महाकाल मंदिर में लाइट एंड साउंड शो के लिए ₹100 शुल्क, दर्शन-आरती समेत श्रद्धालुओं का खर्च ₹1050 तक पहुंच सकता है

उज्जैन 

बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की जेब पर और बोझ बढ़ने वाला है। महाकाल मंदिर परिसर में चलने वाले प्रसिद्ध लाइट एंड साउंड शो को देखने के लिए अब श्रद्धालुओं को 100 रुपए प्रति व्यक्ति का शुल्क देना होगा।गौरतलब है कि करीब 7 महीने तक मुफ्त संचालन के बाद अब इस शो को पेड किया गया है।

18 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है शो
इस शो का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 अक्टूबर 2025 को दीपावली के अवसर पर किया था। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने इसे करीब 18 करोड़ 7 लाख रुपए की लागत से तैयार किया है।

करीब 25 मिनट के इस शो में वॉटर स्क्रीन, फाउंटेन, लेजर लाइट और बेहतरीन साउंड इफेक्ट्स के जरिए भगवान महाकाल, मां क्षिप्रा और प्राचीन अवंतिका नगरी (उज्जैन) की गौरव गाथा दिखाई जाती है।

शुल्क लगाने के पीछे मंदिर समिति का तर्क
मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस भव्य शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब 1.5 लाख रुपए का खर्च आ रहा है। मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इसी खर्च को पूरा करने और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए 100 रुपए का एंट्री शुल्क रखने का फैसला लिया गया है।

हर माह 15 लाख रुपए कमाई का अनुमान
कमाई के लिहाज से देखें तो मंदिर समिति को इस फैसले से अच्छी आय होने की संभावना है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, रोजाना करीब 500 श्रद्धालु लाइट एंड साउंड शो देखने पहुंच रहे हैं। यदि प्रत्येक श्रद्धालु से 100 रुपए शुल्क लिया जाता है तो समिति को प्रतिदिन लगभग 50 हजार रुपए की आय होगी।

इस हिसाब से एक महीने में करीब 15 लाख और सालभर में लगभग 1.8 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है, जबकि शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह व्यवस्था मंदिर समिति के लिए आय का एक नया स्रोत भी बन सकती है।

संध्या और शयन आरती के लिए भी लेते हैं 250 रुपए
यह पहली बार नहीं है जब महाकाल मंदिर में किसी सुविधा के लिए शुल्क बढ़ाया या लगाया गया हो। इससे पहले भी कई बदलाव हुए हैं। 19 फरवरी 2026 से संध्या आरती और शयन आरती के लिए भी 250 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जा रहा है, जबकि इससे पहले यह फ्री थी। वीआईपी या शीघ्र दर्शन के लिए पहले से ही शुल्क लिया जा रहा है।

श्रद्धालु बोले- बढ़ जाएगा आर्थिक बोझ
महाकाल मंदिर में रोज हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भस्म आरती में ही रोजाना करीब 1700 श्रद्धालुओं को ऑनलाइन प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में लाइट एंड साउंड शो पर शुल्क लगने के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का खर्च बढ़ जाएगा।

जहां एक तरफ मंदिर प्रशासन इसे मेंटेनेंस के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं श्रद्धालुओं के एक वर्ग का कहना है कि धार्मिक परिसर में होने वाले इस शो को पहले की तरह ही मुफ्त रखा जाना चाहिए था, क्योंकि आरती और शो के शुल्कों से आम भक्तों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

पटवारी संविलयन नीति 2026 जारी: गृह तहसील में पोस्टिंग पर रोक, नई सीनियरिटी व्यवस्था लागू

भोपाल 

राजस्व विभाग मध्य प्रदेश ने तबादलों की अवधि (15 जून) समाप्त होने से तीन दिन पहले पटवारियों के संविलयन की नई नीति 2026 जारी कर दी है। नई नीति में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी पटवारी की पदस्थापना उसकी गृह तहसील में नहीं की जाएगी। साथ ही नए जिले में पदस्थ होने के बाद वरिष्ठता वहीं की सीनियरिटी सूची के आधार पर तय होगी।

नीति के अनुसार पटवारी का पद जिला संवर्ग का होने के कारण अलग से संविलयन नीति लागू की गई है। इसमें कहा गया है कि पटवारी परीक्षा 2022 का परिणाम घोषित होने से पहले नियुक्त हुए पटवारी ही अंतर जिला संविलयन के पात्र होंगे। हालांकि वर्ष 2022 की परीक्षा पास कर नियुक्त हुए पटवारियों को कुछ विशेष परिस्थितियों में संविलयन का लाभ मिलेगा।

इन शर्तों के साथ पात्र होंगे 2022 की परीक्षा पास करने वाले पटवारी
    वर्ष 2022 की पटवारी परीक्षा में पास होने वाले पटवारी केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही आवेदन कर सकेंगे।

