नरसिंहपुर में रिश्वतखोरी पर बड़ा एक्शन, SDM कार्यालय का स्टेनो 30 हजार रुपये लेते गिरफ्तार

जबलपुर
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की जबलपुर शाखा ने गुरुवार को नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा एसडीएम कार्यालय में बड़ी ट्रैप कार्रवाई करते हुए स्टेनो सौरभ यादव को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी पर कॉलोनी निर्माण के नक्शे की रिपोर्ट आगे बढ़ाने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है। कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

यह है मामला
ईओडब्ल्यू के अनुसार तेंदूखेड़ा निवासी संजय राय ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने कॉलोनी निर्माण के प्रस्तावित नक्शे पर स्थल निरीक्षण रिपोर्ट लगाने के लिए एसडीएम कार्यालय में आवेदन दिया था। आरोप है कि फाइल को लंबे समय से बिना कारण लंबित रखा गया और काम आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग की गई।

शिकायतकर्ता के मुताबिक जब उन्होंने कार्यालय में संपर्क किया तो स्टेनो सौरभ यादव ने 30 हजार रुपये देने पर फाइल आगे बढ़ाने की बात कही। शिकायत मिलने के बाद ईओडब्ल्यू ने पूरे मामले का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और आरोपी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।

ईओडब्ल्यू ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

शिकायतकर्ता ने SDM पर भी लगाए आरोप
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब शिकायतकर्ता संजय राय ने एसडीएम पूजा सोनी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि स्टेनो केवल माध्यम था और रिश्वत की मांग कथित तौर पर एसडीएम के निर्देश पर की जा रही थी।

संजय राय ने आरोप लगाया कि स्टेनो ने उन्हें बताया था कि रिश्वत की राशि के अलावा एसडीएम कार्यालय के रेनोवेशन, पेंट और अन्य खर्चों के लिए भी दबाव बनाया जा रहा था। शिकायतकर्ता का कहना है कि वे कई दिनों से भीषण गर्मी में कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।

Dewas Factory Blast: CM मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख मुआवजा देने का ऐलान किया

देवास
 पटाखा फैक्ट्री हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है। वहीं, कई लोगों की स्थिति गंभीर है, जिनका अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। सीएम मोहन यादव ने देवास की घटना पर दुख जताया है। साथ ही मृतक के परिजनों को 4-4 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा को मौके पर जाने के निर्देश दिए हैं।

हादसे की जांच के निर्देश दिए
दरअसल, देवास हादसे पर सीएम मोहन यादव ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है। हादसे की जानकारी लगते ही सीएम ने प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को घटना स्थल जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इस हादसे की जांच के आदेश भी दे दिए हैं।

डेप्युटी सीएम जगदीश देवड़ा को भी भेजा
हादसे को लेकर सीएम मोहन यादव ने कहा कि देवास जिले के टोंककला में पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में कई लोगों के हताहत होने का समाचार हृदय विदारक है। मैंने जिले के प्रभारी और उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, गृह सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों को घटना स्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। घटना की जांच के आदेश भी दिए हैं। घायलों का निःशुल्क इलाज करने के लिए निर्देश दिए हैं। बाबा महाकाल से दिवंगतों की शांति, शोकाकुल परिजनों को दुःख सहन करने की शक्ति तथा दुर्घटना में घायलों को त्वरित स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने की प्रार्थना करता हूं।

हिरासत में फैक्ट्री मालिक
वहीं, घटना के बाद फैक्ट्री मालिक अनिल मालवीय को पुलिस ने हिरासत में लिया है। अभी तक तीन मौतों की पुष्टि हुई है। वहीं, कई लोग घायल हुए हैं। 12 घायलों का इलाज देवास जिला अस्पताल, 8 का अमलतास अस्पताल, तीन का एमवॉयएच इंदौर और एक टी चोइथराम अस्पताल में इलाज चल रहा है। कुछ घायलों की स्थिति गंभीर है।

भोपाल में ट्विशा शर्मा के साथ आखिरी रात क्या हुआ? मैट्रिमोनियल साइट से हुई थी रिटायर्ड जज के वकील बेटे से शादी

