बालाघाट में बैगा बच्चों की बीमारी की जांच रिपोर्ट में स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था की कमियां उजागर, 196 मामलों में 156 बच्चे

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बालाघाट। बैगा आदिवासी बच्चों की मौत और बुखार-रैश के मामलों की जांच के लिए केंद्र से पहुंची राष्ट्रीय संयुक्त आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (NJORT) की विस्तृत रिपोर्ट में जिले की बीमारी निगरानी व्यवस्था से जुड़ी कई कमियां सामने आई हैं। 18 मई से 17 अगस्त के बीच की जांच के आधार पर तैयार रिपोर्ट में सर्विलांस, प्रयोगशाला, टीकाकरण और पोषण कार्यक्रमों के बीच आंकड़ों के संग्रह, रिपोर्टिंग और साझा करने की व्यवस्था में खामियां दर्ज की गई हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिला सर्विलांस यूनिट में कर्मचारियों की कमी है। जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट का पद खाली है। इसके अलावा जिले में जिला पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरी नहीं है और माइक्रोबायोलॉजिस्ट का पद भी रिक्त है। सबसे अधिक प्रभावित गांव में एक साल से अधिक समय से आशा कार्यकर्ता नहीं होने की जानकारी भी सामने आई है।

मरीजों की पहचान और फॉलोअप पर असर

एनजेओआरटी के मुताबिक, स्वास्थ्य व्यवस्था में इन कमियों का असर मरीजों की सक्रिय पहचान, समुदाय में बीमारी को लेकर जागरूकता और मरीजों के फॉलोअप पर पड़ रहा है।

अब मध्यप्रदेश रूरल हेल्थ मिशन की डायरेक्टर ने एनजेओआरटी की अंतिम जांच रिपोर्ट आवश्यक कार्रवाई के लिए कलेक्टर को भेज दी है।

196 मामलों में 156 बच्चे 10 साल से कम उम्र के

एनजेओआरटी की जांच के दौरान कुल 196 मामले दर्ज किए गए। इनमें 156 मरीज 10 साल से कम उम्र के बच्चे थे, जो कुल मामलों का करीब 80 प्रतिशत है। इनमें 108 बच्चे 0 से 5 वर्ष और 48 बच्चे 6 से 10 वर्ष की आयु के थे।

उम्र के अनुसार देखें तो एक वर्ष से कम उम्र के 12 बच्चे और 1 से 5 वर्ष की आयु के 96 बच्चे प्रभावित पाए गए। मामलों में 101 लड़कियां और 95 लड़के शामिल थे। इसके अलावा 25 वर्ष से अधिक उम्र की 11 युवतियां भी मरीजों में शामिल थीं।

सर्दी-बुखार और मलेरिया के सबसे ज्यादा मामले

रिपोर्ट में दर्ज मरीजों में 173 को सर्दी-बुखार, 52 को मलेरिया और 51 में शरीर पर दाने पाए गए। दो मरीजों में मुंह में घाव भी दर्ज किए गए।

ये मामले बालाघाट जिले के 31 गांवों से सामने आए। सबसे ज्यादा मामले कुंडेकासा में 32, बोंदारी में 27, कोरका में 22, गथिया में 18 और घुम्मर में 15 दर्ज किए गए।

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