्म सुंदर पूनम में बताया गया है कि एक नवविवाहित कपल कश्मीर में हनीमून मनाने गया था, जो रहस्यमयी तरीके से अचानक लापता हो जाता है। इसके बाद दुल्हन पूनम से जुड़ा एक खौफनाक सच सामने आने लगता है, जो हर किसी को चौंकाकर रख देता (Raja Raghuvanshi Case) है। कहानी में उसके जुनूनी प्रेम, धोखा और अतीत के राज और हत्या जैसे कई सस्पेंस भरे मोड़ दिखाई देंगे, जो उसके आसपास के हर व्यक्ति को एक जानलेवा भंवर में खींच लेते हैं।

इंदौर का खौफनाक राजा रघुवंशी केस
सुंदर-पूनम फिल्म का प्लॉट सामने आने के बाद चर्चा है कि यह फिल्म इंदौर के खौफनाक राजा रघुवंशी केस पर आधारित है। वह केस जिसने देशभर में सनसनी मचाकर रख दी थी। पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ मेघालय के शिलॉन्ग में हनीमून ट्रिप पर गए इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की संदिग्ध मौत (Raja Raghuvanshi Case) और उसके बाद सामने आए रिश्तों के उलझे सच ने देशभर के लोगों को झकझोर कर रख दिया था।

सूत्रों का कहना है कि उसी तरह की घटनाओं से प्रेरणा लेकर इस फिल्म की कहानी तैयार की गई है। बता दें कि राजा रघुवंशी की तरह ही एमपी में अब तक ऐसे नये और कई केस भी सामने आ चुके हैं, जो बार-बार राजा रघुवंशी मर्डर केस से मिलते-जुलते रहे और इसी केस की यादें ताजा करते रहे हैं।

क्राइम थ्रिलर और रियल लाइफ केस पर मिलता है जबरदस्त रेस्पॉन्स
क्राइम थ्रिलर और रियल लाइफ केस पर आधारित कंटेट को ओटीटी पर लगातार जबरदस्त रेस्पॉन्स मिल रहा है। यही वजह है कि सुंदर पूनम को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। चूंकि अब इसका फर्स्ट लुक सामने आ चुका है, तो सोशल मीडिया पर लोग इसकी रिलीज डेट और स्टारकास्ट के साथ ही ट्रेलर को लेकर भी सवाल करते नजर आ रहे हैं।

कब रिलीज होगी फिल्म?
हालांकि डायरेक्टर ने अभी सिर्फ इस कहानी की झलक ही शेयर की है। फिल्म (Raja Raghuvanshi Case) कब रिलीज होगी, ओटीटी पर आएगी या डायरेक्ट थियेटर में इस पर फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है। लेकिन इतना तय है कि फिल्म आने वाले समय की सबसे चर्चित क्राइम थ्रिलर प्रोजेक्ट्स में शामिल हो सकती है।

सुंदर पूनम स्टार कास्ट में सान्या मल्होत्रा मुख्य भूमिका में
सुंदर पूनम फिल्म के स्टार कास्ट की बात करें तो दमदार अभिनय के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा मुख्य भूमिका में नजर आ रही हैं। उनके साथ अभिनेता आदित्य रावल और विक्रम मल्होत्रा भी फिल्म में अहम भूमिका निभाते फिल्म में नजर आएंगे।

बता दें कि डायरेक्टर पुलकित को ट्रू या रियल लाइफ स्टोरी बेस्ड और सेंसिटिव आपराधिक मामलों को पर्दे पर बारीकी और गहराई के साथ उतारने के लिए जाना जाता है। ऐसे में क्राइम थ्रिलर जॉनर के शौकीनों के लिए यह फिल्म (Raja Raghuvanshi Case) बेहद खास होने वाली है।

हनीमून इन शिलॉन्ग भी रही थी चर्चा में
बता दें कि इससे पहले भी एक फिल्म हनीमून इन शिलॉन्ग (Raja Raghuvanshi Case) बनाए जाने की खबरें भी सामने आ चुकी हैं। बताया गया था कि राजा रघुवंशी के परिवार ने इस प्रोजेक्ट को सहमति भी दी थी। बता दें कि तब राजा रघुवंशी के बड़े भाई सचिन का बयान भी सामने आया था, उन्होंने कहा था कि हमने हत्या के इस मामले पर बनने वाली आगामी फिल्म के लिए अपनी सहमति दे दी है। हमारा मानना ​​है कि अगर हम अपने भाई की हत्या की कहानी बड़े पर्दे पर नहीं लाते, तो लोगों को यह पता नहीं चल पाएगा कि कौन सही था और कौन गलत? इसके बाद सामने यह भी आया था कि फिल्म के ज्यादातर हिस्से की शूटिंग इंदौर और मेघालय में की गई थी। हालांकि अब इस बारे में कोई अपडेट नहीं है।

