इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल डेका

इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल डेका
 
वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को मिल रहा है लाभ – मुख्यमंत्री साय

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 11 वें दीक्षांत समारोह मे शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री

1880 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 13 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक मिले

रायपुर 
छत्तीसगढ़ की लगभग 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। आज भूमि लगातार संकुचित होती जा रही है। अतएव हमें कम जमीन में ज्यादा से ज्यादा उत्पादन के लिए कार्य करना होगा। अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के लिए वैल्यू एडिशन उत्पादन आज की महती आवश्यकता है।

राज्यपाल रमेन डेका एवं कुलाधिपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में यह बात कही। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के पूर्व निदेशक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह उपस्थित थे ।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सभागार में आयोजित भव्य एवं गरिमामय दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को पदक एवं उपाधियां वितरित की गई। विभिन्न संकायों में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को 13 स्वर्ण, 7 रजत एवं 2 कांस्य पदक सहित 128 शोधार्थियों को पी.एच.डी, 518 विधार्थियों को स्नातकोत्तर और 1234 विधार्थियों को स्नातक उपाधि प्रदान की गई।

कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल रमेन डेका ने इन उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्र जीवन का एक बहुत बड़ा अवसर होता है। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का दिन नही बल्कि भविष्य की शुरूआत का प्रतीक है। जब यह विश्वविद्यालय स्थापित हुआ था तब यहां केवल दो या तीन स्ट्रीम ही उपलब्ध थी। लेकिन समय के साथ शिक्षा और अवसरों का विस्तार हुआ है। 

डेका ने कहा कि आज कृषि परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। अब यह विज्ञान तकनीकी, नवाचार और उद्यमिता से संचालित हो रही है। विश्वभर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, उपग्रह मानचित्र, सटीक कृषि जलवायु अनुकूल तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण का उपयोग बढ़ रहा है। 

 भारत भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। ड्रोन द्वारा उर्वरक एवं कीटनाशक छिड़काव, डिजिटल उपकरणों से मृदा स्वास्थ्य निगरानी, मोबाइल ऐप द्वारा किसान परामर्श और ई-नाम बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं। किसानों और युवाओं को भी आधुनिक और उन्नत खेती की ओर बढ़ना चाहिए। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। लेकिन अब हमें बासमती जैसे उच्च गुणवत्ता वाले धान के उत्पादन पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे कार्पोरेट कंपनियों द्वारा खरीद आसान होगी और किसानों को बेहतर लाभ मिल सकेगा। हाइड्रोपोनिक्स और प्राकृतिक खेती के लिए भी भविष्य में बड़ी संभावनाएं है। विद्यार्थियों को भी कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।  

डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि और जल संरचना कृषि के लिए अनुकूल है। यहां पानी आसानी से नीचे नहीं जाता जिससे उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है। सही तकनीक और सोच के साथ कृषि को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है तथा वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन,फल-सब्जी और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, कृषि उपकरणों की उपलब्धता तथा मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों से ड्रोन, एआई और डिजिटल तकनीकों को खेती से जोड़कर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सेतु बनने का आव्हान किया।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रदेश में कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान की सबसे ज्यादा प्रजातियां है। सुगन्धित धान के लिए हमारा राज्य जाना जाता है। फल, फूल और मसाले की भी अपार संभावनाएं यहां है। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के ज्ञान का लाभ छत्तीसगढ़ को मिलेगा।

 समारोह में दीक्षांत भाषण डॉ. अशोक कुमार सिंह ने दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया उन्होंने विश्वविद्यालय की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। साथ ही उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षा उपदेश दिया। आभार प्रदर्शन कुलसचिव द्वारा किया गया। दीक्षांत समारोह में क्षेत्र के विधायक पद्मअनुज शर्मा, विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति, विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल, विद्या परिषद तथा प्रशासनिक परिषद के सदस्यगण, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के अधिकारी, उपाधि तथा पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तथा उनके पालकगण उपस्थित थे।

कौन हैं Kuldeep Tiwari? लखनऊ से धार आकर सालों तक लड़ी मंदिर की लड़ाई, अब मिली बड़ी जीत

इंदौर.