भोपाल 

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स थाना अंतर्गत बाग मुगालिया एक्सटेंशन में रहने वाली ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में तनाव बढ़ गया है. ट्विशा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू थीं. उनकी मौत के दूसरे दिन 14 मई को भी शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका है. अभी शव भोपाल एम्स के मुर्दाघर (मोर्चरी) में रखा हुआ है. इस बीच उत्तर प्रदेश के नोएडा से भोपाल पहुंचे ट्विशा के परिजनों ने महिला थाने के बाहर जमकर हंगामा किया और निष्पक्ष जांच की मांग की। 

सास और पति पर हत्या के आरोप
भोपाल की कटारा हिल्स पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. प्रारंभिक शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर कई चोटों (मल्टीपल इंजरी) का उल्लेख है, जबकि मौत का तात्कालिक कारण फांसी बताया गया है. ट्विशा के परिजनों ने उनकी सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह पर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना देने और हत्या करने के आरोप लगाए हैं. मामले की जांच कटारा हिल्स थाना प्रभारी (TI) दुबे कर रहे हैं. परिजनों ने साक्ष्य मिटाने और पुलिस पर दबाव बनाने की आशंका जताते हुए पूरे मामले की फॉरेंसिक जांच की मांग की है। 

मैट्रिमोनियल साइट के जरिए हुई थी शादी
पुलिस जांच में सामने आया है कि 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं. मैट्रिमोनियल साइट ‘शादी डॉट कॉम’ के माध्यम से उनकी जान-पहचान भोपाल के क्रिमिनल लॉयर समर्थ सिंह से हुई थी. दोनों ने 12 दिसंबर 2025 को विवाह किया था. शादी से पहले ट्विशा दिल्ली में नौकरी करती थीं. जांच में यह भी पता चला है कि दो माह पहले उनका गर्भपात (मिसकैरेज) हुआ था. पुलिस अब हर पहलू से इस मामले की तफ्तीश कर रही है। 

 ट्विशा शर्मा की आखिरी रात की दास्तां
12 मई 2026 ट्विशा की जिंदगी की आखिरी रात साबित हुई. उनके पिता नवनिधि शर्मा के अनुसार, मंगलवार रात करीब 10:05 बजे ट्विशा ने नोएडा में अपनी मां से फोन पर बात की थी. उसने बताया था कि उसे बहुत परेशान किया जा रहा है और अब उससे यह सब सहन नहीं हो रहा. वह बात कर ही रही थी कि तभी उसका पति कमरे में आ गया और ट्विशा ने घबराहट में कॉल काट दिया. इसके बाद मां ने उसे कई बार फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. रात 10:20 बजे सास गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मां को सूचना दी कि ट्विशा सांस नहीं ले रही है और उसे भोपाल एम्स ले जाया जा रहा है। 

मध्यप्रदेश पुलिस ने विगत 2 सप्‍ताह में 2 करोड़ 26लाख रुपए से अधिक के गुम हुए 1021 मोबाइल फोन खोज कर वास्तविक मालिकों को लौटाएं

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों में आमजन की संपत्ति की सुरक्षा एवं गुम/चोरी हुए मोबाइल फोन की बरामदगी हेतु लगातार कार्यवाहियां की जा रहीं हैं। आधुनिक तकनीक, CEIR पोर्टल, साइबर विश्लेषण एवं स्थानीय आसूचना के प्रभावी उपयोग से विगत दो सप्‍ताह में मध्‍यप्रदेश पुलिस ने प्रदेश के विभिन्‍न जिलों में 1021मोबाईल फोन जिनकी कीमत लगभग 2 करोड़ 26लाख रूपए से अधिक है, नागरिको को लौटाये है। मोबाइल मालिकों ने अपने गुम हुए मोबाइल वापस मिलने पर मध्‍यप्रदेश पुलिस का हार्दिक आभार व्‍यक्‍त किया।

प्रमुख कार्यवाही

ग्वालियर

जिले में ‘’तेरा तुझको अर्पण’’अभियान के तहत ग्वालियर कीसाइबर सेल टीम द्वारा CEIR पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए विभिन्न राज्यों एवं शहरों से 571 गुम मोबाइल फोन जब्‍त किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 1 करोड़ 41 लाख रूपये है। साथ ही लावारिस मिले मोबाइलों को स्वयं साइबर सेल में जमा कराने वाले जागरूक नागरिकों को पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।