    अगर पटवारी पति या पत्नी शासकीय कर्मचारी हैं उनकी एक ही जिले की पदस्थापना की जरूरत है तो संबंधित जिले में पटवारी का पद रिक्त होने की स्थिति में मौका दिया जाएगा।

    विवाहित महिला, विधवा, तलाकशुदा, परित्यकता महिला पटवारी होने पर या पटवारी को गंभीर बीमारियां जैसे कैंसर, किडनी, डायलिसिस, ओपन हार्ट सर्जरी से ग्रस्त होने पर पटवारी का पद रिक्त होने की स्थिति में तबादले का अधिकार रहेगा।

    आपसी आधार पर संविलियन के मामलों में भी जो आवेदन मिलेंगे उसमें भी तबादला हो सकेगा।

प्रोबेशन संबंधी कार्यवाही नए जिले में होगी
संविलियन नीति में यह भी कहा गया है कि जिन पटवारी का संविलियन होता है उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्ति संबंधी कार्यवाही नए जिले में की जाएगी। इस संबंध में सभी विभागीय शर्तों का पालन पूर्व जिले की भांति नए जिले में पटवारी को करना होगा। पटवारी के संविलयन उपरांत पटवारी की व्यक्तिगत नस्ती एवं जांच, दंड और विशेष दायित्व आदि के संबंध में सभी जानकारी पुराने जिले द्वारा नए जिले को दी जाएगी। पटवारी के संविलयन की संख्या का निर्धारण सामान्य प्रशासन विभाग की तबादला नीति के आधार पर होगा।

ऐसे होंगे पटवारी तबादले के लिए आवेदन
    आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन मध्य प्रदेश द्वारा ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे।
    ऑनलाइन आवेदन में अपनी विशिष्ट श्रेणी जैसे चयन का वर्ग सामान्य, पिछड़ा वर्ग, ईडब्ल्यूएस, एससी, एसटी और ओपन वर्ग, ओपन महिला, भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांग की स्थिति की जानकारी देनी होगी। ऑनलाइन आवेदन के साथ कोई दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    पटवारी जिनके खिलाफ लोकायुक्त या अन्य किसी मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज है वह अपात्रता की श्रेणी में आएंगे।

    संविलयन संबंधी आदेश आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन मध्य प्रदेश द्वारा जारी किए जाएंगे।

पद रिक्त हुए तो ही संविलयन किया जाएगा
पटवारी के संविलयन में यह भी कहा गया है कि जिस जिले में संविलयन चाहा गया है उस जिले में संबंधित वर्ग के रिक्त पद उपलब्ध होने की स्थिति में ही संविलयन किया जाएगा।

आरक्षण के प्रावधानों एवं जिला आरक्षण रोस्टर के परिपालन में ही संविलियन किया जाएगा। जिले के अंदर पदस्थापना कलेक्टर द्वारा की जाएगी किंतु किसी भी पटवारी को उसके गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाएगा।

आदेश जारी होने के 15 दिन के भीतर पटवारी को संविलयन किए गए जिले में उपस्थिति देनी होगी।

आरक्षण नियमों के विपरीत नहीं होगी पोस्टिंग
इसमें यह भी शर्त तय की गई है कि संविलयन पर एक बार जिला आवंटित हो जाने पर दोबारा जिला परिवर्तन की पात्रता नहीं रहेगी। प्रशासनिक दृष्टि से किए गए संविलयन में ही पटवारी द्वारा नए जिले में पदभार ग्रहण करने पर उसे जिले की संधारित सूची से पटवारी की वरिष्ठता की गणना कर वरीयता तय की जाएगी। पटवारी को एक बार जिला आवंटित होने पर उसे जिले में अनिवार्य उपस्थिति देनी होगी। जिले में आरक्षित पदों से अधिक एवं आरक्षण नियमों के विपरीत पद स्थापना नहीं की जाएगी।

सिंहस्थ 2028 होगा हाईटेक: AI बताएगा कब आएगा आंधी-तूफान, करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा योजना

उज्जैन
 सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2028 की तैयारियां जोरो पर हैं. वर्ष 2016 सिंहस्थ के दौरान आए भीषण आंधी तूफान और प्राकृतिक आपदा की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उज्जैन आलोट संसदीय क्षेत्र से सांसद अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग उठाई है. सांसद अनिल फ़िरोजिया ने चर्चा में कहा, ”मैंने मौसम विभाग दिल्ली मुख्यालय को एक लेटर लिखा है। 

2016 में आई थी प्राकृतिक आपदा
अनिल फिरोजिया ने लिखा, ”सभी के संज्ञान में है कि, पिछली बार सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2016 के दौरान उज्जैन में प्राकृतिक आपदा आई थी और कई टिन शेड, पेड़ धराशाई हो गए थे. लोग घायल भी हुए थे, जिससे प्रशासन और श्रद्धालु दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो गई थी. आने वाला समय 2028 में सिंहस्थ का है, और हम चाहते हैं कि उस वक़्त ऐसी परिस्थितियां नहीं बने। 

अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था की उठाई मांग
सांसद ने कहा, ”सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए विभाग को पत्र लिखते हुए संज्ञान में लाया कि, उज्जैन में अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान उपकरण की अभी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. आधुनिक यंत्र लगाए जाएं ताकि पूर्वानुमान लग जाए मौसम की क्या स्थिति रहेगी. जिससे प्रशासन पहले से सतर्क हो जाए और उससे निपटने की तैयारी कर सके. देश विदेश से आने वाले लाखों करोड़ों दर्शनार्थियों को सुरक्षित किया जा सके. वर्ष 2028 में दर्शनार्थियों की संख्या पिछली बार से 3 गुना अधिक होने की संभावना है. ऐसे में मौसम संबंधी सटीक और समय पर पूर्वानुमान उपलब्ध होना बेहद आवश्यक है। 

सिंहस्थ 2016 बनाम 2028 मौसम प्रबंधन और व्यवस्थाओं में क्या होगा अंतर
मौसम विशेषज्ञ बताते हैं, यदि केंद्र और राज्य समय पर स्वीकृति देता है तो वर्ष 2028 तक उज्जैन में कई तरह से व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। 

पहला रियल टाइम वेदर स्टेशन– सिंहस्थ क्षेत्र में कई स्वचलित मौसम केंद्र लगाए जाते हैं, जो हर कुछ मिनट में हवा की गति, तापमान, नमी और वर्षा की जानकारी दें। 

दूसरा डॉप्लर रडार कवरेज– इंदौर उज्जैन क्षेत्र के लिए उन्नत रडार कवरेज मिलने पर 30 मिनट से 3 घण्टे तक आंधी और तूफान की चेतावनी संभव हो सकेगी। 

तीसरा AI आधारित पूर्वानुमान- वर्ष 2028 तक AI आधारित मौसम पूर्वानुमान से स्थानीय स्तर पर बेहतर सटीक चेतावनियां जारी की जा सकती हैं। 

चौथा श्रद्धालुओं के लिए अलर्ट सिस्टम- मोबाइल संदेश, एलईडी स्क्रीन, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से तत्काल चेतावनी, पांचवा मजबूत अस्थाई ढांचे 2016 के अनुभव के बाद टेंट, शेड, विद्युत पोल और घाट क्षेत्र की संरचनाओं को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। 

21 जून से नए रूट पर दौड़ेगी इंदौर मेट्रो, रोजाना 4-6 लाख यात्रियों को मिलेगा फायदा

इंदौर
 इंदौर मेट्रो की येलो लाइन के दूसरे फेज के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। आगामी 20 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक के नए रूट का लोकार्पण करेंगे। इसके अगले दिन, यानी 21 जून से यह ट्रैक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। वर्तमान में भोपाल स्थित मेट्रो कार्यालय में किराए, फेरों और शेड्यूल को लेकर बैठकों का दौर जारी है, जिस पर अगले तीन-चार दिनों में अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।

6 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक का यह नया कॉरिडोर इंदौर मेट्रो का सबसे व्यस्त और अधिक यात्री घनत्व वाला रूट बनने जा रहा है। इस रूट के शुरू होने से सीधे 4 से 6 लाख लोगों को सुगम परिवहन का लाभ मिलेगा।यदि फीडर बसों और अन्य सार्वजनिक साधनों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 8 से 10 लाख तक पहुंच सकती है।

इस रूट पर कई बड़ी कंपनियों के ऑफिस
इस रूट के दायरे में टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के कैंपस हैं। इसके अलावा एसईजेड, आईटी पार्क, एयरपोर्ट, शैक्षणिक संस्थान, होटल और कई कॉर्पोरेट कार्यालय भी इसी कॉरिडोर के आसपास हैं। केवल टीसीएस और इंफोसिस के कैंपस ही हजारों कर्मचारियों की क्षमता रखते हैं।

एक्सपर्ट के अनुमान के अनुसार, मेट्रो संचालन के शुरुआती चरण में इस कॉरिडोर पर रोजाना 25 से 40 हजार यात्री सफर कर सकते हैं, वहीं सुपर कॉरिडोर और आसपास के क्षेत्रों के विकसित होने के बाद यह संख्या 60 हजार से लेकर एक लाख यात्रियों रोज तक पहुंच सकती है।

कुल मिलाकर सुपर कॉरिडोर-2 से रेडिसन चौराहे तक का मेट्रो रूट इंदौर के आईटी हब, एयरपोर्ट क्षेत्र और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों को जोड़ने वाला अहम कॉरिडोर साबित होगा, जिससे लाखों लोगों को तेज, सुगम और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी।

भोपाल में हर रोज बैठकें
लोकार्पण से पहले भोपाल के सुभाष नगर स्थित डिपो में हर रोज एमडी एस. कृष्ण चैतन्य बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने इंदौर में तीन दिन तक दौरा भी किया। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, मार्च में कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम ने इंदौर मेट्रो के संचालन को लेकर दौरा किया था।

