आदि उत्सव जनजातीय गौरव, संस्कृति और उद्यमिता का है अदभुत संगम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ”आदि उत्सव” जैसे आयोजन प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी विरासत से विकास के संकल्प को पूरा करने का माध्यम भी हैं। जनजातीय संस्कृति से जुड़ी वैभवशाली परम्पराओं के प्रदर्शन और संरक्षण में ऐसे उत्सवों का विशेष महत्व है। पिछले एक दशक से यह आयोजन जनजातीय समाज की गौरवशाली परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव हमारी प्राकृतिक, सांस्कृतिक और वैभवशाली विरासत को सहेजने के साथ आधुनिक उद्यमिता के माध्यम से उसे नए आयाम देने का सशक्त मंच बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो होली और दीपावली एक साथ आ गई हों। उन्होंने मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, सिवनी, उमरिया और छिंदवाड़ा अंचल से पहुंचे गोंड एवं बैगा समाज के भाई-बहनों का स्वागत करते हुए आयोजन की भव्यता की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंडला जिले में रामनगर में हुए ”आदि उत्सव” को मंत्रालय से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडला का गोंड आर्ट, कर्मा, सैला और रीना नृत्य तथा बैगा समाज का परधोनी नृत्य जनजातीय संस्कृति की सुंदर अभिव्यक्ति हैं। इन परंपराओं को संरक्षित करने के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने कोदो-कुटकी सहित अन्य मोटे अनाजों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए विशेष अभियान चलाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव जनजातीय महापुरुषों और वीर नायकों बिरसामुंडा, रानी दुर्गावती, टंट्याभील, राजा शंकरशाह, कुंवर रघुनाथशाह, दलपतशाह की शौर्य गाथाओं का स्मरण कराने वाला प्रेरणादायी मंच भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपनी जड़ों से जुड़ने और जनजातीय महापुरुषों के वंशजों का सम्मान करने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। यह आयोजन जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।

आदि उत्सव में हुआ है शिल्पियों का संगम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गत एक दशक से आदि उत्सव का आयोजन हो रहा है जो प्रशंसनीय है। आदि उत्सव में बैगा ही नहीं गौंड और अन्य जनजातीय बंधु हिस्सा ले रहे हैं। आदि शिल्प में उद्यमियों और शिल्पियों का संगम भी हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति बोली और परंपराओं को हमें अगली पीढ़ी तक ले जाना है। जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने के लिए पारंपरिक वाद्य यंत्र भी यहां उपयोग में लाए गए हैं। साथ ही कर्मा सेला, लोक नृत्य की छटा बिखरी है। अन्न का उत्सव भी मनाया जा रहा है। प्रदेश में कोदो कुटकी के उत्पादन को प्रोत्साहन दिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति समाज के नायक भगवान बिरसा मुंडा, रानी दुर्गावती, टंट्या मामा, रघुनाथ शाह, भभूत सिंह आदि के सम्मान के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। इनमें ऐसे जनजाति नायकों के जन्म स्थल और कर्म स्थल पर कैबिनेट बैठक और अन्य आयोजन किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मंडला के मेडिकल कॉलेज का नाम राजा ह्दय शाह के नाम पर करने की पहल की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदि उत्सव के अवसर पर मेगा स्वास्थ्य शिविर के आयोजन की प्रशंसा की।

जनजातियों के लिए बढ़ाया है बजट

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजाति वर्ग के कल्याण के लिए 47 हजार 425 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया। तेंदूपत्ता संग्रह कार्य का लाभ जनजाति समाज को मिल रहा है। पीएम जनमन और धरती आबा अभियान से जनजातियों का हित संवर्धन हुआ है। वन धन केंद्रों के माध्यम से भी जनजातीय वर्ग लाभान्वित हो रहा है। अधोसंरचना विकास के कई कार्य किए जा रहे हैं। आकांक्षा योजना के क्रियान्वयन और सांदीपनि एवं एकलव्य विद्यालयों से जनजाति समाज के विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। सिकल सेल जैसे रोगों के नियंत्रण की पहल भी की गई है।

गोंडवाना गौरव को नई पहचान दे रहा ‘आदि उत्सव’: केन्द्रीय मंत्रीओरांव

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रीजुएल ओरांव ने कहा कि गोंडवाना राजवंश के इस ऐतिहासिक महल का जीर्णोद्धार कराने के बाद वर्ष 2016 से लगातार यह आदि उत्सव आयोजित किया जा रहा है। जनजातीय गौरव को सम्मान देने की पहल सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी, जब 1999 में उन्होंने पहली बार जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। मंडला के इस महल के जीर्णोद्धार के लिए मंत्रालय ने 1.97 करोड़ रुपये स्वीकृत किये। आज प्रधानमंत्रीमोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, प्रधानमंत्री जनमन, आहार अनुदान, विभिन्न छात्रवृत्तियाँ, जनजातीय बच्चों की उच्च शिक्षा जैसे अनेक काम जनजातीय समाज के कल्याण के लिए किये जा रहे हैं।

आदि उत्सव राष्ट्रीय स्तर पर बना रहा विशिष्ट पहचान : मंत्री  उइके

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  सम्पतिया उइके ने कहा कि रामनगर का ‘आदि उत्सव’ अब केवल क्षेत्रीय आयोजन नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय अस्मिता, संस्कृति और गौरव के प्रतीक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत गोंडी बोली में करते हुए जनजातीय समाज की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। आज यह आयोजन एक बड़े उत्सव के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसमें जनजातीय संस्कृति, लोक कला, परंपराओं और इतिहास का भव्य प्रदर्शन किया जा रहा है।

आदि उत्सव भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम : सांसदकुलस्ते

सांसदफग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि यह आयोजन जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर आज तक राज परिवार, पंडा, पुजारी एवं भूमका समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिन्होंने जनजातीय विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई है।

इस अवसर पर प्रदेश तथा देश के अन्य हिस्सों से आए विभिन्न राज परिवार के सदस्य, जनजातीय गौरव की जानी-मानी हस्तियाँ सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे जनजातीय वर्ग के लोग भी मौजूद रहे।

 

 