सतना

पुलिस द्वारा “ऑपरेशन रिंगटोन 2.0” के तहत CEIR पोर्टल की सहायता से 155 गुम मोबाइल फोन ट्रेस कर जब्‍त किए गए, जिनकी कीमत लगभग 29 लाख 31 हजार रूपये है।

गुना

पुलिस ने तकनीकी दक्षता एवं CEIR पोर्टल की सहायता से 64गुम मोबाइल फोन जब्‍त कर संबंधित धारकों को सुपुर्द किए हैं। जब्‍त मोबाइलों की अनुमानित कीमत लगभग 12 लाख 50 हजार रूपये है।

जबलपुर

जिले में साइबर सेल टीम द्वारा प्रभावी कार्यवाही करते हुए 106 गुम मोबाइल फोन (लगभग 18 लाख रूपए) जब्‍त किए गए।

आगर मालवा

पुलिस द्वारा “ऑपरेशन रिंगटोन” के तहत 81 गुम मोबाइल फोन जब्‍त कर उनके वास्तविक मालिकों को लौटाए गए। बरामद मोबाइलों की कुल कीमत 15 लाख रूपये से अधिक है। इस दौरान नागरिकों को साइबर सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड एवं यातायात नियमों के प्रति भी जागरूक किया गया।

बुरहानपुर

जिले के थाना लालबाग पुलिस ने मोबाइल शॉप में चोरी की घटना का खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्‍जे से एप्पल एवं अन्य कंपनियों के 3 मोबाइल फोन, 2 टैबलेट, 01 आईपोड एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सहित लगभग 3लाख 20 हजार रूपए से अधिक की संपत्ति जब्‍त की है।

रेलवे पुलिस

जीआरपी की विभिन्न इकाइयों द्वारा भी मोबाइल चोरी के मामलों में प्रभावी कार्यवाही की गई।

जीआरपी कटनी ने शातिर मोबाइल चोर गिरोह का भंडाफोड़ कर 10 मोबाइल फोन सहित लगभग 3 लाख 20 हजार रूपये की संपत्ति जब्‍त की है।

जीआरपी जबलपुर ने आरोपी से 67 हजार कीमत के 4 मोबाइल जप्त किए। वहीं जीआरपी-आरपीएफ उज्जैन ने मोबाइल चोरी का खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार करते हुए 18 मोबाइल फोन, जिनकी कीमत लगभग 1 लाख 88 हजार रूपये है, जब्‍त किए।

विदिशा

जिले की कोतवाली थाना पुलिस ने मोबाइल चोरी के मामले में त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर 1 लाख 50 हजार रूपए कीमत के चोरी हुए 6मोबाइल फोन जब्‍त किए।

इन समस्त कार्यवाहियों में CEIR पोर्टल, सिटीजन कॉप एप एवं साइबर सेल की तकनीकी जांच का महत्वपूर्ण योगदान रहाहै। ऑनलाइन शिकायत प्रणाली के माध्यम से अब आमजन घर बैठे ही अपनी शिकायत दर्ज कर पा रहे हैं, जिससे समय कीबचत के साथ-साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो रही है।

क्या है? CEIR पोर्टल

सी.ई.आई.आर.पोर्टल- सीईआईआर (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) भारत सरकार दूरसंचार विभाग का पोर्टल है। CEIR-Sanchar Saathi की मदद से कोई भी व्यक्ति अपने चोरी अथवा गुम हुए मोबाइल का आईएमईआई नंबर ब्लांक कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसके उपरान्त पुलिस द्वारा इस पोर्टल के माध्यम से मोबाइल को आसानी से खोजा जा सकेगा।

 

इंदौर में सोना-चांदी ने तोड़े रिकॉर्ड, सोना ₹8000 और चांदी ₹9000 तक महंगी

इंदौर 

 घरेलू बुलियन बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, भारतीय तो रुपए में लगातार कमजोरी और आयात ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी के चलते सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। इंदौर बाजार में सोने की कीमतों में करीब 6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी ने लगभग 6.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया।