धार की ऐतिहासिक नगरी से उठी न्याय की गूंज ने आज पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इंदौर हाई कोर्ट का वह ऐतिहासिक फैसला, जिसने सदियों से चले आ रहे संशय के कुहासे को छांटते हुए भोजशाला को स्पष्ट रूप से ‘मंदिर’ के स्वरूप में परिभाषित कर दिया है, महज एक कानूनी आदेश नहीं बल्कि करोड़ों आस्थावानों के धैर्य की विजय है।

लेकिन इस विजय गाथा के पीछे एक ऐसा नाम है, जिसने कानून की बारीकियों को अपनी साधना बनाया और साक्ष्यों के अंबार से सत्य को बाहर खींच लाया। वह नाम है अधिवक्ता कुलदीप तिवारी।

कौन हैं कुलदीप तिवारी?
कुलदीप तिवारी केवल एक वकील नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत के पुनरुद्धार के लिए समर्पित एक ‘कानूनी सेनानी’ के रूप में उभरे हैं। ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के माध्यम से उन्होंने धर्म और न्याय के बीच एक ऐसा सेतु बनाया है, जिसने इतिहास के धूल धूसरित पन्नों को फिर से पलटने पर मजबूर कर दिया। जब लोग केवल चर्चाओं में व्यस्त थे, तब कुलदीप तिवारी ने अदालतों की चौखट पर दस्तक दी। उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति की है जो दलीलों से ज्यादा, जमीन से जुड़े उन साक्ष्यों पर विश्वास करता है जिन्हें झुठलाया नहीं जा सकता। चाहे वह स्तंभों पर उकेरी गई नक्काशी हो या दीवारों पर मौन खड़े संस्कृत के शिलालेख, तिवारी ने हर एक प्रतीक को अदालत के समक्ष एक गवाह के रूप में खड़ा किया।

क्यों खास थी उनकी याचिका?
कुलदीप तिवारी की याचिका केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि ‘ऐतिहासिक न्याय’ की एक मार्मिक अपील थी। उन्होंने बहुत ही सुलझे हुए अंदाज में अदालत को यह समझाया कि किसी भी स्थान का धार्मिक स्वरूप उसकी बनावट, उसके मूल चरित्र और वहां सदियों से चली आ रही परंपराओं से तय होता है। उनका तर्क बड़ा सरल था “सत्य कभी पराजित नहीं होता, वह केवल समय के फेर में ओझल हो जाता है।” उन्होंने वैज्ञानिक साक्ष्यों की मांग की, एएसआई (ASI) सर्वे की पैरवी की और तकनीकी तकनीकों जैसे ‘ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार’ (GPR) के महत्व को समझाया। उनकी इसी समझाइश का नतीजा था कि कोर्ट ने आधुनिक वैज्ञानिक पद्धति से जांच के आदेश दिए, जिसकी रिपोर्ट ने आज इस फैसले की नींव रखी।

सत्य परेशान हो सकता है किंतु पराजित नहीं।
भोजशाला का निर्णय हमारे ही पक्ष में आएगा – कुलदीप तिवारी
याचिकाकर्ता – भोजशाला प्रकरण #भोजशाला #dhar #indore #Bhojshala #Kuldeep_Tiwari pic.twitter.com/3csscSEVLQ
— Kuldeep Tiwari (@kuldeep1805) May 13, 2026

भोजशाला: राजा भोज की ज्ञान स्थली और वाग्देवी का वास
कुलदीप तिवारी ने अपनी विशेष दलीलों में हमेशा इस बात पर जोर दिया कि धार की यह भोजशाला परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित एक अद्वितीय विश्वविद्यालय और माता सरस्वती (वाग्देवी) का पावन मंदिर है। उन्होंने इतिहास के लच्छेदार वृत्तांतों से परे जाकर वास्तुशिल्प के उन प्रमाणों को पेश किया, जो यह चीख-चीख कर कहते हैं कि इस परिसर की आत्मा विशुद्ध रूप से सनातनी है। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद, जिसमें परिसर को ‘मंदिर’ माना गया है, कुलदीप तिवारी का नाम इतिहास में उस सूत्रधार के रूप में दर्ज हो गया है जिसने कानूनी अस्त्रों से आस्था के मंदिर की रक्षा की।
न्याय की दहलीज पर एक अटूट संकल्प
कुलदीप तिवारी की यह यात्रा आसान नहीं थी। उन्हें कई मोर्चों पर विरोध और चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका ‘समझाइश वाला लहजा’ और ‘कानूनी संयम’ कभी नहीं डगमगाया। वे अक्सर कहते हैं कि यह लड़ाई किसी समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि उस सत्य के पक्ष में है जो इतिहास की विसंगतियों के कारण कहीं खो गया था।

भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर मानकर इसकी सदियों पुरानी पहचान को पुनर्स्थापित किया – सचिन दवे

भोजशाला पर हाईकोर्ट का फैसला : 

 भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर मानकर इसकी सदियों पुरानी पहचान को पुनर्स्थापित किया – सचिन दवे 

धार

भोजशाला से जुड़ा विवाद वर्षों से भारतीय इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र में रहा है। आज हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय, जिसमें भोजशाला को वाग्देवी अर्थात मां सरस्वती का मंदिर माना गया, ने इस विषय को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह फैसला केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं  की भावनाओं, ऐतिहासिक मान्यताओं और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा हुआ विषय बन गया है। कई लोगों के लिए यह भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का क्षण है। आज धार शहर के साथ ही मध्यप्रदेश और सम्पूर्ण भारतवर्ष के सभी सुधिजन इस फैसले पर हर्ष व्यक्त कर रहे हैं, जो की भोजशाला की गरिमा की पुनःस्थापना और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का परिचायक है।

ज्ञातव्य है की भोजशाला मध्य प्रदेश के धार शहर में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है। माना जाता है कि इसका संबंध परमार वंश के महान राजा भोज से है, जिन्हें भारतीय इतिहास में विद्या, कला और संस्कृति के संरक्षक के रूप में याद किया जाता है। राजा भोज केवल एक शासक नहीं थे, बल्कि वे एक महान विद्वान, साहित्यकार और स्थापत्य प्रेमी भी थे। इतिहासकारों के अनुसार, भोजशाला उस काल में शिक्षा, संस्कृत अध्ययन और विद्या साधना का प्रमुख केंद्र थी। यहां मां वाग्देवी अर्थात सरस्वती की आराधना की जाती थी और देशभर से विद्वान अध्ययन एवं शास्त्रार्थ के लिए यहां आते थे।

भोजशाला की वास्तुकला और वहां पाए गए अनेक शिलालेख, मूर्तियां तथा पुरातात्विक अवशेष इसकी प्राचीन सांस्कृतिक पहचान की ओर संकेत करते हैं। संस्कृत भाषा के शिलालेख, देवी सरस्वती से जुड़े प्रतीक और मंदिर शैली की संरचना लंबे समय से यह दावा मजबूत करते रहे हैं कि यह स्थान मूल रूप से एक मंदिर और विद्या केंद्र था। इसी कारण बड़ी संख्या में लोग इसे भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन संस्कृति का प्रतीक मानते हैं।

सभी जानते ही हैं की समय के साथ यह स्थल विवाद का विषय बन गया अथवा बना दिया गया। विभिन्न समुदायों द्वारा इस स्थान को अलग-अलग धार्मिक पहचान से जोड़ा गया और यही कारण रहा कि यह मामला अदालत तक पहुंचा। वर्षों से इस विषय पर कानूनी लड़ाई चल रही थी। अनेक याचिकाएं दायर की गईं, पुरातत्व सर्वेक्षण की मांग हुई, ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत किए गए और विभिन्न पक्षों ने अपने-अपने दावे अदालत के सामने रखे। अंततः विस्तृत सुनवाई और तथ्यों के अध्ययन के बाद हाईकोर्ट का यह निर्णय सामने आया है जिसने सभी आशंकाओं पर पूर्णविराम लगते हुए भोजशाला को माँ वाग्देवी का मंदिर मानकर इसकी सदियों पुरानी पहचान को पुनर्स्थापित किया है। 

यह फैसला कई मायनों में ऐतिहासिक हैं क्योंकि यह केवल एक भवन की पहचान तय करने का विषय नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ा हुआ मामला है। लंबे समय से जो लोग भोजशाला को मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानते रहे, उनके लिए यह निर्णय आस्था और विश्वास की पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश और देशभर के सनातन समाज में इस निर्णय के बाद प्रसन्नता और संतोष का वातावरण दिखाई  दे रहा है।

भोजशाला का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं है, बल्कि यह भारतीय शिक्षा और ज्ञान परंपरा का भी प्रतीक है। प्राचीन भारत में शिक्षा को आध्यात्मिकता और संस्कृति से जोड़ा जाता था। मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं होते थे, बल्कि वे ज्ञान, कला, संगीत, साहित्य और दर्शन के केंद्र भी होते थे। भोजशाला इसी परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए यह फैसला भारतीय सभ्यता के उस गौरवशाली अध्याय की याद दिलाता है, जब भारत विश्व में ज्ञान और संस्कृति का अग्रणी केंद्र था।