जब पानी घर पहुंचा, तब बदली ग्राम कंधारी की तस्वीर

भोपाल 

कभी पानी के लिए घंटों इंतजार, हैंडपंपों पर लंबी कतारें और दूर-दूर तक बर्तनों के साथ पानी की तलाश में जाती महिलाएं ग्राम कंधारी की पहचान हुआ करती थीं। गर्मी का मौसम आते ही गांव में पेयजल संकट और गहरा जाता था। कई परिवारों का पूरा दिन पानी की व्यवस्था करने में ही बीत जाता था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और महिलाओं की दिनचर्या ही बदल जाती थी। आज वही ग्राम कंधारी बदलती ग्रामीण तस्वीर का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जहां घर-घर पहुंचता शुद्ध पेयजल लोगों के जीवन में सहजता, सम्मान और विश्वास लेकर आया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण अधोसंरचना को जनजीवन से जोड़ते हुए ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है, जिनका सीधा प्रभाव आम नागरिकों के जीवन पर दिखाई दे। जल जीवन मिशन अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित बसई समूह जल प्रदाय योजना ने दतिया जिले के ग्राम कंधारी सहित क्षेत्र के अनेक गांवों में इसी परिवर्तन को वास्तविक रूप दिया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  संपतिया उइके के सतत मार्गदर्शन और नियमित मॉनिटरिंग के कारण योजना का लाभ अंतिम छोर तक रहने वाले परिवारों तक पहुंच रहा है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  उइके ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर परिवार तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा योजनाओं की गुणवत्ता और नियमित संचालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। मंत्री  उइके ने कहा कि जल जीवन मिशन महिलाओं के जीवन में सबसे बड़ा सकारात्मक बदलाव लेकर आया है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की स्थिति मजबूत हुई है।

बसई समूह जल प्रदाय योजना लगभग 52.26 करोड़ रूपये की लागत से विकसित की गई। योजना के माध्यम से दतिया एवं भांडेर क्षेत्र के 32 गांवों तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। योजना के क्रियान्वयन के बाद ग्राम कंधारी में हर घर नल कनेक्शन के जरिए नियमित जल आपूर्ति शुरू हुई, जिससे ग्रामीण जीवन की पूरी तस्वीर बदल गई।

करीब 352 परिवारों वाले ग्राम कंधारी में पहले पेयजल की समस्या सबसे बड़ी चुनौती थी। गांव में सीमित हैंडपंप होने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था। कई बार महिलाओं और बच्चों को दूरस्थ स्थानों तक जाकर पानी लाना पड़ता था। पानी की गुणवत्ता भी बेहतर नहीं थी, जिससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहती थीं। गांव के लोगों के लिए पानी केवल जरूरत नहीं, बल्कि रोजाना संघर्ष का विषय था।

योजना शुरू होने के बाद गांव में बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिला। अब घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को सबसे अधिक राहत मिली है। पहले जहां दिन का अधिकतम समय पानी जुटाने में निकल जाता था, वहीं अब वे परिवार और अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त समय दे पा रही हैं। बच्चों को भी राहत मिली है और उनको पढ़ाई के लिए समय मिलने लगा है। गांव में स्वच्छता की स्थिति बेहतर हुई है तथा जलजनित बीमारियों में कमी आई है। ग्रामीणों के जीवन स्तर में यह बदलाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है।

ग्राम कंधारी की यह कहानी केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस बदलते मध्यप्रदेश की तस्वीर है, जहां विकास योजनाएं आंकड़ों से आगे बढ़कर लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। जल जीवन मिशन के माध्यम से गांवों तक पहुंच रहा शुद्ध पेयजल अब ग्रामीण सम्मान, स्वास्थ्य सुरक्षा और बेहतर भविष्य की नई पहचान बन चुका है।

सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान के लिए 20 मई तक नामांकन आमंत्रित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली स्मृति में “सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान” स्थापित किया गया है। यह सम्मान सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य, न्यायप्रियता, सुशासन, दानशीलता, प्रजावत्सलता एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा संस्कृति विभाग के सहयोग से स्थापित सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान की राशि 1 करोड़ 1 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसके साथ ही 21 लाख रुपये का राष्ट्रीय सम्मान और पाँच-पाँच लाख रुपये के तीन शिखर सम्मान भी स्थापित किए गए हैं। यह सम्मान भारत की सांस्कृतिक गरिमा को विश्व मंच पर नई पहचान प्रदान करेगा। इच्छुक संस्थाएं एवं व्यक्ति 20 मई, 2026 तक सम्मान के लिए नामांकन भर सकते है।

महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक  राम तिवारी ने बताया कि सम्मान के लिए आवेदन एवं नामांकन प्रक्रिया शोधपीठ की आधिकारिक वेबसाइट https://awards.mvspujjain.com पर प्रारंभ कर दी गई है। वेबसाइट पर सम्मान से संबंधित दिशा-निर्देश, पात्रता, चयन प्रक्रिया एवं विभिन्न श्रेणियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई है। अंतर्राष्ट्रीय सम्मान,राष्ट्रीय सम्मान एवं शिखर सम्मान के लिए एक “स्पीड रीड” सारांश भी उपलब्ध है। इसमे हर पुरस्कार के अर्हताओं का उल्लेख है।

सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान विश्व स्तर पर सक्रिय उन विशिष्ट व्यक्तित्वों एवं संस्थाओं को प्रदान किया जाएगा, जिन्होंने सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शों जैसे सुशासन, न्यायप्रियता, प्रज्ञा, दानवीरता, संस्कृति-प्रेम, विज्ञान बोध एवं लोक कल्याण को अपने कार्यों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया हो। इस सम्मान की राशि 1 करोड़ 1 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

सम्मान के लिए न्याय, दानवीरता, सुशासन, खगोल एवं ज्योतिष विज्ञान, कला, शौर्य, राजनय, आध्यात्म, विश्व मानव कल्याण, समाज अभ्युदय, अंतर्राष्ट्रीय भाईचारा, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवाचार, भारतीय दर्शन एवं वेदांत के प्रचार-प्रसार सहित जनकल्याणकारी कार्यों के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले भारत सहित विश्वभर के व्यक्ति अथवा संस्थाएँ आवेदन कर सकती हैं ।