इसके बाद अगले ट्रैक पर मेट्रो को दौड़ाने की हरी झंडी भी दे दी थी। नियम के मुताबिक, सीएमआरएस की रिपोर्ट मिलने के 3 महीने के अंदर मेट्रो का संचालन शुरू करना होता है, वरना फिर से दौरा किया जाता है।

पहले 15 जून थी तारीख, अब 20 जून फाइनल
मेट्रो प्रबंधन सूत्रों की मानें तो पहले 15 जून को इंदौर में येलो लाइन के सेकंड फेज का लोर्कापण किया जाना था, लेकिन राज्यसभा चुनाव के चलते यह तारीख आगे बढ़ गई थी। अब 20 जून की तारीख फाइनल हुई है।

इन कामों पर मंथन
मेट्रो के सेकंड फेज के लोकार्पण से पहले मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) शेड्यूल, किराए और फेरे को लेकर मंथन कर रहा है। दरअसल, अभी मेट्रो सिर्फ 1 घंटा ही दौड़ रही है।

नए शेड्यूल में गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक कुल 16 स्टेशनों की टाइमिंग, कहां-कितना किराया रहेगा और कितने फेरे लगेंगे? यह सब शामिल रहेगा। 15 जून तक पूरा शेड्यूल सामने आ सकता है। मेट्रो प्रबंधन 17 किलोमीटर पर मेट्रो चलाएगा।

शुरुआती चरण में इस रूट पर रोजाना 25 से 40 हजार यात्रियों के सफर करने का अनुमान है, जो भविष्य में बढ़कर एक लाख तक पहुंच सकता है।

कई आवासीय क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा
यह एलिवेटेड कॉरिडोर गांधी नगर, लवकुश, सुखलिया, विजय नगर, स्कीम-78 और रेडिसन चौराहे जैसे प्रमुख आवासीय व व्यावसायिक क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इस रूट के दायरे में टीसीएस, इंफोसिस और यश टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के कैंपस, आईटी पार्क, सेज (SEZ), शैक्षणिक संस्थान और एयरपोर्ट शामिल हैं, जिससे हजारों कामकाजी पेशेवरों और छात्रों को तेज व आधुनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी।

भोपाल के मुकाबले इंदौर मेट्रो आगे
मेट्रो विकास के मामले में इंदौर, भोपाल से आगे चल रहा है। इंदौर मेट्रो के पहले फेज का संचालन 31 मई 2025 को ही शुरू हो गया था, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर (सुभाष नगर से एम्स) का लोकार्पण 20 दिसंबर 2025 को हुआ था।

भोपाल के मुकाबले इंदौर में ऐसे आगे काम
इंदौर मेट्रो की येलो लाइन है। इसके पहले फेज में गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर-3 तक मेट्रो 31 मई 2025 को चलाई गई थी, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन के प्रॉयोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स के बीच मेट्रो का 20 दिसंबर-25 को लोकार्पण हुआ था। 21 दिसंबर से लोग मेट्रो में सफर करने लगे, यानी भोपाल मेट्रो से इंदौर मेट्रो 7 महीने आगे रही।

अब सेकंड फेज का लोकार्पण हो रहा है, जबकि भोपाल में ऑरेंज लाइन का सेकंड फेज साल 2028 तक पूरा होगा। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इंदौर में दोनों फेज में एलिवेटेड कॉरिडोर है, जबकि भोपाल में सेकंड फेज में करीब 3 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड रूट भी है। इसलिए सेकंड फेज 2028 में पूरा होगा।

इंदौर मेट्रो फेज-2 के यह स्टेशन
सुपर कॉरिडोर स्टेशन 2, 1, भौंरासला चौराहा, एमआर 10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन होटल)।

भोपाल में दो रूट पर चल रहा काम
बता दें कि भोपाल में इस समय ऑरेंज लाइन का सुभाष नगर से करोंद और ब्लू लाइन का भदभदा से रत्नागिरि के बीच काम चल रहा है। ऑरेंज लाइन के ही सुभाष नगर से एम्स के बीच प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो पिछले साल दिसंबर से दौड़ने लगी थी।

इसके बाद बाकी कामों पर फोकस शुरू हो गया है। 30 मार्च को टीबीएम को जमीन के अंदर 24 मीटर गहराई में उतारा गया था। इसके बाद कुल 3.39 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई की जा रही है। इसमें दो स्टेशन भी बनेंगे। मेट्रो अफसरों की मानें तो अगले 2 साल में अंडरग्राउंड रूट का काम पूरा कर लिया जाएगा।

हाल ही में मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान अंडरग्राउंड रूट पर भी बात की थी। वहीं इंदौर मेट्रो के अब तक के काम और सेकंड फेज के लोकार्पण पर भी चर्चा की गई थी।