इस पूरे विवाद में पुरातत्व विभाग की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए गए अध्ययन और विभिन्न ऐतिहासिक प्रमाणों ने इस स्थल की प्राचीनता और सांस्कृतिक महत्व को समझने में मदद की। अदालत ने भी अपने निर्णय में तथ्यों, ऐतिहासिक साक्ष्यों और प्रस्तुत दस्तावेजों को गंभीरता से परखा। यही कारण है कि यह फैसला केवल भावनाओं पर आधारित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे एक विस्तृत न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम कहा जा रहा है।

हालांकि, ऐसे संवेदनशील मामलों में समाज की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। भारत विविधताओं का देश है, जहां अनेक धर्म, परंपराएं और मान्यताएं साथ-साथ रहती हैं। इसलिए किसी भी न्यायिक निर्णय के बाद सामाजिक सौहार्द बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। लोकतंत्र की शक्ति इसी में है कि सभी पक्ष कानून और संविधान का सम्मान करें तथा शांति और भाईचारे की भावना बनाए रखें। इतिहास को समझना और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ सामाजिक समरसता भी उतनी ही आवश्यक है।
भोजशाला का मुद्दा यह भी दर्शाता है कि भारत में सांस्कृतिक विरासत को लेकर लोगों की भावनाएं कितनी गहरी हैं। आज का भारत केवल आर्थिक और तकनीकी प्रगति की ओर नहीं बढ़ रहा, बल्कि अपनी ऐतिहासिक जड़ों और सांस्कृतिक पहचान को भी पुनः समझने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में भोजशाला जैसे विषय लोगों को अपने अतीत, अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हैं।

कई इतिहासकारों और सांस्कृतिक चिंतकों का मानना है कि भारत के प्राचीन शिक्षा केंद्रों, मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। भोजशाला का महत्व इसी कारण और बढ़ जाता है क्योंकि यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। यदि इस स्थल का संरक्षण और अध्ययन व्यवस्थित रूप से किया जाए, तो यह आने वाले समय में भारतीय इतिहास और संस्कृति के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

अंततः, भोजशाला पर आया यह फैसला अनेक लोगों के लिए गौरव, संतोष और सांस्कृतिक आत्मविश्वास का क्षण है। यह निर्णय भारतीय इतिहास, आस्था और न्यायिक प्रक्रिया के संगम का उदाहरण बनकर सामने आया है। साथ ही, यह हमें यह भी याद दिलाता है कि किसी भी सभ्यता की शक्ति केवल उसके वर्तमान में नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक स्मृति और ऐतिहासिक चेतना में भी निहित होती है। भारत जैसे प्राचीन राष्ट्र के लिए अपनी विरासत का सम्मान करना केवल भावनात्मक विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक निरंतरता का प्रश्न भी है। भोजशाला का यह अध्याय आने वाले समय में भी इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान के संदर्भ में महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बना रहेगा। 

सचिन दवे- 09827308286
भोजशाला मुक्ति आंदोलन के पूर्व मिडिया प्रभारी 
पूर्व कार्य परिषद सदस्य विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन
 पूर्व केंद्रीय कार्य समिति सदस्य ABVP 
पूर्व राष्ट्रीय प्रमुख एवं राष्ट्रीय संयोजक SFD

भोजशाला विवाद पर मप्र हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, परिसर को माना मंदिर; मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन देने के निर्देश

धार.

मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में जज ने फैसला पढ़ते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। कोर्ट के फैसले में परिसर को मां वाग्देवी के मंदिर के रूप में माना गया है। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को अलग से जमीन दी जाएगी।

फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा बढ़ी
फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी तरह सतर्क और हाई अलर्ट पर हैं। मामले पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने अंतरसिंह की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि दोनों पक्षों में सौहार्द बना रहे, इस तरह की व्यवस्था का आदेश दिया जाए। मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिला। भोजशाला का फैसला हिंदू पक्ष में आते ही इंदौर के हाईकोर्ट गेट 3 के सामने समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।

कड़ी सुरक्षा में हुई नमाज
धार की ऐतिहासिक भोजशाला में शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच में नमाज हुई। शांतिपूर्ण तरीके से नमाज हो चुकी है और अधिकांश मुस्लिम अपने इलाकों में पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने बीती रात से ही अधिक मात्रा में पुलिस बल बुला लिया था। दूसरी ओर अब भोजशाला के बाहर ज्योति मंदिर पर बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग एकत्रित हो रहे हैं।