राष्ट्रीय सम्मान

राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को 21 लाख रुपये की राशि के राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान न्याय, दानवीरता, वीरता, सुशासन, खगोल एवं ज्योतिष विज्ञान, कला, शौर्य, प्राच्य वाङ्मय, राजनय, आध्यात्मिक क्षेत्र तथा रचनात्मक एवं जनकल्याणकारी कार्यों में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा।

शिखर सम्मान

इन पुरूस्कारों के अतिरिक्त पाँच-पाँच लाख रुपये के तीन शिखर सम्मान भी स्थापित किए गए हैं।यह सम्मान सम्राट विक्रमादित्य के बहुविध गुणों न्याय विधि, खगोल एवं ज्योतिष विज्ञान, कला, शौर्य, प्राच्य वाङ्मय, राजनय, आध्यात्मिक क्षेत्र एवं रचनात्मक जनकल्याणकारी कार्यों में विशिष्ट योगदान देने वाले भारत के सक्रिय व्यक्तियों अथवा संस्थाओं को प्रदान किए जाएंगे।

सम्मान के लिए पात्रता

सम्मान युग निर्माण, विश्व मानव कल्याण, समाज अभ्युदय, अंतर्राष्ट्रीय भाईचारा, सर्वधर्म समन्वय, भारतीय संस्कृति के उत्थान, सामाजिक नवाचार, भारतीय दर्शन, धर्म, न्याय, परंपरा एवं वेदांत के प्रचार-प्रसार में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साधनारत व्यक्ति अथवा संस्थाओं को प्रदान किया जाएगा।

सम्मान के लिए देश-विदेश के व्यक्तियों, संस्थाओं, समाजशास्त्रियों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, समीक्षकों, पत्रकारों एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से नामांकन एवं अनुशंसाएँ आमंत्रित की गई हैं।

चयन प्रक्रिया

सम्मान चयन के लिए प्रति वर्ष उच्च स्तरीय निर्णायक मंडल का गठन किया जाएगा। निर्णायक मंडल में मुख्यमंत्री अध्यक्ष के रूप में एवं केन्द्रीय संस्कृति मंत्री और मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश स्थायी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। इसके अतिरिक्त समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों, समाजशास्त्रियों, लेखकों, पत्रकारों, उद्योगपतियों, न्यायविदों, पुरातत्वविदों, चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।

चयन प्रक्रिया में संबंधित क्षेत्र में उच्च कोटि की सृजनात्मकता, विशिष्ट उपलब्धि, निरंतर साधना एवं योगदान को आधार बनाया जाएगा। चयन के समय संबंधित व्यक्ति अथवा संस्था का सक्रिय एवं सतत कार्यरत होना अनिवार्य होगा। निर्णायक मंडल के समक्ष प्रस्तुत अनुशंसाओं के अतिरिक्त मंडल स्वविवेक से अन्य नामों पर भी विचार कर सकेगा।

एक बार सम्मान प्राप्त कर चुके व्यक्ति अथवा संस्था को पुनः यह सम्मान प्रदान नहीं किया जाएगा। निर्णायक मंडल द्वारा सर्वसम्मति से की गई अनुशंसा राज्य शासन को भेजी जाएगी और शासन की स्वीकृति के बाद ही सम्मान की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

 

देश को देश में सभी क्षेत्रों में अग्रणी बनाना हमारा लक्ष्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेशवासियों के विकास, उनके जीवन स्तर में सुधार करना और जन-जन के कल्याण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से योजनाओं और कार्यक्रमों का क्रियावयन सुनिश्चित करते हुए सभी विभाग अपनी सार्थकता को स्थापित करें। विभाग अपने कार्य क्षेत्र की कठिनाइयों और चुनौतियों को चिन्हित करते हुए, सकारात्मक भाव से उनका निराकरण करें। विभाग और जिले जिन क्षेत्रों में पीछे हैं, उनमें सुधार के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करना हमारा प्रयास हो। जनहित में किए जाने वाले सभी नवाचारों को राज्य सरकार प्रोत्साहित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न शासकीय कार्यक्रमों और योजनाओं के क्रियावयन के संबंध में शुक्रवार को मंत्रालय में आयोजित नोडल विभागों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्य सचिवअनुराग जैन सहित अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।    

स्वामित्व योजना में महिलाओं के नाम से कराई जाए रजिस्ट्री

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि की नि:शुल्क रजिस्ट्री के कार्य का लाभ प्रदेश के सभी ग्रामवासियों को दिलवाने के लिये अभियान के स्वरूप में संचालित किया जाए। लोकहित के  इस  कार्य में जनप्रतिनिधियों- पंचायत प्रतिनिधियों की सहभागिता आवश्यक रूप से सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामित्व योजना में महिलाओं के नाम रजिस्ट्री कराई जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र हितग्राहियों को जमीन के नि:शुल्क पट्टे वितरित किए जाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि घोषित करने की प्रक्रिया को सरल बनाना आवश्यक है। कलेक्टर समय सीमा निर्धारित करते हुए पूरी संवेदनाशीलता और सक्रियता से कार्य करें। इससे ग्रामीण क्षेत्र से शहरों में हो रहे पलायन को कम करने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी क्षेत्र से सटे गांवों के लिए प्रक्रिया का क्रियान्वयन क्षेत्र का नियोजन कर किया जाए। इससे क्षेत्र के सौंदर्यीकरण में मदद मिलेगी और स्थानीय निवासियों को स्कूल, खेल के मैदान, मूलभूत आवश्यकताओं की दुकानों और धर्मशालाओं जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