 

अमरनाथ यात्रियों की होगी Real-Time ट्रैकिंग, भोपाल में बनेगा कंट्रोल रूम; सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत

भोपाल

अमरनाथ यात्रा के लिए तैयारियां शुरू हो गई है। पिछले साल अमरनाथ यात्रा के पहले पहलगाम हमले के बाद यात्रियों की सुरक्षा के पूरे इंतजाम श्राइन बोर्ड द्वारा किए जा रहे हैं। यात्रा के लिए पंजीयन कराने वाले यात्रियों को आरएफआईडी कार्ड रेडियो फिक्वेंसी पहचान पत्र यात्रा शुरू करने से पहले लेना होगा।

साथ ही घोड़े, खच्चर, पालकी वालों के लिए भी इस बार श्राइन बोर्ड ने क्यूआरकोड बनाए हैं, जिससे यात्री इसे स्केन कर संबंधित की पूरी जानकारी ले सकेंगे। इस क्यूआर कोड के जरिए जत्थे की रियल टाइम लोकेशनस भी मिल सकेगी। इसी प्रकार भोपाल से जाने वाले मंडल भी यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम कर रहे है। इसके लिए यात्रियों का एक वाट्सऐप क्यूआरकोड बनाया जाएगा, जिससे स्केन करते ही ग्रुप से जुड़कर यात्री की जानकारी ले सकेंगे।

यात्रियों के लिए कंट्रोल रूम, क्यूआर कोड तैयार करेंगे
ओम शिव शक्ति सेवा मंडल के सचिव रिंकू भटेजा ने बताया कि हमारे मंडल की ओर से 15 जत्थे अलग-अलग तारीखों में रवाना होंगे। पहला जत्था 29 जून को रवाना होगा। हर जत्थे का नेतृत्व करने के लिए पांच लोगों की टीम रहेगी। भोपाल में भी एक कंट्रोल रूम मंडल का रहेगा, जहां सभी यात्रियों की जानकारी रहेगी। बालटाल, पहलगाम सहित यात्रा मार्ग से जत्थे के लोग यहां संपर्क में रहेंगे।

साथ ही हर जत्थे के लिए एक वाट्सऐप क्यूआरकोड बनाया जाएगा, यह हर यात्री को दिया जाएगा। अगर यात्रा के दौरान घर परिवार के लोगों का किसी यात्री से संपर्क नहीं हो रहा है, तो परिजन सीधे क्यूआर कोड स्कैन कर ग्रुप से जुड़ जाएंगे और संबंधित यात्री के बारे में जानकारी ले सकेंगे। कई बार यात्रा के दौरान बारिश सहित अन्य कारणों से मोबाइल बंद हो जाते हैं, ऐसे में परिवार के लोग परेशान हो जाते हैं। ऐसे में ग्रुप से जुड़कर परिजन यात्री की जानकारी ले पाएंगे। ग्रुप के जिस सदस्य को जानकारी रहेगी, वह संबंधित यात्री का परिजनों से संपर्क करा पाएगा।

युवाओं का ग्रुप निभाएगा भागीदारी
जय बाबा अमरनाथ बर्फानी यात्रा मंडल के युवा राम मालवीय ने बताया कि इस बार अधिकांश फ्रेशर्स लोग जा रहे हैं, जो पहली बार यात्रा करेंगे। इसमें कुछ ऐसे यात्री भी रहेंगे जो पहले भी यात्रा कर चुके हैं। सभी एक दूसरे से कनेक्ट रहेंगे। जो फ्रेशर्स जा रहे है, उन्हें रोजाना योग, प्राणायाम, सैर आदि कराई जा रही है। जत्थे में मंडल की कार्यकारिणी के सदस्य भी रहेंगे। पहला जत्था 5 और दूसरा 14 जुलाई को रवाना होगा।

आरएफआईडी कार्ड लेना जरूरी होगा
अमरनाथ यात्रा के लिए श्राइन बोर्ड ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से पंजीकृत भक्तों को यात्रा के दौरान आरएफआईडी लेना जरूरी होगा। यह कार्ड जम्मू, पहलगाम, बालटाल सहित अन्य सेंटरों से मिलेगा। इस कार्ड में जीपीएस ट्रैकिंग की क्षमता रहेगी, जिससे तीर्थयात्रियों की आवाजाही, ट्रेक, आपात स्थिति पर उनके संपर्क, निगरानी में मदद मिलेगी। बिना कार्ड के किसी भी तीर्थयात्री को अमरनाथ गुफा की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही स्थानीय ड्राइवर, दुकानदारों और यात्रा मार्ग में सहायक पिट्टू, खच्चर वालों को पुलिस वेरिफिकेशन करने के बाद क्यूआर कोड जारी किए जाएंगे।

रतलाम के डायल-112 हीरोज ट्रेन से गिरकर घायल हुए युवक को त्वरित सहायता देकर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल 