अब लोगों को सुंदर पूनम का इंतजार
अब चर्चा सुंदर पूनम को लेकर है। Amazon Prime Video पर इसका (Sundar Poonam)फर्स्ट लुक जारी किया गया है।लोगों को इस फिल्म की आधिकारिक घोषणा, रिलीज डेट और ट्रेलर का बेसब्री से इंतजार है। लेकिन इतना तय है कि फिल्म बड़े पर्दे पर भी चर्चा का विषय बनेगी।

भोपाल में हर तीसरी प्रेग्नेंसी हाईरिस्क, कम उम्र में गर्भधारण बना बड़ी चिंता

भोपाल
भोपाल में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राजधानी के सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों से यह तथ्य सामने आया है। डॉक्टरों के मुताबिक हाल ये है कि पहले जहां कुल गर्भवतियों में 20 से 25 प्रतिशत मामले हाई रिस्क श्रेणी में आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 30 से 35 प्रतिशत तक पहुंच गया है। गंभीर एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और समय पर जांच नहीं होने से मां और नवजात दोनों की जान पर खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कम उम्र में गर्भधारण से मुश्किलें बढ़ रहीं हैं। एनीमिया इसकी सबसे बड़ी वजह है।

विशेषज्ञों के अनुसार कोविड के बाद हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों में तेजी आई है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में हर महीने करीब 3 हजार प्रसव हो रहे हैं, जिनमें 900 से 1200 महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में पाई जा रही हैं। इनमें गंभीर एनीमिया, हाई बीपी, शुगर, समय से पहले प्रसव और कम उम्र में गर्भधारण जैसे मामले प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच, पोषण और नियमित इलाज नहीं मिलने से महिलाएं गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रही

भोपाल के अस्पतालों में सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम सहित कई जिलों से गंभीर गर्भवतियों को रेफर किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच, पोषण और नियमित इलाज नहीं मिलने से महिलाएं गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के अधिकांश मामलों को गंभीर होने से रोका जा सकता है। यदि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में नियमित जांच, आयरन-फोलिक एसिड सेवन और हाई बीपी-शुगर की मॉनिटरिंग हो तो इसकी आशंका कम हो जाती है।

प्रदेश में एनीमिया सबसे बड़ी वजह
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार मध्यप्रदेश में 52 प्रतिशत से ज्यादा गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीडि़त हैं। वहीं 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 54 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में खून की कमी दर्ज की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यही स्थिति हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का सबसे बड़ा कारण बन रही है।

बता दें कि राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पतालों में आने वाली लगभग हर दूसरी गर्भवती महिला में हीमोग्लोबिन सामान्य से कम पाया जा रहा है। कई मामलों में यह स्तर 7 ग्राम से नीचे पहुंच जाता है।

प्रमुख बिंदु
भोपाल में बढ़े हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस
हर तीसरी गर्भवती जटिल श्रेणी में
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी
शुगर के कारण बढ़ी मुश्किलें
समय से पहले प्रसव भी अहम वजह
कम उम्र में गर्भधारण मुख्य कारण
एनीमिया सबसे बड़ी वजह

आज से आरंभ हुआ जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले अभियान

आज से आरंभ हुआ जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले अभियान

जनजातीय वर्ग के लिए 25 सेवाओं के “लाभार्थी संतृप्ति” शिविर होंगे आयोजित

भोपाल 

जनजातीय वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 18 से 25 मई तक राष्ट्रव्यापी सूचना, शिक्षा एवं संचार अभियान “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान संचालित किया जा रहा है। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने विभाग के सभी मैदानी अधिकारियों को सफलतापूर्वक शिविर लगाने एवं लक्षित समूह को लाभ पहुँचाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त सह संचालक जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना डॉ. सतेन्द्र सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान जनजातीय समुदाय के हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा।

प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों की सभी जनपद पंचायतों के चयनित ग्रामों में लाभार्थी संतृप्ति शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें योजनाओं से लाभान्वित भी किया जाएगा।

अभियान के तहत आयोजित शिविरों में 18 विभागों की कुल 25 सेवाओं का लाभ जनजातीय वर्ग के ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र हितग्राही अनुसार शासन की योजनाओं से वंचित न रहे। अभियान को सफल बनाने के लिये जिले के कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