नर्मदा समग्र मिशन से जुड़े सभी कार्यों की समीक्षा के लिए माह के पहले सोमवार को होगी बैठक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बैठक में बताया गया कि नर्मदा समग्र मिशन की स्थापना के संबंध में नोडल विभाग/स्पेशल सेल के गठन की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय लोगों को जागरूक कर नर्मदा समग्र अभियान से जोड़ा जाए। जीवनदायिनी मां नर्मदा मध्यप्रदेश की लाइफलाइन है। अमरकंटक स्थित नर्मदा उद्गम स्थल सहित सभी प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों को संरक्षित करने की आवश्यकता है। यहां प्राकृतिक सौंर्दय बना रहे और सीमेंट क्रांकीट के पक्के निर्माण कम हो, इसके लिए उद्गम स्थलों से दूर सुव्यवस्थित सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा समग्र मिशन से जुड़े सभी कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए सभी विभागों के अधिकारियों को माह के पहले सोमवार को बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा परिक्रमा यात्रियों की सुविधा के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए।

पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर की जाए समीक्षा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रीष्मकाल में नगरीय निकाय एवं ग्राम पंचायतों में पेयजल व्यवस्था की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गर्मी के मौसम में सभी को पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर समीक्षा की जाए। जल संरक्षण के लिए कार्य करने मे जन सामान्य को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि अपने ग्राम और वार्ड की बेहतरी के लिए कार्य करने के इच्छुक व्यक्तियों को ”जन्मभूमि से कर्मभूमि तक” का अभियान चलाये और उन्हें जल संरक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाए। जनप्रतिनिधियों के सहयोग से जल संरक्षण गतिविधियों को अभियान का रूप दिया जाए।

बैठक में पीएचई, नगरीय विकास और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को ग्रीष्मकाल में विभाग की तैयारियां वॉटरशेड मिशन की जानकारी दी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के किसी बसाहट में वर्तमान में जल परिवहन की आवश्यकता नहीं है। नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विभाग नलजल योजना पर तेजी से कार्य कर रहा है। प्रदेश भर में अमृत-1 और अमृत-2 योजना के अंतर्गत पानी और सीवरेज प्रबंधन के लिए कार्य निरंतर प्रगति पर है।  

उत्तर प्रदेश सरकार के साथ चित्रकूट धाम के समग्र विकास के लिए होगी संयुक्त बैठक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि चित्रकूट धाम के समग्र विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। चित्रकूट धाम की मंदाकिनी नदी में पानी की धारा को अविरल रखने की योजना पर कार्य किया जाएगा। देश में विरासत से विकास के मॉडल के साथ धार्मिक पर्यटन का इकोसिस्टम तैयार किया गया है। ओंकारेश्वर के ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के महातम्य से जन-जन को अवगत कराना जरूरी है। ममलेश्वर के विकास से भविष्य में भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। उन्होंने श्रीराम वन गमन पथ,कृष्ण पाथेय और चित्रकूट धाम में जारी विकास कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के दिशा निर्देश दिए।

होमगार्ड बल का क्षमता संवर्धन होगा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाकाल महालोक के प्रबंधन के लिए मंदिर समिति द्वारा होमगार्ड की व्यवस्था की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थानों पर भी होमगार्ड के माध्यम से व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे होमगार्ड बल का क्षमता संबर्धन भी होगा, जिसका उपयोग प्रदेश में अन्य स्थानों पर भी किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला पर्यटन परिषदों को भी जिला स्तर पर पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में सहभागी बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभिन्न समाजों और संस्थाओं द्वारा बनाई जाने वाली धर्मशालाओं में राज्य शासन सहयोग प्रदान करें, इससे धार्मिक पर्यटन के लिए आने वाले गरीब वर्ग को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ:2028 के दृष्टिगत उज्जैन के दताना मताना हवाई पट्टी के स्थान पर 2700 मीटर लंबी नवीन हवाई एवं एयरपोर्ट निर्माण की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि उज्जैन एयरपोर्ट के विकास के लिए आवश्यक भू अर्जन की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही इसका भूमि-पूजन किया जाएगा।

कपास उत्पादक किसानों के लिये कम किया मंडी शुक्ल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक कल्याण वर्ष 2026 में नवाचार और नई योजनाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि खंडवा और बुरहानपुर की मंडियों में कपास उत्पादक किसानों से लिया जा रहा मंडी शुल्क एक रुपए से घटाकर 55 पैसे करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों को उपज बेचने में कठिनाई न हो इसके लिए कपास का मंडी शुल्क पड़ोसी महाराष्ट्र राज्य के बराबर 55 पैसे किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों को अग्निवीर योजना के अंतर्गत अग्निवीरों की भर्ती प्रक्रिया में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से मिले निर्देशों को लागू करने के निर्देश दिए।

बॉयोमैट्रिक उपस्थित लागू होने से शासकीय कार्य कुशलता और समय बद्धता में होगी वृद्धि

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजधानी भोपाल में मंत्रालय, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में तैनात कर्मचारियों की बॉयोमैट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बॉयोमैट्रिक अडेंटेंस एक नवाचारी पहल है। इसे प्रदेश के सभी शासकीय कार्यालयों में लागू किया जाए। सभी कार्यालयों में बॉयोमैट्रिक उपस्थित लागू होने से शासकीय कार्य कुशलता और समय बद्धता में वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं भी कार्यालयों में अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा समय के पालन का निरीक्षण करेंगे।

इंजीनियरिंग और मेडिकल विश्वविद्यालयों में विघटित करने पर हुई चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्र पार्क अन्य औद्योगिकी क्षेत्रों के आस-पास विद्यमान आई.टी.आई. पॉलिटेक्निक में उन क्षेत्रों की मांग के अनुरूप सेक्टर स्पेसिफिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए। प्रदेश में जिन औद्योगिक इकाइयों को उद्योग स्थापना के लिए भूमि आवंटित की जा रही है। वे उद्योग, अपने परिसर में युवाओं को प्रशिक्षित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध होगा तथा औद्योगिक इकाइयों को दक्ष और निपुण स्टॉफ उपलब्ध हो सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजीव प्राद्योगिकी विश्वविद्यालय को तीन विश्वविद्यालयों को मध्यभारत तकनीकी विश्वविद्यालय मुख्यालय भोपाल, मालवा तकनीकी विश्वविद्यालय मुख्यालय उज्जैन और महाकौशल तकनीकी विश्वविद्यालय मुख्यालय जबलपुर में विघटित करने की दिशा में हुई प्रगति की जानकारी प्राप्त हुई। इसी क्रम में मेडिकल विश्वविद्यालय को तीन अलग-अलग विश्वविद्यालयों के रूप में विभक्त करने के लिए जारी कार्यवाही की जानकारी भी प्राप्त की। बैठक में झाबुआ में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय द्वारा बनाये जा रहे मेडिकल कॉलेज के लिए आरजीपीवी द्वारा निर्मित इंजीनियरिंग कॉलेज के हस्तांतरण के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की गई।  