बाजार में आरटीजीएस पर सोना 8000 रुपए महंगा होकर 1,59,000 ने रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी 9000 रुपए उछलकर न 2,78,000 रुपए प्रति किलो रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर सोना 4701.20 डॉलर प्रति औंस और चांदी 87.04 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई।

उतार-चढ़ाव रहने की संभावना
विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाना, अमरीका-ईरान संघर्ष को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक मुद्रास्फीति (महंगाई) की चिंताओं ने कीमती धातुओं में सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की मांग बढ़ा दी है। बाजार के कारोबारी हाल ही में आयात शुल्क में किए गए बदलावों असर का भी आकलन कर रहे है, जिससे सोने की कीमतों को और समर्थन मिल सकता है।

 टैक्स बढ़ने से तस्करी को मिल सकता बढ़ावा
वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताओं के कारण आने वाले कारोबारी सत्रों में बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलाटिलिटी) अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। केंद्र सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है।

सरकार का उद्देश्य विदेशी खरीद कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को घटाना बताया जा रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सरकार के इस फैसले को अहम माना जा रहा है। हालांकि, सराफा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि टैक्स बढ़ने से तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है। उनका इस संबंध में तर्क है कि पहले जब आयात शुल्क कम किया गया था, तब सोने की स्मगलिंग में कमी आई थी।

भारतीय ज्वैलरी के निर्यात को बढ़ावा देने की मांग
मध्यप्रदेश सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश शास्त्री ने कहा कि आयात ड्यूटी बढ़ोतरी से सोने की तस्करी को ड्यूटी में भारी बढ़ावा मिल सकता है। 15 प्रतिशत आयात शुल्क और 3 प्रतिशत जीएसटी मिलाकर सोने पर कुल 18 प्रतिशत का सरकार ने सोने की खरीद कम अतिरिक्त भार पड़ रहा है। करने की अपील भी की है। सरकार को भारतीय कारीगरों और ज्वैलरी उद्योग को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि बेहतर ज्वैलरी का निर्यात बढ़ सके।

 

MP के शिक्षकों को सुप्रीम झटका: TET पास किए बिना नहीं बन सकेंगे टीचर

भोपाल 

 मध्यप्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षकों को देश की सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के मामले पर सुनवाई करते हुए एक स्पष्ट निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि- पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है, ऐसे में अब बिना परीक्षा पास किए कोई भी शिक्षक नहीं बन सकता है। बता दें कि साल 1998 से 2009 के बीच नियुक्त किए गए शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग करते हुए याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं।

‘बिना परीक्षा पास किए कोई टीचर नहीं बन सकता’
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा में छूट दिए जाने की मांग को लेकर दायर की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि पात्रता परीक्षा के नियमों में जो भी ढील दी जानी थी, वह पहले दी जा चुकी है। अब इसमें कोई छूट की गुंजाइश नहीं है और शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 में जब नियम लागू हुए थे, उसके बाद 5 साल की रियायत दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। हालांकि इस मामले में अभी कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है।

सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है।

क्या है TET परीक्षा ?
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) एक अनिवार्य योग्यता है जिसे NCTE ने 2010 में लागू किया था। यह सुनिश्चित करता है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों में न्यूनतम शैक्षणिक स्तर और कौशल मौजूद है। मध्य प्रदेश में वर्तमान में स्थिति यह है कि अगर कोर्ट राहत नहीं देता है, तो करीब 1.5 लाख अनुभवी शिक्षकों को फिर से छात्र बनकर परीक्षा देनी होगी। TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है।

जातीय और श्रेणीवार विवरण की मांग
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार से शिक्षकों का विस्तृत डेटा मांगा है। अधिवक्ता पृथ्वीराज सिंह के अनुसार, कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पूर्व शिक्षकों की एक श्रेणीवार (Category-wise) सूची प्रस्तुत की जाए।

इसमें सामान्य, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षकों की सटीक संख्या स्पष्ट होनी चाहिए। बता दें कि मध्य प्रदेश में लगभग 1.50 लाख शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक टीईटी पास नहीं की है, उनके भविष्य के लिए यह फैसला निर्णायक साबित होगा।