रतलाम जिले के थाना रावटी क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता एवं संवेदनशील कार्यवाही से ट्रेन से गिरकर घायल हुए एक युवक को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। डायल-112 टीम की त्वरित सहायता से युवक को शीघ्र चिकित्सकीय सुविधा मिल सकी।

12 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना रावटी क्षेत्र अंतर्गत कोटड़ा गाँव के पास एक युवक ट्रेन से गिरकर घायल हो गया है तथा उसे तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही थाना रावटी क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री बहादुर दांगी एवं पायलट श्री शाहिद अली ने मौके पर पहुंचकर पाया कि कोटड़ा गाँव के समीप ट्रेन से गिरने के कारण एक युवक घायल हो गया था।

डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए घायल युवक को एफआरव्ही वाहन की सहायता से सुरक्षित शासकीय अस्पताल रावटी पहुँचाया। समय पर मिली सहायता के कारण घायल युवक को शीघ्र चिकित्सकीय सुविधा प्राप्त हो सकी।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता प्रदान करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ नागरिकों की सुरक्षा एवं जीवन

 

घरों में रखी पाण्डुलिपियों का संरक्षण जरूरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मठ मंदिरों के साथ-साथ कई घरों में भी प्राचीन पाण्डुलिपियां सुरक्षित हैं। हमारी सांस्कृतिक स्मृतियां, ज्ञान, परम्पराएं, विज्ञान और दर्शन पाण्डुलिपियों के रूप में अभी तक विद्यमान हैं। इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। इस अमूल्य विरासत के संरक्षण, संवर्धन और दस्तावेजीकरण के लिए ज्ञान भारतम् मिशन की पहल राष्ट्रीय स्तर पर आरंभ की गई है। जिसके अंतर्गत वर्ष 1950 से पहले की पाण्डुलिपियों का डिजिटल रूप से संरक्षण किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत मंदिरों, मठों, आश्रमों, पुस्तकालयों और शैक्षणिक व शोध संस्थाओं के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों और घरों में ताड़पत्र, ताम्रपत्र, प्रस्तर, भोजपत्र, पोथियों आदि के रूप में विद्यमान पाण्डुलिपियों का संरक्षण होना है। प्रदेश के एतिहासिक और सांस्कृतिक व धार्मिक रूप से समृद्ध है। यहां के धार्मिक स्थलों के साथ-साथ कई परिवारों तथा व्यापारिक संस्थानों के पास भी पर्याप्त मात्रा में पाण्डुलिपियां विद्यमान हैं। भारत की ज्ञान परम्परा को सुरक्षित रखने के इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रदेशवासियों को प्रोत्साहित करना जरूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स वीसी में ज्ञान भारतम् मिशन के संबंध में यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में हुई बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई और अपर मुख्य सचिव संस्कृति  शिव शेखर शुक्ला उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि प्रदेश के जिलों में उपलब्ध पाण्डुलिपियों की अनुमानित संख्या 10 लाख 24 हजार 571 हैं। पाण्डुलिपियों के संरक्षण के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति द्वारा ज्ञान भारतम् मोबाइल एप के माध्यम से पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण और उनकी अपलोडिंग की जा रही है। इस मिशन के लिए भारत सरकार और प्रदेश के पुरातत्व विभाग द्वारा प्रत्येक जिले के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पाण्डुलिपि संरक्षण अभियान के लिए पाण्डुलिपि धारकों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें अभियान से जोड़ने के लिए जिला स्तर पर गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन गतिविधियों में शैक्षणिक संस्थानों और शोधार्थियों के भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

 

 

लापरवाही करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा : मंत्री राजपूत

भोपाल

सागर जिले में गेहूं खरीदी में गंभीरिया के लक्ष्मी नगर स्थित  देव प्रभाकर हाउस में गंभीर अनियमितताओं और किसानों के हितों से खिलवाड़ के मामले को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को तत्काल कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। मंत्री  राजपूत के निर्देश पर मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर सहायक आपूर्ति अधिकारी निशांत पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, वहीं जिला आपूर्ति नियंत्रक ज्योति बघेल को सागर जिले प्रभार से हटा कर भोपाल मुख्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्री  राजपूत द्वारा कलेक्टर सागर को यह भी निर्देशित किया गया है कि खाद्य विभाग के अतिरिक्त उपार्जन के लिए जिम्मेदार अन्य विभाग के कर्मचारियों की भूमिका की जांच भी की जाए और दोषी होने पर उनके विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई की जाये। मंत्री  राजपूत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों की मेहनत और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपार्जन प्रक्रिया में यदि कोई अधिकारी, कर्मचारी, संस्था या समूह लापरवाही अथवा भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाता है तो उसके विरूद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बोरियों में गेहूं के साथ मिट्टी मिलाने का मामला