सांदीपनी विद्यालय परिसरों में अकादमी समय के बाद संचालित हो स्किल डेवलपमेंट गतिवधियां

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निसंतानता से प्रभावित परिवारों में आशा की किरण के संचार के लिए प्रदेश में आईवीएफ सेंटर स्थापित करने के लिए आवश्यक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शालेय स्तर पर अलग-अलग वर्गों के लिए स्थापित हॉस्टलों के स्थान पर सभी समाजों के बच्चों के लिए कॉमन हॉस्टल संचालित किया जाए। हमारे छात्रावास सामाजिक समरस्ता के केन्द्र बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांदीपनी विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं और शिक्षा के गुणवत्ता की व्यापक प्रसार-प्रचार की आवश्यकता भी बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनी विद्यालय परिसरों तथा महाविद्यालयों में अकादमी समय के बाद स्किल डेवलपमेंट, कम्प्यूटर प्रशिक्षण और कोचिंग जैसी गतिवधियां संचालित की जा सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास प्राधिकरण और हाउसिंग बोर्ड, आम आदमी को कम खर्च में आवास उपलब्ध कराने कि दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि परम्परागत आवास निर्माण पद्धति को प्रोत्साहित किया जाए। यह पद्धति पर्यावरण हितैषी भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में एआई सेंटर, डॉटा सेंटर तथा डीपटेक पार्क की दिशा में समय-सीमा निर्धारित कर गतिविधियां संचालित की जाए।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में मध्यप्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के संकल्प को साकार करते हुए मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वयन में देशभर में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 10 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे आवास निर्माण एवं हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराने में देश के अग्रणी राज्यों में मध्यप्रदेश ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्तसंकेत भोंडवे ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अंतर्गत मध्यप्रदेश ने आवासों की ग्राउंडिंग में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश में 98.04 प्रतिशत आवासों की ग्राउंडिंग पूर्ण हो चुकी है। यह प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध कार्यप्रणाली का परिणाम है। वहीं 9 लाख से अधिक आवार्सी का निर्माण पूर्ण कर पात्र हितग्राहियों को सौंपा जा चुका है। योजना के माध्यम से हजारों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है, जिससे उनके जीवन स्तर, सामाजिक सुरक्षा एवं सम्मान में सकारात्मक बदलाव आया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का उद्‌देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग एवं मध्यम आय वर्ग के शहरी परिवारों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। योजना अंतर्गत हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे मूलभूत सुविधाओं से युक्त पक्के घर में जीवन यापन कर सकें।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत मॉनिटरिंग एवं समयबद्ध निर्माण कार्यों के चलते प्रदेश लगातार राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है।भोंडवे ने बताया कि नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक पात्र शहरी परिवार को आवास योजना का लाभ समय पर प्राप्त हो सके। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के माध्यम से प्रदेश में न केवल आवास निर्माण को गति मिली है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, रोजगार सृजन एवं सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है। राज्य शासन द्वारा भविष्य में भी योजना के प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन हेतु निरंतर प्रयास किए जाते रहेंगे।

 

इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ ने भोपाल में किया प्रवेश, यह देश में ब्राण्ड का 68वां स्टोर है

भोपाल

 पूर्वी भारत में साड़ियों के सबसे भरोसेमंद ब्राण्ड जिसे पिछले 54 सालों से विश्वसनीयता और कारीगरी के लिए जाना जाता है, ने भोपाल में पहले स्टोर के लॉन्च के साथ मध्य प्रदेश की राजधानी में प्रवेश किया है। शॉप नंबर 1, अपर ग्राउंड फ्लोर, ई-3/52, एरिना कॉलोनी, 

10 नंबर मार्केट में 1600 वर्गफीट में फैला यह स्टोर ब्राण्ड की अवधारणा ‘भारत की साड़ियों’ को मध्य भारत के सबसे ज़्यादा सांस्कृतिक महत्व वाले शहरों में से एक में लेकर आया है तथा भारत की साडियों को देश में हर कोने तक पहुंचाने के अपने विज़न को और आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।, इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ के सीईओ श्री दर्शन दुधोरिया ने कहा, ‘‘साड़ी भारत की सबसे पुरानी सांस्कृतिक पहचान में से एक है, आज की नई पीढ़ी इसे अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में एक नए नज़रिए से देख रही है। इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ में, हम साड़ी को आधुनिक भारतीय महिला के लिए रोज़मर्रा का परिधान बनाना चाहते हैं, ताकि यह त्योहारों और खास मौकों की तरह ही रोज़ाना लिए भी उतनी ही ज़रूरी बन जाए। अपने प्लेटफॉर्म के ज़रिए, हम देश भर की महिलाओं तक ‘भारत की साड़ियां’ पहुंचा रहे हैं; हम आधुनिक रीटेल माहौल में प्रमाणित बुनाई वाली साड़ियों के साथ उपभोक्ताओं का भरोसा जीतते हैं। भोपाल में अपने पहले स्टोर के साथ, हम भारत की साड़ियों को देश के हर कोने तक पहुंचाने की अपनी यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं। साथ ही हम उन कारीगरों के प्रति भी समर्पित हैं, जो इस विरासत को बरक़रार रखे हुए हैं।’’

भोपाल स्टोर के लॉन्च के साथ इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ देश भर में अपने फुटप्रिन्ट को मजबूत बनाने के प्रयास जारी रखे हुए है। ब्राण्ड न सिर्फ अपनी रीटेल मौजूदगी का विस्तार कर रह है बल्कि भारत के द्वारा साड़ी की खोज और अनुभव के तरीके को भी नया आयाम दे रहा है। क्षेत्रीय कारीगरी, सांस्कृतिक स्टोरीटैलिंग एवं आधुनिक रीटेल के संयोजन द्वारा ब्राण्ड साड़ियों के लिए भारत का सबसे भरोसेमंद सिस्टम बनाने की दिशा में अग्रसर है। 