शिविरों के आयोजन के लिये अपर संचालक श्रीमती रीता सिंह को राज्‍य स्‍तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है। जबकि जिला स्‍तर पर संबंधित जिले के सहायक आयुक्‍त/जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मध्‍यप्रदेश में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्‍कर्ष अभियान के तहत कुल 267 विकासखंडों के 11 हजार 377 ग्राम लाभान्वित होंगे। वहीं पीएम जनमन योजना के तहत कुल 122 विकासखंडों के 5 हजार 113 ग्राम लाभान्वित होंगे।

MP में सरकारी कर्मचारियों की अटेंडेंस पर सख्ती, सीट छोड़ते ही लगेगी ‘शॉर्ट लीव’

भोपाल 

 मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए नई खबर सामने आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश के 5.50 लाख सरकारी कर्मचारियों की बायोमैट्रिक अटेंडेंस के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद यह काम एमपीएसईडीसी को सौंप दिया गया है। साथ-ही साथ सरकारी ऑफिसों में मशीनों की खरीदी और वेंडर चयन का काम भी शुरु हो गया है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं।

एमपीएसईडीसी जो सिस्टम तैयार कर रहा है, उसमें कर्मचारी के मशीन पर पंच करते ही उसका लॉग-इन सीधे केंद्रीय सर्वर पर दर्ज हो जाएगा। इसमें ऑटोमेशन फीचर को भी ऐड किया जा रहा है। जिसके जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। शुरुआत में ये सॉफ्टवेयर मंत्रालय, सतपुड़ा, विंध्याचल और राजधानी के विभागाध्यक्ष कार्यालयों से होगी। इसके बाद इसे कमिश्नर कार्यालय, कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी दफ्तरों में लागू किया जाएगा।

अब लगेगी शॉर्ट लीव और हॉफ डे
नए सॉफ्टवेयर के आने के बाद कर्मचारियों के पंच करते ही सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के लिए पंच लग जाएगा। इसका समय सीधे क्रेंद्रीय सर्वर पर दर्ज होगा। साथ ही यदि कोई कर्मचारी अपनी सीट से जाता है तो ये सॉफ्टवेयर अपने आप शॉर्ट लीव और हॉफ डे दर्ज कर देगा। ये सिस्टम खुद ही बता देगा कि कौन कर्मचारी डेस्क पर है और कौन फ्रील्ड पर है।

बदलेंगे ये 2 पुराने नियम
मोहन सरकार अपने कर्मचारियों से जुड़े दो बड़े नियमों में भी बदलाव करने जा रही है। वर्षों पहले ‘दो ही बच्चे अच्छे’ वाली जो बंदिशें लगाई थी, उसे हटाने पर सहमति बन गई है। आदेश कभी भी जारी हो जाएंगे। जिसके बाद उन सैकड़ों कर्मचारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार हट जाएगी, जिन्होंने जाने अनजाने में दो से अधिक बच्चे पैदा किए हैं। सरकार का यह फैसला राहत देने वाला होगा।

दूसरी तरफ कुछ शर्तों के साथ अधिकारी, कर्मचारियों के लिए गिफ्ट लेना पहले से आसान हो जाएगा। ये एक वर्ष के भीतर अपनी एक सैलरी के बराबर गिफ्ट ले सकेंगे। ज्यादा कीमती गिफ्ट लेने पर कार्रवाई के दायरे में आएंगे। अधिकारी, कर्मचारियों को निवेश भी सोच समझकर ही करना होगा।

गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाया तो खैर नहीं
निवेश की जाने वाली रकम, कमाई से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ये सभी प्रावधान नए सिरे से तैयार किए जा रहे सिविल सेवा आचरण नियमों में किया जा रहा है। संशोधित सेवा नियम जारी होने बाकी है। सूत्रों के मुताबिक सरकार उक्त नियमों में संशोधन कर एक तरफ जहां राहत देने जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाने से रोकने को लेकर भी कई कड़े प्रावधान किए जाने पर विचार चल रहा है।

विद्यार्थियों को रेडक्रॉस के सिद्धांतों से करें संस्कारित: राज्यपाल पटेल

विद्यार्थियों को रेडक्रॉस के सिद्धांतों से करें संस्कारित: राज्यपाल पटेल

जूनियर और युवक रेडक्रॉस शाखा की समीक्षा बैठक में हुए शामिल
राज्यपाल पटेल ने अपने कारकेड को किया आधा