युगल पीठ ने सुरक्षित रख लिया था फैसला
इससे पहले छह अप्रैल से चली नियमित सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति आलोक कुमार अवस्थी और न्यायमूर्ति वीके शुक्ला की युगल पीठ ने बीती 12 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के साथ ही अरशद वारसी और शोभा मेनन ने पक्ष रखा था। मंदिर पक्ष की ओर से विष्णु शंकर जैन और मनीष गुप्ता ने तर्क प्रस्तुत किए थे।

फैसले से पहले आइसक्रीम पार्टी आयोजित
महत्वपूर्ण फैसला आने से ठीक पहले हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा एक आइसक्रीम पार्टी आयोजित की गई है। गौरतलब है कि हाई कोर्ट में हर साल ग्रीष्म अवकाश शुरू होने के ठीक पहले अंतिम कार्य दिवस पर अभिभाषक संघ द्वारा आइसक्रीम पार्टी आयोजित की जाती है। हाई कोर्ट और जिला कोर्ट में ग्रीष्म अवकाश शनिवार से शुरू हो रहे हैं, जो लगभग एक माह के होंगे। अवकाश में आपराधिक और अर्जेंट मामलों की सुनवाई हो सकेगी।

क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र मानता था, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता था। वहीं जैन समुदाय के एक पक्ष का दावा था कि यह मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था।

चार साल से चल रही थी सुनवाई
दरअसल, हिंदू पक्ष की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर भोजशाला को मंदिर घोषित करने तथा हिंदू समाज को वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की गई थी। इस मामले में पिछले चार वर्षों से सुनवाई चल रही थी।

MP में भड़काऊ वीडियो पर बड़ा एक्शन, संस्कृति बचाओ मंच अध्यक्ष के खिलाफ FIR दर्ज

भोपाल 
 एमपी की राजधानी भोपाल में इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां भड़काऊ वीडियो मामले में संस्कृति बचाओ मंच अध्यक्ष पर एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। दरअसल, संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और पुलिस कमिश्नर के आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप लगे है। यहां टी.टी. नगर थाने में मामला दर्ज किया गया है।

क्या है पूरा मामला?
पुलिस को सूचना मिली थी कि चंद्रशेखर तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया है। इस वीडियो में उन्होंने गोविंदपुरा क्षेत्र में हुई एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कथित तौर पर भड़काऊ टिप्पणी की थी। पुलिस का कहना है कि इस वीडियो के कारण दो समुदायों के बीच तनाव पैदा होने और शांति भंग होने की स्थिति बन रही थी।

इन धाराओं में हुआ मामला दर्ज:
* धारा 163 (BNSS): भोपाल पुलिस कमिश्नर द्वारा लागू किए गए प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन के लिए।
* धारा 223(A) (BNS): सरकारी लोक सेवक द्वारा जारी आदेश की अवहेलना करने के लिए।

पुलिस ने बताया कि शहर की शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 163 पहले से ही प्रभावी है, जिसके तहत किसी भी समुदाय के विरुद्ध उत्तेजना फैलाने वाले भाषण या कार्यक्रम प्रतिबंधित हैं। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर आज करेंगी ‘शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना’ का शुभारंभ, मप्र पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. कुसमरिया भी होंगे शामिल

राज्यमंत्री श्रीमती गौर आज करेंगी ‘शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना’ का शुभारंभ, मप्र पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. कुसमरिया भी होंगे शामिल

20 जिलों के 4000 ओबीसी युवाओं को सेना और पुलिस भर्ती के लिए मिलेगा 45 दिवसीय निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण

भोपाल 

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर शुक्रवार 15 मई 2026 को सुबह 11 बजे ‘शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना-2026’ का शुभारंभ करेंगी। अपेक्स बैंक परिसर स्थित समन्वय भवन में आयोजित कार्यक्रम में मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया और स्थानीय विधायक भगवानदास सबनानी उपस्थित रहेंगे। भोपाल, रायसेन और नर्मदापुरम जिलों के प्रतिभागी छात्र-छात्राएं भी कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य के लिए ये योजना विभाग द्वारा शुरू की गई है। यह योजना प्रदेश के 20 चयनित जिलों में संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य ओबीसी वर्ग के प्रतिभावान युवाओं को भारतीय सेना, पुलिस, होमगार्ड और अन्य अर्ध सैनिक बलों की भर्ती परीक्षाओं के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करना है। योजना में प्रदेश भर से चयनित 4000 प्रतिभागियों को जिला स्तर पर 45 दिनों का निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक जिले में 100-100 के बैच में पुरुष और महिला वर्ग के युवाओं को अलग-अलग केंद्रों पर प्रशिक्षित किया जाएगा।

राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने बताया कि युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम को बेहद वैज्ञानिक और सघन बनाया गया है। इसमें कुशल प्रशिक्षकों द्वारा प्रतिदिन 4 घंटे का सैद्धांतिक प्रशिक्षण और 3 घंटे का शारीरिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को निशुल्क आवास और भोजन के साथ स्टाइपेंड, अध्ययन सामग्री भी मिलेगी। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि यह योजना युवाओं के लिए एक ‘ऐतिहासिक सौगात’ है, जो न केवल उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करेगी बल्कि उनमें देश सेवा का जज्बा और अनुशासन भी पैदा करेगी।

 

मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी की खिलाड़ी का FIE Women’s Épée World Cup 2026 के लिए भारतीय टीम में चयन

भोपाल 

खेल एवं युवा कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश शासन के अंतर्गत संचालित म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी, भोपाल में आयोजित “24वीं कुमार सुरेंद्र सिंह मेमोरियल शूटिंग चैंपियनशिप 2026” के अंतर्गत आज 50 मीटर राइफल 3 पोजिशन (वुमेन) स्पर्धा का सफल आयोजन किया गया। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देशभर से आई महिला निशानेबाज़ों ने उत्कृष्ट तकनीकी कौशल, धैर्य एवं एकाग्रता का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी की खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया।

प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जिसमें अकादमी की युवा निशानेबाज़ों ने अपने आत्मविश्वास, अनुशासन और सटीक निशानेबाजी से सभी का ध्यान आकर्षित किया। खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने यह सिद्ध किया कि मध्यप्रदेश की खेल अकादमियाँ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

प्रथा राठौड़ ने जीता स्वर्ण एवं रजत पदक

50 मीटर राइफल 3 पोजिशन युथ महिला वर्ग में म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ी कु. प्रथा राठौड़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अर्जित किया। इसके साथ ही उन्होंने जूनियर वर्ग में रजत पदक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। वहीं सीनियर वर्ग में भी प्रथा ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए छठा स्थान हासिल किया। पूरे मुकाबले के दौरान उन्होंने संतुलित एवं प्रभावशाली निशानेबाजी का परिचय देते हुए अपनी तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती साबित की।

प्रार्थना सेन ने भी साधा पदक पर निशाना

अकादमी की होनहार खिलाड़ी कु. प्रार्थना सेन ने भी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए युथ वर्ग में रजत पदक अर्जित किया। इसके अतिरिक्त जूनियर वर्ग में उन्होंने पाँचवाँ स्थान प्राप्त कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। प्रतियोगिता में उनके निरंतर प्रदर्शन और आत्मविश्वास ने दर्शकों एवं विशेषज्ञों को प्रभावित किया।

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने दिखाया उत्कृष्ट कौशल

प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों, रेलवे, सेना एवं अन्य संस्थानों के खिलाड़ियों ने सहभागिता की। खिलाड़ियों ने उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धात्मक भावना के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता को रोमांचक बनाया। इस प्रकार की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ खिलाड़ियों को बड़े मंचों के लिए तैयार करने के साथ युवाओं में शूटिंग खेल के प्रति रुचि एवं अनुशासन विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

म.प्र. राज्य शूटिंग अकादमी लगातार खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएँ, वैज्ञानिक कोचिंग एवं उत्कृष्ट मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार कर रही है।

खेल मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी बधाई

समस्त पदक विजेता खिलाड़ियों को सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी निरंतर राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में प्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी नई उपलब्धियाँ हासिल करेंगे।

 

महंगाई का बड़ा झटका! पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम, भोपाल-इंदौर में जानें नए रेट

भोपाल
 विश्व संकट और ईरान-अमेरिका के बीच युद्द के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हुई है। लेकिन, अब इसका असर  भारत में भी दिखना शुरू हो गया है। दरअसल, आज यानी 15 मई से देशभर में पेट्रोल व डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ है। पेट्रोल पर 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 3.11 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, इंदोर और भोपाल में पेट्रोल व डीजल 3-3 रूपए मंहगा हुआ है। इसके चलते आमजनजीवन को एक बार फिर मंहगाई की मार झेलनी पड़ रही है।