इंदौर, उज्जैन और जबलपुर के बाद, यह मध्य प्रदेश में इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ का चौथा स्टोर है, इसके साथ ब्राण्ड ने राज्य के मुख्य सांस्कृतिक एवं कमर्शियल केन्द्रों में अपने फुटप्रिन्ट को और अधिक मजबूती से स्थापित कर लिया है। यह देश भर में ब्राण्ड का 68वां स्टोर है, जो भरोसेमंद, नेशनल साड़ी प्लेटफॉर्म के निर्माण की दिशा में इसके प्रयासों की पुष्टि करता है।

भोपाल का यह स्टोर भारत की टेक्सटाईल परम्परा का जश्न है। यहां मौजूद कलेक्शन बुनाई की समृद्ध परम्पराओं का संयोजन है जिसमें बंगाल के काव्यात्मक कांथा, बारीक कारीगरी से युक्त बालूचरी, टेक्सचर्ड मटका और टसर से लेकर, दक्षिण भारत की सदाबहार भव्यता से युक्त कांजीवरम, कांचीपुरम और अरनी सिल्क तक शामिल हैं। साथ ही, इसमें बनारसी, कतन बनारसी, इकत, बंधेज, पैठनी, गढ़वाल और उप्पाडा जैसी प्रतिष्ठित परंपराओं को भी शामिल किया गया है; इसके अलावा मध्य प्रदेश की अपनी चमक बिखेरती चंदेरी और माहेश्वरी साड़ियाँ भी मौजूद हैं। ये सभी कलेक्शन ‘भारत की साड़ियों’ की एक जीवंत झांकी प्रस्तुत करते हैं, जहाँ हर साड़ी अपने आप में एक कहानी, एक क्षेत्र और एक विरासत को समेटे हुए है।

60 से अधिक बुनकर समुदायों से 15000 से अधिक कलाकारों के नेटवर्क के साथ, इंडियन सिल्क हाउस एजेंसीज़ भारत के कारीगर समुदायों एवं आधुनिक उपभोक्ताओं के बीच के अंतर को दूर करता है तथा भरोसा, प्रमाणिकता एवं सुलभता को बनाए रखते हुए इस विरासत को आज के दौर के लिए प्रासंगिक बनाता है। भोपाल, एक ऐसा शहर जहाँ संस्कृति को केवल सहेजकर नहीं रखा जाता, बल्कि उसे जिया भी जाता है। ऐसे में शहर में विस्तार ब्राण्ड के लिए स्वाभाविक है। यह नया स्टोर आज की भारतीय महिलाओं को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है, जो अपनी विरासत को महत्व देती हैं, और साड़ियों का चुनाव किसी खास मौके के लिए नहीं बल्कि अपनी रोज़मर्रा की पहचान के रूप में करती हैं।

उज्जैन की जनता सिंहस्थ संबंधी कार्यों में सहयोग कर पेश कर रही हैं नई मिसाल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जैन की जनता सिंहस्थ संबंधी कार्यों में सहयोग कर पेश कर रही हैं नई मिसाल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री ने हरसिद्धि पाल से रामघाट मार्ग चौड़ीकरण कार्य का किया निरीक्षण

उज्जैन 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ:2028 के लिए श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के आवागमन एवं सुविधाएं बढ़ाने के लिए घाटों एवं मार्गों के चौड़ीकरण कार्य किए जा रहे है। सरकार द्वारा सभी कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। सिंहस्थ के लिये सभी कार्य इस तरीके से किए जा रहे है कि पौराणिक और धार्मिक नगरी उज्जैन को लंबे समय तक उनका लाभ प्राप्त हो। उज्जैन के जनप्रतिनिधि, सभी धर्म के अनुयायी और नागरिक विकास कार्यों का समर्थन कर रहे है और सहयोग प्रदान कर देश के लिए एक नई मिसाल बन रहे है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को उज्जैन में रामघाट पहुंचकर हरसिद्धि पाल से राम घाट मार्ग चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत कार्य तेजी गति, गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण करें।

होमगार्ड द्वारा आयोजित बाढ़ बचाव प्रशिक्षण का अवलोकन किया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरसिद्धि पाल से रामघाट मार्ग चौड़ीकरण के निरीक्षण के बाद होमगार्ड द्वारा आयोजित बाड़ बचाव प्रशिक्षण का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे होमगार्ड जवानों की हौसला अफजाई की। डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट संतोष कुमार जाट ने जानकारी दी कि होमगार्ड द्वारा 250 होमगार्ड जवानों को बाढ़ बचाव के लिए डीप डाइविंग, नाविकों, स्विमिंग, लाइफ जैकेट के उपयोग का तरीका, आपदा और बाढ़ बचाव सामग्री का उचित प्रयोग, अंडर वॉटर रेस्क्यू और सर्फेस वॉटर रेस्क्यू का 15 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रवि सोलंकी, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, संजय अग्रवाल, सिंहस्थ मेला अधिकारी सह संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजीपी राकेश गुप्ता और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

भोजशाला में मिले हिंदू पक्ष के मजबूत सबूत! मूर्तियां, श्लोक और हवनकुंड ने बदली तस्वीर

धार 

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की 98 दिन तक चली वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को सही मानते हुए भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर स्वरूप वाला स्थल माना है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक साक्ष्य, साहित्य, संरचनाएं और ASI की रिपोर्ट यह स्थापित करती हैं कि यह स्थान राजा भोज से जुड़ा संस्कृत अध्ययन और देवी वाग्देवी सरस्वती की आराधना का प्रमुख केंद्र था। 

इस मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस अशोक अवस्थी की खंडपीठ ने की. यह मामला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों जजों ने खुद भोजशाला परिसर का दौरा कर जमीनी स्थिति का निरीक्षण किया. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह निर्णय सिर्फ दस्तावेजों और रिपोर्टों के आधार पर नहीं बल्कि स्थल के प्रत्यक्ष निरीक्षण के बाद दिया गया है। 