सुप्रीम कोर्ट के पहले का क्या था आदेश?-सुप्रीम कोर्ट ने 1998-2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के TET एक्जाम को लेकर 1 सितंबर 2025 को कहा था कि 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षक जो मेरिट के आधार पर भर्ती हुए थे उनके लिए भी TET अनिवार्य है। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर मांग की थी कि पुराने शिक्षकों को उनके अनुभव के आधार पर छूट दी जाए। पूर्व में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि जो शिक्षक इस परीक्षा को पास करने में विफल रहेंगे, उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्यप्रदेश के 1.50 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया था। गौरतलब है कि TET परीक्षा में दो पेपर होते हैं जिनमें से एक में पहली से पांचवी और दूसरे में पांचवी से आठवीं तक के लिए परीक्षा होती है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जल आत्मनिर्भरता की ओर मध्यप्रदेश

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व में मध्यप्रदेश ‘जल आत्मनिर्भरता’ का एक नया इतिहास लिख रहा है। प्रदेश की जल संरचनाओं के पुनरुद्धार और नवीन जल स्रोतों के निर्माण के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ अब अपने निर्णायक दौर में है। अभियान में न केवल लुप्त हो रही जल संरचनाओं को जीवनदान मिल रहा है, बल्कि वैज्ञानिक पद्धतियों से वर्षा जल के संग्रहण (Rain Water Harvesting) की क्षमता में भी ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। प्रदेश में अब तक 1 लाख 77 हजार 121 जल संरक्षण संबंधी कार्यों को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है, जो राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरणीय संतुलन के लिए एक सुखद संकेत है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के समन्वय से संचालित इस विशाल अभियान के लिए राज्य सरकार ने व्यापक वित्तीय प्रावधान किए हैं। पूरे प्रदेश में कुल 2 लाख 42 हजार 188 कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए 6,201.81 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में अब तक 4,443.85 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है। अभियान का मुख्य उद्देश्य ‘खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में’ रोकने की अवधारणा पर है, ताकि आगामी मानसून में वर्षा की हर बूंद का संचयन सुनिश्चित किया जा सके।

सूक्ष्म स्तर पर हो रही मॉनिटरिंग

अभियान के अंतर्गत कार्यों को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित कर सूक्ष्म स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है। विशेष रूप से ‘डग वेल रिचार्ज’ (सूखे कुओं का पुनर्भरण) में प्रदेश ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है, जहाँ 88,123 से अधिक कुओं को रिचार्ज करने का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसी प्रकार, ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई और पशुपालन की सुविधा के लिए 53,568 खेत तालाबों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। जल संरक्षण और पुनर्भरण की अन्य विधियों के तहत 27,332 कार्य संपन्न हुए हैं। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण को मजबूती देने के लिए वृक्षारोपण और स्कूलों में जल टैंकों की सफाई जैसे रचनात्मक कार्यों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया गया है। JSJB 2.0 (जल संचयन जल भागीदारी) पहल के तहत भी 10 लाख से अधिक कार्यों का पंजीकरण राज्य की सक्रियता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान की सफलता को जन-भागीदारी का परिणाम बताया है। जल संरक्षण समाज के अस्तित्व से जुड़ा विषय है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इन स्थायी जल संरचनाओं के माध्यम से भू-जल स्तर को बढ़ाया जाए, ताकि भविष्य में पेयजल संकट का स्थायी समाधान हो सके और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो। ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से मध्य प्रदेश आज देश के अन्य राज्यों के लिए जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक मार्गदर्शक बनकर उभर रहा है।

खंडवा अग्रणी जिलों में शामिल

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिलों के प्रदर्शन की नवीनतम रैंकिंग (14 मई, 2026) के अनुसार, खंडवा जिला 7.51 के स्कोर के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। खंडवा में अब तक कुल 9,131 कार्य प्रारंभ किए गए हैं, जिनमें से 2,944 कार्य पूर्ण हो चुके हैं और 5,400 कार्यों की भौतिक पूर्णता (Physical Completion) सुनिश्चित की गई है। रैंकिंग में दूसरे स्थान पर खरगोन जिला (स्कोर 7.38) है, जिसने 81.17 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक ‘बुक्ड एक्सपेंडिचर’ (वित्तीय प्रगति) दर्ज की है। इसके पश्चात बड़वानी 7.23 के स्कोर के साथ तीसरे, उज्जैन 7.08 के स्कोर के साथ चौथे और राजगढ़ 6.90 के स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर है।