इंदौर और भोपाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतें
एमपी के भोपाल और इंदौर में भी पेट्रोल व डीजल के दामों में बढ़ोतरी की गई है। यहां 3-3 रूपए की कीमत से पेट्रोल और डीजल मंहगा हुआ है। इंदौर में पेट्रोल की कीमत ₹106.58 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹109.58 प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं, डीजल की कीमत ₹91.97 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹94.97 प्रति लीटर की गई है। भोपाल में पेट्रोल 106.68 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 109.82 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं, डीजल की कीमत 91.87 रुपये प्रति लीटर थी, जो अब 94.98 रुपये हो गई है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
ईंधन की कीमतों में इस अचानक उछाल की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट संकट के कारण सप्लाई चेन में आई बाधा को माना जा रहा है। कच्चा तेल (Crude Oil) महंगा होने की वजह से घरेलू तेल कंपनियों ने इस बढ़े हुए बोझ को उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है। 15 मई से लागू हुए इन दामों ने आम जनता के घर का बजट बिगाड़ दिया है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना लंबी दूरी का सफर तय करते हैं।

फ्रांस की धरती पर चमकेगा एमपी का हुनर — खुशी दाभाडे करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

भोपाल 

मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी, भोपाल की प्रतिभाशाली खिलाड़ी खुशी दाभाडे का चयन प्रतिष्ठित FIE Women’s Épée World Cup के लिए भारतीय टीम में किया गया है। यह अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता 22 से 24 मई 2026 तक फ्रांस में आयोजित होगी। पूरे देश से केवल चार खिलाड़ियों का चयन इस प्रतियोगिता के लिए किया गया है, जिनमें मध्यप्रदेश की खिलाड़ी खुशी दाभाडे का नाम शामिल होना प्रदेश के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है। यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता को दर्शाती है, बल्कि मध्यप्रदेश में विकसित हो रही मजबूत खेल संस्कृति और उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था का भी प्रमाण है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखेगा मध्यप्रदेश का दम

खुशी दाभाडे ने अपनी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण के दम पर यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी, भोपाल में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही खुशी लगातार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करती रही हैं, जिसके आधार पर उनका चयन भारतीय टीम में किया गया है। अब वे फ्रांस में आयोजित इस प्रतिष्ठित विश्वस्तरीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। यह अवसर किसी भी खिलाड़ी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और खुशी के लिए यह उनके खेल कॅरियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

संघर्ष, समर्पण और मेहनत की प्रेरणादायक कहानी

साधारण परिवार से आने वाली खुशी दाभाडे की सफलता हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी माता एक नर्स के रूप में कार्यरत हैं और सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने खुशी के सपनों को पूरा करने में हर संभव सहयोग दिया। कठिन परिस्थितियों के बीच भी खुशी ने अपने लक्ष्य से कभी ध्यान नहीं हटाया और लगातार मेहनत करते हुए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सफर तय किया। उनकी यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयास और सही मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

अकादमी की आधुनिक सुविधाओं और प्रशिक्षण का सकारात्मक परिणाम

मध्यप्रदेश राज्य फेंसिंग अकादमी, भोपाल में खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, फिटनेस सपोर्ट और अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा खिलाड़ियों को बेहतर वातावरण और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। खुशी दाभाडे की यह सफलता अकादमी की सुदृढ़ प्रशिक्षण प्रणाली और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है।

प्रदेश के लिए गौरव एवं युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा

खुशी दाभाडे का भारतीय टीम में चयन मध्यप्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। उनकी उपलब्धि प्रदेश के उन युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। यह सफलता बताती है कि मध्यप्रदेश की खेल अकादमियां प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी शुभकामनाएँ

सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने खुशी दाभाडे को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं। राज्य शासन द्वारा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।

    

CM मोहन यादव के विजन से चमकेगा मध्यप्रदेश, ग्लोबल सिनेमा के जरिए दुनिया तक पहुंचेगी पहचान