पूजा पर रोक वाला पुराना आदेश रद्द

कोर्ट ने कहा कि अगर कमाल मौला मस्जिद से जुड़े मुस्लिम पक्षकार चाहें तो वे मस्जिद के लिए धार शहर या उसके आसपास वैकल्पिक जमीन आवंटित करने की मांग सरकार से कर सकते हैं. अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी मांग आने पर सरकार उस पर विचार करेगी. हिंदू पक्ष की ओर से अदालत में एक और महत्वपूर्ण मांग रखी गई थी. इसमें राजा भोज की आराध्या मानी जाने वाली वाग्देवी सरस्वती की प्राचीन प्रतिमा को लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम से वापस भारत लाने के लिए आदेश देने की मांग की गई थी। 

कोर्ट ने इस पर कहा कि याचिकाकर्ता सरकार को ज्ञापन दे सकते हैं और सरकार इस विषय पर विचार कर सकती है. भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद का विवादित क्षेत्र 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज है. यह परिसर 1958 के प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल अधिनियम के तहत भी संरक्षित है. लंबे समय से यह विवाद बना हुआ था कि इस स्थल का धार्मिक स्वरूप क्या है. हिंदू पक्ष इसे देवी वाग्देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र बताता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है। 

ASI रिपोर्ट में मिले मंदिर के कई प्रमाण
अदालत के आदेश पर ASI ने यहां 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया था. इस सर्वे के दौरान परिसर की दीवारों और खंभों पर कई ऐसे चिन्ह और आकृतियां मिलीं जिन्हें हिंदू मंदिर स्थापत्य से जुड़ा माना गया. रिपोर्ट में कमल, केले के स्तंभ, घंटियां, पल्लव, श्रीफल युक्त कलश और देवी-देवताओं की उकेरी गई मूर्तियों का उल्लेख किया गया. इसके अलावा संस्कृत श्लोक, शिलालेख और धार्मिक प्रतीकों के भी प्रमाण मिले. ASI ने इन सभी अवशेषों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई थी। 

सर्वे में जमीन के नीचे भी मंदिर जैसे ढांचे के संकेत मिलने की बात कही गई. परिसर में एक हवनकुंड मिलने का भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है. अदालत ने कहा कि इन सभी साक्ष्यों से यह साबित होता है कि यह स्थल हिंदू धार्मिक और शैक्षणिक परंपरा से जुड़ा रहा है. हाईकोर्ट ने ASI के वर्ष 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया जिसमें हिंदुओं के पूजा अधिकारों को सीमित किया गया था जबकि मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी. अदालत ने कहा कि ऐसा आदेश समानता और धार्मिक अधिकारों के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। 

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. साथ ही परिसर की पवित्रता, धार्मिक स्वरूप और कानून व्यवस्था बनाए रखना भी सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है. अदालत ने अपने निष्कर्ष में कहा कि भोजशाला में हिंदू पूजा की परंपरा कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। 

हिंदुओं के पूजा अधिकारों पर लगी रोक हटाई गई
इसके अलावा कोर्ट ने माना कि ऐतिहासिक साहित्य और उपलब्ध साक्ष्य यह स्थापित करते हैं कि यह स्थल परमार राजवंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था. इसी के साथ हाईकोर्ट ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की रिट याचिका संख्या 10497/2022 और कुलदीप तिवारी की याचिका संख्या 10484/2022 का निपटारा करते हुए विस्तृत निर्देश जारी किए. फैसले के बाद भोजशाला विवाद को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है और अब आगे सरकार के कदमों पर सभी की नजर बनी हुई है। 

युवाओं को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक अभियान है शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना: राज्यमंत्री गौर

युवाओं को सशक्त बनाने का ऐतिहासिक अभियान है शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना: राज्यमंत्री गौर

शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना का हुआ शुभारंभ
भोपाल, नर्मदापुरम और रायसेन के चयनित अभ्यर्थियों को वितरित की किट
पहली बार ओबीसी छात्रावासों में फ्री मेस, दिल्ली छात्रगृह योजना की राशि 1550 से बढ़ाकर 10 हजार

भोपाल 

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने शुक्रवार को अपेक्स बैंक परिसर के समन्वय भवन में ‘शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना’ का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया और विधायक श्री भगवानदास सबनानी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में योजना के अंतर्गत भोपाल, नर्मदापुरम और रायसेन जिले के चयनित अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया, जिन्हें राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने प्रशिक्षण किट वितरित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने युवाओं का स्वागत करते हुए इसे अपने राजनीतिक जीवन का एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हमने यह प्रण लिया था कि पिछड़ा वर्ग के युवाओं का जीवन बेहतर बनाने के लिए हम कुछ ठोस करेंगे और यह योजना युवाओं को सशक्त बनाने का एक बड़ा अभियान है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बताया कि 45 दिन तक चलने वाली यह विभाग की पहली ऐसी रोजगार परक प्रशिक्षण योजना है, जो ओबीसी अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, शौर्य, समर्पण और संकल्प का ज्ञान भी देगी। हमारी योजना का नाम ही ‘शौर्य और संकल्प’ है, जो अपने आप में एक प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नियत किए गए विकास के 4 स्तंभों में युवाओं को एक अहम स्तंभ बताते हुए मंत्री श्रीमती गौर ने युवा शक्ति का आह्वान किया कि वे किसी के भ्रम में न आएं। हमारी केंद्र और राज्य सरकार कौशल, संकल्प और प्रेरणा के जरिए युवाओं को निखारने का काम कर रही है, जो राष्ट्रसेवा की सशक्त राह पर आगे बढ़ाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करते हुए मंत्री श्रीमती गौर ने विभागीय उपलब्धियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार ओबीसी हॉस्टल में ‘मेस’ की सुविधा शुरू होने जा रही है, जहां विद्यार्थियों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संवेदनशीलता है कि ‘दिल्ली छात्रगृह योजना’ की सहायता राशि को 1,550 रुपए से बढ़ाकर सीधे 10 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। इसके अलावा छात्राओं को बेहतर वातावरण देने के लिए 31 कन्या छात्रावासों को ‘आदर्श छात्रावास’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूरे देश में मध्यप्रदेश पहला राज्य और हमारा विभाग पहला विभाग है, जो ‘सोशल इंपैक्ट बॉन्ड’ के माध्यम से युवाओं को ट्रेनिंग देकर विदेश भेजने की तैयारी कर रहा है। ‘सरदार पटेल कोचिंग योजना’ के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर ओबीसी विद्यार्थियों को नीट, क्लैट और जेईई जैसी परीक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का संकल्प हमारी सरकार ने किया है।