मुख्य आंकड़े एक नजर में:

  •                 कुल लक्षित कार्य : 2,42,188
  •                 पूर्ण हुए कार्य : 1,77,121
  •                 कुल स्वीकृत बजट : ₹6,201.81 करोड़
  •                 खेत तालाब पूर्ण : 53,568
  •                 कुआं पुनर्भरण (Dug Well Recharge) : 88,123
  •  

नियुक्ति रद्द होते ही बदले KP यादव के तेवर, 500 गाड़ियों का रोड शो रद्द कर बोले- अब एक गाड़ी से जाऊंगा गुना

भोपाल/गुना
 मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों शक्ति प्रदर्शन और बड़े वाहन काफिलों को लेकर संगठन का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। इसी सख्ती का असर अब गुना के पूर्व सांसद केपी यादव पर भी दिखाई दिया है। भोपाल में 500 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ शक्ति प्रदर्शन करने के बाद अब केपी यादव ने अपना प्रस्तावित रोड शो कैंसिल कर दिया है।

दरअसल, राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करने भोपाल पहुंचे केपी यादव का भव्य स्वागत हुआ था। राजधानी की सड़कों पर करीब 500 वाहनों का लंबा काफिला, जगह-जगह स्वागत मंच और समर्थकों की भारी भीड़ ने इसे एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भी चर्चाओं को तेज कर दिया था।

लेकिन अब पार्टी के सख्त रुख के बाद केपी यादव ने खुद कदम पीछे खींच लिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि वे गुना में काफिले के साथ नहीं बल्कि एक वाहन से जाएंगे। साथ ही कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि सीमित संख्या में ही उनसे मिलने पहुंचें।

सूत्रों की मानें तो भाजपा संगठन भिंड में हुई कार्रवाई के बाद किसी भी तरह के शक्ति प्रदर्शन को लेकर बेहद गंभीर है। दरअसल, भिंड में 100 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ निकाली गई रैली के मामले में भाजपा ने किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष सज्जन सिंह यादव की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी थी।

प्रदेश नेतृत्व द्वारा जारी पत्र में कहा गया था कि इस तरह के बड़े काफिले प्रधानमंत्री Narendra Modi की “ईंधन बचत और सादगीपूर्ण जीवनशैली” की अपील के विपरीत हैं। संगठन ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त कार्रवाई की थी। इतना ही नहीं, काफिले के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बाधित होने और आम लोगों को परेशानी होने का भी उल्लेख किया गया था।

अब माना जा रहा है कि उसी कार्रवाई और संगठन के कड़े संदेश को देखते हुए केपी यादव ने समय रहते अपना रोड शो रद्द कर दिया। राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा के “नो पावर शो” संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में बना हुआ है।

CBSE 12वीं रिजल्ट में सरकारी स्कूलों का जलवा, हर कैटेगरी में छात्राओं ने मारी बाजी

भोपाल 
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 12वीं परीक्षा 2026 के नतीजों ने मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी है। जहां सरकारी मॉडल पर संचालित जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने शानदार परिणाम देकर बेहतर शैक्षणिक योग्यता दिखाई। 
खास बात यह है कि इन निजी स्कूलों की फीस आमतौर पर JNV और KV की तुलना में कहीं अधिक होती है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्कूलों के कमजोर प्रदर्शन का असर भोपाल रीजन की रैंकिंग पर भी पड़ा है। इसी कारण मध्य प्रदेश का भोपाल रीजन देश के 22 सीबीएसई रीजन में 19वें स्थान पर पहुंच गया। वहीं हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया और भोपाल रीजन में लड़कियां करीब पांच प्रतिशत अंकों से आगे रहीं।

नवोदय विद्यालय सबसे आगे
सीबीएसई के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में सबसे बेहतर प्रदर्शन जवाहर नवोदय विद्यालयों का रहा। JNV का कुल पास प्रतिशत 98.16% दर्ज किया गया। लड़कों का परिणाम 97.81% और लड़कियों का 98.73% रहा।