भोपाल 

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि रेडक्रॉस के सिद्धांत बच्चों में सेवा, सद्भाव, करूणा और संवेदनशीलता विकसित करते हैं। उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं। उनका सर्वांगीण विकास कर, उन्हें आदर्श नागरिक बनाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के लिए सक्षम पीढ़ी के निर्माण के लिए शैक्षणिक संस्थानों द्वारा विद्यार्थियों में रेडक्रॉस की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सभी शिक्षण संस्थानों को हर विद्यार्थी को रेडक्रॉस से जोड़ने की ज़िम्मेदारी उठाना चाहिए।

राज्यपाल पटेल सोमवार को रेडक्रॉस की मध्यप्रदेश राज्य शाखा इकाई द्वारा आयोजित जूनियर रेडक्रॉस एवं युवक रेडक्रॉस शाखा की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक का आयोजन होटल पलाश रेसीडेंसी में किया गया। उल्लेखनीय है कि राज्यपाल पटेल ने ईंधन बचत के दृष्टिगत अपने कारकेड के वाहनों की संख्या को आधा कर दिया है।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान, बच्चों में ज्ञान और संस्कार को प्रदान करने वाली सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। संस्थानों को विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए। उन्हें समसामयिक चुनौतियों और जीवन की प्रतिस्पर्धाओं के लिए जुझारू बनाएं। सफलताओं के दबाव और तनाव प्रबंधन से निपटने का हुनर सिखाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में बच्चों और युवाओं का विशेष योगदान रहेगा। ऐसे में विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ना होगा। कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाना होगा। आदर्श नागरिक बनाकर मानवता के ध्वजवाहक के रूप में तैयार करना होगा।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान, प्रदेश और जिला रेडक्रास इकाईयों के साथ सक्रिय समन्वय करें। रेडक्रॉस की वार्षिक गतिविधियों का कैलेंडर अनुसार नियमित आयोजन करें। उन्होंने देश के अन्य राज्यों में रेडक्रॉस के नवाचारों का अध्ययन कर प्रदेश की परिस्थिति के अनुरूप समावेश करने की बात कही। राज्यपाल पटेल ने जूनियर और युवक रेडक्रॉस के लिए गठित समिति को शीघ्र कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। प्रदेश के सभी जिलों में रेडक्रॉस की गतिविधियों को सक्रियता के साथ संचालित करने के लिए कहा है।

बैठक में जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुँवर विजय शाह ने रेडक्रॉस के माध्यम से ब्लॉक और पंचायत स्तर पर सेनेटरी नैपकिन को कम दाम पर उपलब्ध कराने के संबंध में विचार के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और निचले स्तर पर कम से कम दामों में सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने से कमजोर वर्ग की महिलाओं को विशेष लाभ मिलेगा। आर्थिक बचत के साथ महिलाओं के स्वास्थ्य का स्तर भी बेहतर होगा।

उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में जूनियर और युवक रेडक्रॉस की गतिविधियों के सतत आयोजन की बात कहीं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों में भी रेडक्रॉस, एन.सी.सी. और एन.एस.एस. के माध्यम से मिलने वाले प्रोत्साहनों के संबंध में चर्चा की।स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्कूल स्तर पर जूनियर और युवक रेडक्रॉस के पंजीयन, सदस्यता आदि प्रक्रियाओं के लिए सक्रिय समन्वय की आवश्यकता बताई।

राज्यपाल 4 कारकेड वाहनों के साथ पहुँचे

राज्यपाल पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील पर अपने कारकेड के वाहनों की संख्या आधी कर दी है। राज्यपाल पटेल सोमवार को जूनियर और युवक रेडक्रॉस की बैठक में शामिल होने के लिए केवल 4 वाहनों के साथ कार्यक्रम स्थल पहुँचे। विदित हो कि राज्यपाल के कारकेड में पूर्व में 8 वाहन शामिल रहते थे। 

राज्यपाल पटेल का बैठक के प्रारंभ में रेडक्रॉस की मध्यप्रदेश राज्य शाखा के चेयरमैन डॉ. श्याम सिंह कुमरे ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। जनरल सेक्रेटरी रामेंद्र सिंह ने जूनियर और युवक रेडक्रॉस के पंजीकरण, शुल्क निर्धारण, वार्षिक ऑडिट, निर्धारित गतिविधियों के आयोजन आदि प्रस्तावों की जानकारी दी। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अनुपम राजन और राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उच्च और स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा शासकीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु उपस्थित थे। 

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