जिले के एक वेयरहाउस में गेहूं की बोरियों में भारी मात्रा में मिट्टी मिलने का मामला सामने आया। प्रारंभिक जांच में कुछ बोरियों में गड़बड़ी दिखाई दी थी। बोरियों में गेहूं के स्थान पर अत्यधिक मात्रा में मिट्टी पाए जाने की पुष्टि हुई। जानकारी के अनुसार कुछ बोरियों में मिट्टी की अधिक मात्रा पाई गई। खाद्य मंत्री  राजपूत के निर्देश पर प्रशासन ने तत्काल जांच शुरू की और संबंधित स्व-सहायता समूह के पदाधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया गया। इसके साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।

सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध

मंत्री  राजपूत ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही न हो, इसके लिए सरकार लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को सशक्त बनाने, उनकी आय बढ़ाने और कृषि व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति या अधिकारी किसानों के अधिकारों पर कुठाराघात करने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री  राजपूत ने कहा, किसान हमारे अन्नदाता हैं। उनकी मेहनत और विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। गेहूं खरीदी में हुई गड़बड़ी अत्यंत गंभीर मामला है। मैंने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कदम उठाए हैं। जांच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी, संस्था या अन्य व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। किसानों के हितों की रक्षा करना हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के लिए प्रतिबद्ध है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत की जाएगी।

 

 

आयकर अधिनियम-2025 और जीएसटी विवादों पर विशेषज्ञों ने खोले नए प्रावधानों के राज

विवेक झा, भोपाल। बदलते कर कानूनों और अनुपालन की नई चुनौतियों के बीच टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल द्वारा शनिवार को मोटल शिराज में एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया। संगोष्ठी में आयकर अधिनियम-2025, प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन और जीएसटी लिटिगेशन जैसे समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विश्वास कैलाश सारंग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि लगभग 150 अधिवक्ताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कर सलाहकारों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

कर संग्रहण में पेशेवरों की भूमिका अहम : विश्वास कैलाश सारंग

मुख्य अतिथि विश्वास कैलाश सारंग ने अपने संबोधन में कहा कि देश की कर व्यवस्था को मजबूत बनाने में कर पेशेवरों, अधिवक्ताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और सरल कर प्रणाली विकसित भारत की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने केंद्र सरकार की समावेशी आर्थिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि कर सुधारों का उद्देश्य अनुपालन को आसान बनाना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

आयकर अधिनियम-2025 से कानून होगा अधिक सरल

प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए पंकज शाह ने “प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन एवं आयकर अधिनियम-2025” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए कहा कि नए आयकर कानून का उद्देश्य प्रावधानों को सरल, स्पष्ट और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है। उन्होंने बताया कि छोटे व्यापारियों, स्वतंत्र पेशेवरों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े करदाताओं के लिए प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन व्यवस्था अनुपालन का आसान विकल्प प्रदान करती है, जिससे जटिल लेखांकन और विस्तृत रिकॉर्ड रखने का बोझ कम हो सकता है।

उन्होंने प्रतिभागियों को समय पर आयकर रिटर्न दाखिल करने, डिजिटल भुगतान प्रणाली अपनाने और वित्तीय अभिलेखों को व्यवस्थित रखने की सलाह दी। सीए शाह ने कहा कि नए कानून में कई प्रावधानों को पुनर्गठित कर अधिक तार्किक स्वरूप दिया गया है, जिससे करदाताओं और पेशेवरों दोनों को सुविधा मिलेगी।

प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन से छोटे कारोबारियों को राहत

अपने व्याख्यान में सीए पंकज शाह ने बताया कि प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन योजना का उद्देश्य छोटे और मध्यम करदाताओं के लिए कर अनुपालन को आसान बनाना है। इस व्यवस्था के तहत पात्र व्यवसायी निर्धारित शर्तों के अनुसार अनुमानित आय के आधार पर कर दे सकते हैं, जिससे विस्तृत खातों और ऑडिट की जटिलताओं से राहत मिलती है। उन्होंने कहा कि सही योजना का चयन करदाता के व्यवसाय की प्रकृति और आय के आधार पर किया जाना चाहिए।

जीएसटी नोटिस को हल्के में न लें : सीए आंचल कपूर

जीएसटी कानून और उससे जुड़े विवादों पर आयोजित विशेष सत्र में सीए आंचल कपूर ने “जीएसटी लिटिगेशन : नोटिस से अपीलीय अधिकरण तक” विषय पर व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जीएसटी विभाग से प्राप्त किसी भी नोटिस का समयबद्ध और तथ्यों पर आधारित उत्तर देना अत्यंत आवश्यक है।

लापरवाही या देरी अनावश्यक विवादों और दंडात्मक कार्रवाई का कारण बन सकती है।

उन्होंने प्रतिभागियों को शो-कॉज नोटिस, जांच प्रक्रिया, मांग आदेश, अपील और अपीलीय अधिकरण तक की संपूर्ण कानूनी प्रक्रिया सरल भाषा में समझाई।