विशेषज्ञों के अनुसार, नवोदय विद्यालयों की रेजिडेंशियल व्यवस्था, अनुशासित माहौल और नियमित अकादमिक मॉनिटरिंग इसकी बड़ी वजह है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाला यह मॉडल लगातार सफल साबित हो रहा है।

केंद्रीय विद्यालयों ने भी कायम रखी बढ़त
केंद्रीय विद्यालयों का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। इनका कुल पास प्रतिशत 97.90% दर्ज किया गया। लड़कों का परिणाम 97.66% और लड़कियों का 98.11% रहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षित शिक्षक, राष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम और नियमित मूल्यांकन केंद्रीय विद्यालयों की सफलता का आधार हैं। यही वजह है कि इनके परिणाम लगातार राष्ट्रीय औसत से बेहतर बने रहते हैं।

आदिवासी छात्रों के स्कूलों ने भी किया बेहतर प्रदर्शन

एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) का कुल पास प्रतिशत 85.47% रहा। लड़कों का परिणाम 83.46% और लड़कियों का 86.89% दर्ज किया गया।

सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद यह प्रदर्शन सकारात्मक माना जा रहा है। यहां भी छात्राओं ने छात्रों से बेहतर परिणाम देकर बढ़ती शैक्षणिक जागरूकता का संकेत दिया।

सरकारी स्कूलों के सामने संसाधनों की चुनौती
सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत 80.60% रहा। लड़कों का रिजल्ट 79.86% और लड़कियों का 80.88% दर्ज किया गया।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षकों की कमी और बुनियादी संसाधनों की चुनौतियों के बावजूद यह प्रदर्शन संतोषजनक है। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल संसाधनों में सुधार से परिणाम बेहतर हो सकते हैं।

सबसे ज्यादा छात्र, फिर भी सबसे कमजोर निजी स्कूल
सबसे चिंताजनक तस्वीर निजी स्कूलों की रही। सीबीएसई से संबद्ध इंडिपेंडेंट स्कूलों में सबसे अधिक 61,419 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और 61,242 छात्र परीक्षा में शामिल हुए।

इसके बावजूद इन स्कूलों का कुल पास प्रतिशत केवल 76.85% रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है। लड़कों का परिणाम 74.12% और लड़कियों का 80.02% दर्ज किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक दबाव, बोर्ड परीक्षा की अपर्याप्त तैयारी और छात्रों पर बढ़ता मानसिक तनाव निजी स्कूलों के कमजोर प्रदर्शन के कारण हो सकते हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

लड़कों का पास प्रतिशत 76.87, लड़कियों का 82.19
पूरे परिणाम में एक समान ट्रेंड देखने को मिला हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों को पीछे छोड़ा। भोपाल रीजन में लड़कों का पास प्रतिशत 76.87% रहा, जबकि लड़कियों का परिणाम 82.19% दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित अध्ययन, परीक्षा के प्रति गंभीरता और करियर को लेकर बढ़ती जागरूकता छात्राओं की सफलता के प्रमुख कारण हैं।

12% से ज्यादा छात्र सभी विषयों में फेल
भोपाल रीजन के नतीजों में एक गंभीर तथ्य भी सामने आया। कुल परीक्षार्थियों में 12.14% छात्र ऐसे रहे, जो सभी विषयों में असफल हो गए।

शिक्षा विशेषज्ञ इसे केवल छात्रों की तैयारी का नहीं, बल्कि स्कूलों की अकादमिक निगरानी और सीखने की गुणवत्ता से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। कोविड के बाद सीखने के स्तर में आई गिरावट, डिजिटल डिस्ट्रैक्शन और नियमित पढ़ाई में कमी को भी इसकी वजह माना जा रहा है।

देश का दूसरा सबसे बड़ा सीबीएसई रीजन
भोपाल रीजन देश के सबसे बड़े सीबीएसई रीजन में शामिल है। यहां सीबीएसई से संबद्ध 1291 स्कूल संचालित हैं। स्कूलों की संख्या के लिहाज से यह 1483 स्कूलों वाले लुधियाना रीजन के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा रीजन है। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा संचालन और परिणाम प्रबंधन को बड़ी प्रशासनिक चुनौती माना जाता है।