भोपाल 
 मध्यप्रदेश के ग्रामीण पर्यटन और समृद्ध सांस्कृतिक वैभव को अब वैश्विक मंच पर एक नई और विशिष्ट पहचान मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी विजन और नेतृत्व में मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश तेजी से एक ‘ग्लोबल फिल्मिंग हब’ के रूप में स्थापित हो रहा है। इसी कड़ी में स्पेन के प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस ‘कलर्स कम्युनिकेशन ग्रुप’ द्वारा निर्मित अंतर्राष्ट्रीय टेलीविजन सीरीज़ “रूरल टूरिज्म ऑफ द वर्ल्ड” की शूटिंग प्रदेश के विभिन्न पर्यटन अंचलों में हुई। इस गौरवशाली पहल से मध्यप्रदेश की अनूठी जीवन शैली और पर्यटन स्थलों का प्रदर्शन दुनिया के 80 से अधिक देशों में किया जाएगा, जिससे राज्य की पर्यटन संभावनाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई उड़ान मिलेगी।

सावरवानी, धूसावानी, चिमटीपुर और तामिया की जनजातीय परंपरा का हुआ फिल्मांकन
अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के तहत छिंदवाड़ा जिले की नैसर्गिक सुंदरता और यहां की जीवंत जनजातीय संस्कृति ने स्पेनिश फिल्म क्रू को गहराई से प्रभावित किया है। टीम ने जिले के सावरवानी, धूसावानी, चिमटीपुर और तामिया क्षेत्र में प्रवास कर ग्रामीण जीवन, स्थानीय परंपराओं और पातालकोट की विशिष्ट जीवन शैली को कैमरे में कैद किया। विशेष रूप से पातालकोट में संपन्न जनजातीय विवाह की पारंपरिक रस्मों और प्राकृतिक सौंदर्य का फिल्मांकन किया गया है। स्पेनिश डायरेक्टर जुआन फ्रूटोस ने धूसावानी होमस्टे में मिले आत्मीय आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा कि यदि कोई वास्तविक भारत की जड़ों को जानना चाहता है, तो उसे मध्यप्रदेश के इन गांवों का अनुभव अवश्य लेना चाहिए।

स्पेन में हुए एमओयू के मिल रहे सुखद परिणाम

यह महत्वपूर्ण उपलब्धि इसी वर्ष जनवरी-2026 में स्पेन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मेले ‘FITUR मैड्रिड 2026’ के दौरान हुए रणनीतिक समझौतों और एमओयू (MoU) का सुखद परिणाम है। पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैया राजा टी. और अपर प्रबंध संचालक अभय अरविंद बेडेकर के मार्गदर्शन में प्रदेश को एक ‘फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन’ के रूप में वैश्विक पटल पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस सीरीज़ में न केवल ग्रामीण संस्कृति, बल्कि सांची स्तूप, भीमबेटका की गुफाएं, सतपुड़ा नेशनल पार्क और उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग जैसी ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक धरोहरों को भी शामिल किया गया है, जो प्रदेश के बहुआयामी पर्यटन वैभव को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेंगी।

मध्यप्रदेश बनेगा ग्लोबल फिल्मिंग हब
इस वैश्विक पहल से न केवल मध्यप्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग सुदृढ़ होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार, होमस्टे और हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों को भी भारी प्रोत्साहन मिलेगा। कलेक्टर छिंदवाड़ा श्री हरेंद्र नारायन एवं जिला प्रशासन के समन्वय से संपन्न हुई यह शूटिंग राज्य को विश्व सिनेमा के मानचित्र पर एक जीवंत और सांस्कृतिक कैनवास के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में ऐसे अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश का पर्यटन क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छुएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा।

मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा शूटिंग के लिए आवश्यक अनुमति, लॉजिस्टिक सहयोग, सुरक्षा व्यवस्था और ऑन-ग्राउंड समन्वय उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पहल राज्य को “फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन” के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। बीते कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश ने फिल्म पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। बॉलीवुड फिल्मों, वेब सीरीज़ और अंतर्राष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट्स के लिए प्रदेश लगातार पसंदीदा लोकेशन बन रहा है। इससे न केवल राज्य की वैश्विक ब्रांडिंग मजबूत हो रही है, बल्कि स्थानीय रोजगार, ग्रामीण पर्यटन और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिल रहा है। मध्यप्रदेश आज केवल “टाइगर स्टेट” नहीं, बल्कि विश्व सिनेमा के लिए प्रकृति, संस्कृति, अध्यात्म और अनुभवों से भरा एक जीवंत कैनवास बन चुका है।

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