दस्तावेज और तथ्य ही मजबूत बचाव का आधार

सीए आंचल कपूर ने कहा कि किसी भी जीएसटी विवाद में उचित दस्तावेजी रिकॉर्ड सबसे बड़ा बचाव होता है। उन्होंने वास्तविक मामलों और न्यायिक निर्णयों के उदाहरण देते हुए बताया कि नोटिस का उत्तर विधिक प्रावधानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन और समय पर अपील दायर करना करदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

प्रतिभागियों ने पूछे व्यावहारिक सवाल

संगोष्ठी के दौरान उपस्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, अधिवक्ताओं, उद्योगपतियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने जीएसटी आकलन, शो-कॉज नोटिस, मांग आदेश, अपील प्रक्रिया और अपीलीय अधिकरण से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने सभी जिज्ञासाओं का विस्तार से समाधान प्रस्तुत किया, जिसे प्रतिभागियों ने अत्यंत उपयोगी और व्यवहारिक बताया।

ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों की बढ़ी जरूरत

कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने कहा कि बदलते कर कानूनों और बढ़ते कर विवादों के दौर में इस प्रकार की संगोष्ठियां करदाताओं और पेशेवरों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रतिभागियों को प्राप्त जानकारी भविष्य में कर अनुपालन और विवाद प्रबंधन में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करेगी।

संस्था के पदाधिकारी और वरिष्ठ सदस्य रहे मौजूद

सेमिनार में टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज पारख, उपाध्यक्ष मयंक अग्रवाल एवं अंकुर अग्रवाल, सचिव धीरज अग्रवाल, सह-सचिव संदीप चौहान, कोषाध्यक्ष दीपेश भंडारी तथा वरिष्ठ सदस्य आर.के. पारख, अमित जैन, संदीप मुखर्जी, गोविंद वसंता, राजेश्वर दयाल, सौरभ श्रीवास्तव, प्रदीप शर्मा, जयंत जोशी सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।

संगोष्ठी से निकले प्रमुख संदेश

  • आयकर अधिनियम-2025 का उद्देश्य कर कानूनों को अधिक सरल और व्यवस्थित बनाना है।
  • प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन छोटे व्यापारियों और पेशेवरों के लिए अनुपालन का आसान विकल्प हो सकता है।
  • समय पर आयकर रिटर्न दाखिल करना और डिजिटल लेन-देन अपनाना महत्वपूर्ण है।
  • जीएसटी नोटिसों का तथ्यों और विधिक आधार पर समयबद्ध उत्तर देना आवश्यक है।
  • मजबूत दस्तावेजी रिकॉर्ड और सही अपील प्रक्रिया विवादों से बचाव में सहायक होती है।
  • बदलते कर कानूनों को समझने के लिए नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम समय की जरूरत हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीट परीक्षा के सुव्यवस्थित संचालन के संबंध में दिए दिशा-निर्देश

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स वीसी में 21 जून को होने वाली नीट परीक्षा के सुव्यवस्थित संचालन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीट परीक्षा केंद्रों के आसपास यातायात के सुचारू संचालन के लिए विशेष व्यवस्था की जाए। पुलिस प्रशासन परीक्षार्थियों के साथ सकारात्मक भाव से हर संभव सहयोग प्रदान करे। जिला स्तर पर सोशल मीडिया पर नजर रखी जाए तथा अफवाह फैलने की स्थिति में तत्काल वस्तुस्थिति से लोगों को अवगत कराया जाए। सभी परीक्षा केंद्रों पर पेयजल सहित सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 30 जिलों में नीट परीक्षा के लिए 283 सेंटर बनाए गए हैं। सर्वाधिक 57 केंद्र इंदौर में हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति मती द्रोपदी मुर्मू के प्रदेश में होने वाले दौरे के दृष्टिगत आवश्यकत तैयारियों के संबंध में भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में हुई बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई,  अनुपम राजन और  शिव शेखर शुक्ला उपस्थित थे।

जिलों की बनेंगी विकास पुस्तिकाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला स्तर पर विकास और जनकल्याण योजनाओं के संचालन की स्थिति की गहन समीक्षा की जाएगी। जुलाई माह में कलेक्टर्स-एसपी कांफ्रेंस भी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर जिला स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में जिले के प्रभारी मंत्री अपने संबोधन में विस्तृत रूप से जिले की उपलब्धियां प्रस्तुत करेंगे। प्रभारी मंत्रियों के संबोधन से पहले राज्य स्तर से मुख्यमंत्री का संबोधन होगा। यह सभी जिलों में प्रसारित होगा। जिला स्तर की उपलब्धियों के प्रस्तुतिकरण से जिला स्तर पर संचालित विकास और जनकल्याण गतिविधियों का दस्तावेजीकरण होगा, इसकी तैयारी तत्काल आरंभ की जाए। इस आधार पर जिलों की विकास पुस्तिका बनेगी।

 

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