कार्यक्रम में महापौर श्रीमती मालती राय ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार मानते हुए कहा कि राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने ओबीसी वर्ग के छात्रों की बेहतरी के लिए एक शानदार योजना को जमीन पर उतार दिया है। मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि राज्यमंत्री श्रीमती गौर के प्रयासों से ही आज यह ऐतिहासिक योजना मूर्त रूप ले रही है। विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि ‘शौर्य संकल्प प्रशिक्षण’ जैसी योजना देशभर में केवल मध्यप्रदेश सरकार ने ही शुरू की है। इससे प्रतीक होता है कि सरकार सभी वर्गों के विकास के प्रति कितनी संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ रही है।

आयुक्त पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण श्री सौरभ सुमन ने बताया कि इस योजना के लिए कुल 6,687 आवेदन प्राप्त हुए थे। पारदर्शी स्क्रीनिंग के बाद 3,664 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के लिए अंतिम रूप से चयनित किया गया है, जिनमें 2,030 छात्र और शेष छात्राएं शामिल हैं। इन चयनित अभ्यर्थियों को सैद्धांतिक और प्रैक्टिकल शिक्षा दी जाएगी। इसके अलावा, आधुनिक तरीके से तैयारी करने के लिए ‘ऐप बेस्ड ट्रेनिंग मटेरियल’ भी उपलब्ध रहेगा। आयुक्त श्री सुमन ने छात्रों को विश्वास दिलाया कि योजना की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अगर आवश्यकता हुई तो मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बाद अन्य जिलों तक इस योजना का विस्तार किया जाएगा और सीटों की संख्या में भी विस्तार किया जाएगा।

 

गुरुदेव के आशीर्वाद से ही सनातन और सत्य मार्ग का अनुसरण करने की प्रेरणा मिलती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गुरुदेव के आशीर्वाद से ही सनातन और सत्य मार्ग का अनुसरण करने की प्रेरणा मिलती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में जय गुरुदेव आश्रम में गुरुदेव से की भेंट गुरुदेव के अमृत प्रवचन का श्रवण किया
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाखों अनुयायियों को संबोधित किया
मुख्यमंत्री डॉ. यादव लोक कल्याणकारी कार्यों से अब जनता के हो गए है लाडले : गुरुदेव उमाकांत महाराज
जय गुरुदेव आश्रम उज्जैन में सिंहस्थ जैसा नजारा, स्व अनुशासन से अनुशासित लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब
उज्जैन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में जय गुरुदेव आश्रम में गुरुदेव महाराज से भेंट कर आशीर्वाद लिया और उनके अमृत प्रवचनों का श्रवण किया। गुरुदेव उमाकांत जी महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आशीर्वाद देते हुए कहा कि सदा ऐसे ही समाज की सेवा में लगे रहे और सत्य, सनातन, अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए जन सेवा करते रहें। आज आप अपने कार्यों से जनता के प्यारे बन गए है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुदेव के निर्देश पर मंच से ही गुरुदेव के अनुयायियों को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा गुरुदेव की उज्जैन में आना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरुवर को देखकर ऐसा लगता है कि स्वयं ईश्वर को देख लिया हो, यह आश्रम परमात्मा का घर है, परमात्मा का आशीर्वाद है कि हमें गुरुवर का आशीर्वाद उनके स्वरूप में मिल रहा है और जीवन में सत्य कार्य करने का जो मार्गदर्शन हमें गुरुवर के चरणों से मिलता है उसे जीवन जीने का नया मार्ग हमें प्राप्त होता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराज जी का आशीर्वाद चिर काल तक हम सभी को मिलता रहे और आनंद के साथ जीवन का यापन करें।

सनातन धर्म में मान्यता है कि 84 लाख योनियों के बाद हमें यह मानव जीवन मिलता है। इस मानव जीवन को सही तरीके से जीने का जो मार्ग आपके द्वारा बताया जाता है उससे जीवन सरल और संयमित होकर जीने का मार्ग मिल जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा की महाराज जी की कृपा से हमने प्रदेश में गौशालाओं को बनाने और संरक्षण देने का काम कर रहे हैं। उज्जैन सहित अन्य धार्मिक नगरों में भी शराब बंदी के लागू की है और प्रदेश में उज्जैन ओंकारेश्वर, महेश्वर दतिया, पीतांबरा पीठ, सलकनपुर, ओरछा, चित्रकूट सहित 19 नगर में शराबबंदी का आदेश भगवत कृपा से ही हो पाया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 में उज्जैन को हम मेट्रो सिटी के साथ-साथ आध्यात्मिक, सांस्कृतिक नगरी के रूप में भी स्थापित कर पाएंगे। उज्जैन अब धार्मिक नगरी के साथ उत्सव की नगरी भी हो गई है गुरुदेव की कृपा से अब हम हर जिले में गीता भवन बना रहे हैं, जहां पर भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों का वाचन और आध्यात्मिक अध्ययन भी हो सकेगा। भगवान श्रीकृष्ण के अनुयायी होते हुए हम सब गोपालन को भी अपना रहे हैं और गोपालक परिवारों को आर्थिक सहायता भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के साथ देश के अलग अलग जगहों से आए भक्त जय गुरुदेव आश्रम के माध्यम से भक्ति मार्ग की ओर आगे बढ़ रहे हैं। गुरुदेव के आशीर्वाद से ही हम प्रदेश की जनता की समर्पित भाव से सेवा में लगे हैं। महाराज गुरुदेव का आशीर्वाद और उनका मार्गदर्शन सदैव मिलता है।

 

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