आधा MP भीषण गर्मी की चपेट में, इंदौर-उज्जैन में लू का ऑरेंज अलर्ट जारी

भोपाल
 देश के अधिकांश राज्यों में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। इसमें मध्य प्रदेश भी शामिल है। प्रदेश के कुछ इलाकों में पारा 45 पार तक जा रहा है। मालवा में दो दिन पहले जहां पारा 46 डिग्री से अधिक दर्ज किया गया था, वहीं अब बुंदेलखंड में सबसे अधिक पारा दर्ज किया गया है। बता दें कि लगभग पूरा प्रदेश गर्मी की चपेट में है और अधिकांश इलाकों में भीषण लू झुलसा रही है। मौसम विभाग के अनुसार यह दौरान मई से जून तक चलेगा। फिलहाल 4 दिन प्रदेश में पारा और चढ़ने व रात में भी गर्म हवाओं का दौर चलेगा। कूलर-एसी भी राहत नहीं दे पाएंगे।

इंदौर, उज्जैन-धार में वॉर्म नाइट की चेतावनी है। इस दौरान गर्म हवाएं चलेंगी। झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, देवास, सीहोर, शाजापुर, आगर-मालवा और राजगढ़ में भी लू चलेगी।

मंदसौर में तेज गर्मी और बढ़ते बिजली लोड के कारण ट्रांसफॉर्मरों पर दबाव बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि बिजली सप्लाई सुचारू रखने के लिए बड़े ट्रांसफॉर्मरों को कूलर लगाकर ठंडा रखना पड़ रहा है।

मध्य प्रदेश में 15 मई से 18 मई तक प्रदेश के कई जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। सूरज की सीधी किरणों और पड़ोसी राज्यों से सीधी रेगिस्तानी गर्म हवाएं एमपी में आने के कारण यहां भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। आगामी दिनों में तापमान और ऊपर जाने की संभावना है। आईएमडी बुलेटिन के अनुसार अगले 4 दिन प्रदेश में मौसम इस तरह रहेगा।

प्रदेश में कहां कितना तापमान

    खजुराहो – 45.4°C
    रतलाम – 45.2°C
    धार – 45.0°C
    नौगांव – 44.9°C
    विदिशा – 44.8°C

सबसे कम न्यूनतम तापमान

    पचमढ़ी – 19.4°C
    अमरकंटक – 20.7°C
    मंडला – 23.2°C

15 मई को भोपाल, धार, रतलाम, उज्जैन, देवास में तीव्र लू का अलर्ट है। इसी प्रकार विदिशा, राजगढ़, रीवा, सतना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, नर्मदापुरम, हरदा, बुरहानपुर खंडवा, शिपुरी, अशोकनगर, गुना, नीमच, मंदसौर, आगर, शाजापुर, झाबुआ, श्योपुरकला, सिंगरौली, सीधी, रीवा, गवालियर, दतिया, भिंड, मुरैना सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में हीट वेव का यलो अलर्ट है।

    16 से 18 मई तक कैसे रहेंगे हाल

ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और मालवा क्षेत्र में तेज गर्म हवाओं का असर कई जिलों में तापमान 44 से 46 डिग्री तक पहुंचने की संभावना। इसमें सबसे ज्यादा गर्म क्षेत्रों में धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन सहित आसपास के इलाके में भीषण लू का अलर्ट रहेगा। वहीं पूरे प्रदेश में गर्म हवाएं और हीटवेव का असर दिखेगा।

    बारिश की संभावना नहीं, तापमान बढ़ेगा

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पश्चिमी और उत्तरी हवाओं के प्रभाव से प्रदेश में शुष्क और गर्म मौसम बना हुआ है। फिलहाल बारिश की संभावना बेहद कम है, जबकि अगले कुछ दिनों तक तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है।

    वार्म नाइट का इन जिलों में अलर्ट है

आईएमडी बुलेटिन के अनुसार प्रदेश के धार, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास और गुना में रात में भी गर्म हवाओं का प्रकोप रहेगा। यहां वार्म नाइट का अलर्ट भी दिया गया है।

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